भितरघात के शिकार हो गए रविप्रताप

Pratapgarh Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
प्रतापगढ़। महानगरों में अपना परचम लहराने वाली भाजपा को बेल्हा में भितरघात का शिकार होना पड़ा। प्रत्याशी चयन में पार्टी के धुरंधरों की राय को तवज्जो नहीं दी गई। इससे उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को नीचा दिखाने का निर्णय ले लिया। प्रचार के बहाने ऐसी मुहिम चलाई कि प्रत्याशी की दूरी जनता से बढ़ती गई। प्रत्याशी के प्रयासों पर पानी फेरना इनकी पहली रणनीति थी। परिणामस्वरूप पंद्रह साल से पहले स्थान पर रहने वाली पार्टी चौथे स्थान पर पहुंच गई। प्रत्याशी रविप्रताप सिंह दगाबाजों की इस नीति से पूरी तरह अनजान थे। विधानसभा की सीटों पर भाजपा का जादू भले ही न चला हो लेकिन शहर में उसकी पकड़ काफी मजबूत है। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी चौथे स्थान पर पहुंच गया। राजनीतिक प्रेक्षक इसका कारण भितरघात बताते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नगरपालिका अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का चयन करने के लिए पार्टी ने स्थानीय नेताओंकी राय मांगी थी। मगर प्रत्याशी चयन में उसे तवज्जो नहीं दी गई। युवा प्रत्याशी को टिकट देने का अपना फैसला सुना दिया। पार्टी हाईकमान का यह निर्णय कुछ दिग्गजों के गले नहीं उतरा। वे खुलकर विरोध तो नहीं कर सके मगर प्रदेश नेतृत्व को नीचा दिखाने की ठान ली। परिणामस्वरूप वे और उनके कार्यकर्ता दिखाने के लिए तो प्रत्याशी के साथ लगे रहे लेकिन अंदर ही अंदर दूसरे का प्रचार करते रहे। पहली बार चुनाव मैदान में कूदे भाजपा प्रत्याशी रविप्रताप सिंह धुरंधरों की इस चाल को समझ नहीं सके। समझते भी वह कैसे सुबह-शाम उनके कार्यकर्ता नाश्ता और खाना के वक्त प्रत्याशी के कार्यालय में जो पहुंच जाते थे। ऐसे लोग न सिर्फ रविप्रताप सिंह को प्रचार के नाम पर धोखा दे रहे थे बल्कि वे सुबह जिन मोहल्लों में घूमकर आते थे वहां शाम को यह भितरघाती पहुंच उनके प्रयासों पर पानी फेर देते थे। चर्चा तो यहां तक है कि सुबह यह लोग जाकर प्रचार करते और शाम को उन्हीं मतदाताओं के घर जाकर कमजोर प्रत्याशी बता वोट बर्बाद न करने की सलाह दे आते थे। यही नहीं वे भाजपा प्रत्याशी की रणनीति भी बागी प्रत्याशी तक पहुंचाने का काम करते थे। इस भितरघात के चलते भाजपा प्रत्याशी की स्थिति कमजोर होती गई। इसके अलावा अंतर्कलह से जूझ रही भाजपा में कार्यकर्ताओंके कई गुट भी हो गए हैं। मगर प्रत्याशी को दिखाने के लिए वे सभी एक मंच पर खड़े हो गए थे। परिणाम आने के बाद प्रत्याशी को मिले 3030 मतों ने कार्यकर्ताओं की पोल खोल दी। साबित हो गया कि अगर अपनों ने दगा न की होती तो शायद परिणाम कुछ और ही होता। ऐसे लोगों का दोहरा चरित्र इसी से उजागर हो जाता है कि रविवार को बागी हरिप्रताप सिंह को बधाई देने के बाद यह लोग भाजपा प्रत्याशी से भी सहानुभूति जताने पहुंच गए थे। हालांकि भाजपा प्रत्याशी रवि प्रताप सिंह एक कुशल नेता की तरह धुरंधरों की इस चाल को समझ जाने के बाद खुलासा करने की बजाय अपनी किस्मत को कोस रहे हैं।

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