वसूली से भड़कीं आशाएं

Pratapgarh Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। कई माह से बजट के अभाव में ठप जेएसवाई चेक का वितरण किया जा रहा है। सक्रिय दलालों से परेशान आशाएं शुक्रवार को बिफर पड़ीं। काउंटर के दरवाजे पर लगी भीड़ से धन उगाही कर रहेदलाल की आशाओं ने जम कर धुनाई की। माहौल गरमाते देख सुरक्षा के लिए महिला होमगार्ड लगाई गई। इसके बाद भी हालात काबू में नहीं आए। धक्का-मुक्की के बीच शाम पांच बजे तक चेक बांटे गये। जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज के लिए मरीजों की खासी भीड़ रही।
जिला महिला अस्पताल में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) का बजट कई माह से समाप्त था। पैसे के अभाव में करीब 1000 महिलाओं को प्रसव बाद भी 1400 रुपए का चेक नहीं दिया गया। इन सभी के फार्म चेक देने के लिए जमा करा लिए गए थे। हफ्ते भर पहले 45 लाख रुपए विभाग को मिले। चेक लेने के लिए यहां आशाओं के साथ पात्र महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। काउंटर के दरवाजे से सीधे चेक बांटने व फार्म लेने का काम हो रहा था। शुक्रवार सुबह भीड़ ज्यादा देख दलालों ने कमाई का तरीका ढूंढ लिया। वे सुबह से बैठे लोगों से 50 से 100 रुपए लेकर फार्म लेने लगे। धन उगाही कर रहा एक दलाल आशाओं से उलझ गया। इससे आक्रोशित कई आशाएं उस पर टूट पड़ीं। आशाओं के जरिए साथी की पिटाई देख अन्य दलाल दुबक गए। पिट रहा दलाल किसी तरह जान बचा कर भाग खड़ा हुआ। इसके बाद हालात में गर्माहट आने लगी। यह देख सुरक्षा के तौर पर महिला होमगार्ड को लगाया गया। इसके बाद भी चेक के लिए आशाएं आपस में धक्कामुक्की करती रहीं। अब तक करीब 400 लोगों को चेक दिया जा चुका है। चेक के लिए लगभग 200 नए फार्म भी आ गए हैं। लोग कहते हैं कि वितरण का सिस्टम ठीक न होने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई। यदि लाइन लगवा कर चेक बांटा जाए तो ऐसे हालात से बचा जा सकता है। जिला अस्पताल में भी इलाज के लिए काफी संख्या में मरीज आए थे। डाक्टरों के चैम्बर खाली होने से उन्हें इंतजार करना पड़ा।
आपरेशन में खुद की लापरवाही की तोहमत जिम्मेदार महिला मरीज पर थोप रहे हैं। पंद्रह दिन पूर्व मानधाता के कैलाकला गांव की रुचि को आपरेशन कर उसका प्रसव कराया गया। इसके बाद उसे सर्जिकल वार्ड में भर्ती किया गया। आपरेशन बाद उसके पेट में पस (मवाद) बनने लगा। डाक्टरों ने 15 दिन के भीतर दो आपरेशन किये, लेकिन आराम नहीं मिला। अब तीसरे आपरेशन की तैयारी है। आपरेशन-दर-आपरेशन से महिला की हालत नाजुक है। जिम्मेदार कहते हैं कि रुचि को खांसी आने से टांका टूट गया। इससे पस बनने लगा। मामले में डाक्टरों की लापरवाही है या फिर मरीज की खांसी की वजह। यह कह पाना जांच के बगैर मुश्किल है। इतना जरूर है कि रुचि जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रही है। महिला सीएमएस मधुरिमा श्रीवास्तव अवकाश पर बताई गईं। चार्ज एसके त्रिपाठी के पास था। फोन बंद होने की वजह से उनसे बात नहीं हो सकी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीके पांडेय ने कहा कि चेक वितरण लाइन से होना चाहिए। बाहरी लोग पैसा वसूलते हैं तो लोग उसे दबोच कर सूचना दें। उस पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। दलालों का इलाज सिर्फ पिटाई ही है। आपरेशन किसने किया सीएमएस के आने पर पड़ताल होगी। डाक्टर दोषी हैं तो कार्रवाई की जाएगी।

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