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त्योहारी सीजन में सब्जियां भी शुद्ध नहीं, केमिकल से पकाकर चमकाई जा रहीं

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Tue, 18 Feb 2020 06:54 PM IST
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पीलीभीत। बाजार में ताजी और हरी सब्जियों को देखकर आप उन्हें अच्छा समझ रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। जो सब्जियां फड़ या ठेलों पर आपको हरी भरी और चमचमाती दिख रही हैं, वे दरअसल ताजी न होकर केमिकल से पकाई और चमकाई गई हैं। सब्जियों को चमकदार और ताजा दिखाने के लिए उनमें केमिकल युक्त रंग लगाया जा रहा है। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर लौकी और बैंगन के अलावा अन्य सब्जियों की लंबाई बढ़ाई जा रही है। एफएसडीए इस खेल पर शिकंजा कसने के बजाय खामोश है।
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होली का त्योहार नजदीक है। शादी बरातों का सीजन भी चल रहा है। बाजार में डिमांड अधिक देखते हुए मिलावटखोरों ने अपना नेटवर्क तेजी से सक्रिय कर दिया है। जिधर नजर दौड़ाओ, वहीं मिलावट मिलेगी। फिर चाहे वह सरसों का तेल हो या फिर दूध, मावा, दाल, मसाले या सब्जियां ही क्यों न हों। कारोबारी मोटा मुनाफा कमाने के लिए सब्जियों को रातोंरात केमिकल लगाकर उन्हें चमकदार बनाने के बाद सुबह बेचते हैं। केमिकल युक्त सब्जियां पेट में एसिडिटी बनाकर लिवर और किडनी पर असर डाल रही हैं। खराब और बेरंग सब्जियों को कम दाम में खरीदने के बाद उनमें केमिकल युक्त रंग लगाया जाता है, इससे वे पकी हुई और ताजा नजर आती हैं। यह केमिकल सरसों के तेल या रिफाइंड लगाकर चमकाया जाता है। आसपास सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी मिलावटखोरों ने बैंगन और लौकी की लंबाई बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाना सिखा दिया है।
10 से 15 मिनट में चमक उठती है सब्जी
मिलावटखोरी करने वाले मंडी से कम दाम में टमाटर, बैंगन, लौकी, कटहल, भिंडी, पपीता, कच्चा केला, टिंडे, परमल, पत्ता गोभी, फूल गोभी जैसी सब्जियों को खरीद लेते हैं। बासी और सूख चूकी सब्जियां कम दाम में मिल जाती हैं। फिर इन्हें गोदाम में ले जाकर केमिकल युक्त रंग से सरसों के तेल या पॉम ऑयल से चमकदार बनाते हैं। केमिकलयुक्त कलर लगने के बाद सब्जी चमककर और तरोताजा दिखने लगती है। एक सब्जी विक्रेता का कहना है कि सब्जी कितनी ही बासी क्यों न हो। गोदाम में पहुंचते ही 10 से 15 मिनट में सब्जी चमकने लगती है। सब्जी की चमक देख कोई भी धोखा खा सकता है। रंगी हुई सब्जी मंहंगे दाम पर बिकती है।
इस तरह से चमकाते हैं सब्जियां
सब्जियों पर केमिकल युक्त रंग चढ़ाने के लिए कारोबार गोपनीय गोदाम बनाते हैं। वहां एक बड़े वर्तन में सब्जी से जुड़ा रंग का घोल तैयार किया जाता है। उसमें सरसों का तेल या पॉम ऑयल या फिर रिफाइंड मिलाया जाता है। उसी में कुछ केमिकल की मात्रा रखी जाती है। इन सबका घोल तैयार करके बासी, सूख चुकी सब्जी को उसमें डुबोकर रख देते हैं। कुछ देर बाद जब उन पर रंग चढ़ जाता है तो बाहर निकालकर पोंछ देते हैं। इससे सब्जी चमकदार बन जाती है। यह सब्जी बाजार में तरोताजा और चमकदार दिखती है। बेहतर दामों में बिकती है।
हरी सब्जियों में सर्वाधिक खेल
लॉकी और बैंगन को बड़ा करने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल आम बात है। हरी सब्जियों की डिमांड बाजार में अधिक रहती है। ऐसे में मिलावटखोर हरी सब्जियों को ही चमकदार बनाने में पूरा जोर लगाते हैं। पत्तागोभी, परवल, पालक, करेला, शिमला मिर्च, भिंडी, तोरई, मेथी, मूली, सरसों का साग समेत अन्य सब्जियों को हरे केमिकल युक्त रंग से रंगा जाता है। टमाटर में केमिकल युक्त लाल रंग लगाकर चमकदार बनाते हैं। सब्जी बेचने वाले एक दुकानदार से जब इसको लेकर बात की गई तो पहले तो वह अपनी दुकान की सब्जियों के प्राकृतिक होने की बात कहता रहा। बाद में जब उससे रंग की हुई सब्जी की मिलावट को लेकर पूछा गया तो बोला कि इसमें उनका कोई फायदा नहीं है। ग्राहकों को भी सब्जी दिखने में अच्छी लगती है। वह उसे आसानी से खरीद लेते हैं। अगर सब्जी में चमक न हो तो बिकने में दिक्कत आती है।
ऐसे करें केमिकल युक्त सब्जी की पहचान
केमिकल युक्त सब्जी की पहचान करना वैसे तो मुश्किल काम है। लेकिन ठेले या फड़ पर रखी कोई सब्जी अपने प्राकृतिक रंग से ज्यादा चमक रही है और उसका रंग भी कुछ अंतर का अंदेशा जता रहा है तो उसे रगड़कर देखना चाहिए। दुकानदारों से उसकी चमक के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो एक सफेद कपड़े पर उस सब्जी को रगड़ना चाहिए..अगर रंग की हुई होगी तो कपड़े पर रंग उतर आएगा। कई बार तो मोम की परत भी चमक बढ़ाने को चढ़ा दी जाती है। उसका पता लगाने का भी यही आसान तरीका है। इसके अलावा गीली रुई को भी सब्जी पर रगड़ने से उसकी पहचान की जा सकती है। सब्जी को सूंघकर उसकी महक से भी पता लगाया जा सकता है कि सब्जी का रंग प्राकृतिक है या केमिकल युक्त।
लिवर और किडनी पर पड़ेगा असर
केमिकल युक्त रंगी सब्जियों का सेवन शरीर में एलर्जी पैदा कर सकता है। लिवर और किडनी पर भी असर डालता है। खासकर पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एसिडिटी बनना आम बात है। सब्जी रंगने में इस्तेमाल होने वाले सभी तरह के केमिकल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। - डॉ.सीबी चौरसिया, वरिष्ठ फिजिशियन
बाजार में मिलावटखोरी को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिदिन छापे मारकर सैंपल लिए जा रहे हैं। परीक्षण रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई भी कराई जाती है। सब्जियों में मिलावट या केमिकल युक्त रंग लगाने के मामले को भी गंभीरता से लेकर दिखवाया जाएगा। - शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए टीम
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