सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है शेरपुरकलां की होली

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Thu, 05 Mar 2020 07:18 PM IST
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पूरनपुर (पीलीभीत)। देश की धड़कन दिल्ली में चल रही नफरत की आंधी में जहां तमाम लोग उड़े जा रहे हैं वहीं इस इलाके का
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मुस्लिम बाहुल्य गांव शेरपुर सारे जहां को एक अरसे से प्यार-दुलार और एकता का पैगाम दे रहा है। इस गांव में हिंदू परिवार नाममात्र के रहते हैं। मगर, वह हर साल होली अपने हिंदू भाइयों के साथ मिलकर मनाते हैं। हिंदुओं के चंद परिवार जब होली के दिन रंग खेलने के बाद मुस्लिमों से गले मिलने उनके घर जाते हैं तो वहां जमकर होली का हुड़दंग करते हैं। फिर वह उनसे मीठी नोकझोंक करते हुए अपना फगुआ (नेग) मांगते हैं। मुस्लिमों से बिना फगुआ लिए होरियारे वापस नहीं लौटते। होली के हुड़दंग में मुस्लिम समाज के युवा भी शामिल होते हैं। यह परंपरा बरसों से सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल बनी हुई है।
करीब 30 हजार वोटर और एक लाख आबादी वाले मुस्लिम बाहुल्य गांव शेरपुरकलां में पहले 30 प्रतिशत हिंदू रहते थे। मगर, हिंदुओं के तमाम परिवार पूरनपुर में आकर बस गए। अब यहां थोड़े ही हिंदू परिवार बचे हैं। वक्त के साथ गांव का माहौल भी बदल गया है। लोग भी बदल गए, लेकिन इस गांव में होली मनाने का तौर तरीका नहीं बदला। गांव में चार दशक पहले जैसी होली मनाई जाती थी, ठीक वैसी ही आज भी मनाई जाती है। हिंदू परिवारों की संख्या कम होने से होली का धमाल तो अन्य गांवों में तुलना में कम समय ही रहता है, लेकिन इस कमी को मुस्लिम समुदाय के युवक मिलकर पूरा करते हैं। वह भी होली के रंग में हिंदू भाइयों के साथ सराबोर हो जाते हैं। पूरे गांव में धमाल मचाते घूमते हैं। अगर कोई हिंदू भाई उनके होली के दिन रंग लगाता है तो वह बुरा नहीं मानते। खुशी-खुशी रंग लगवा लेते हैं। मुस्लिम समुदाय के युवक हिंदुओं के साथ होली की खुशियों में शामिल होते है। हिंदू परिवारों को भी अपने गांव के मुस्लिमों पर नाज है। दुलहड़ी वाले दिन होलिका स्थल से होली का धमाल शुरू होते ही हुड़दंग शुरू हो जाता है। फिर क्या रास्ते में किसी प्रतिष्ठित मुस्लिम का घर पड़े तो उसके दरवाजे पर रंगों की बौछार होती है। मुस्लिम घरों में दरवाजे पर जमकर हुड़दंग होता है। यह सिलसिला तब तक जारी रहता है, जब तक होरियारों को उस घर से नेग नहीं मिल जागता। होरियारे मुस्लिम घरों से फगुआ लेकर ही लौटते हैं। यह परंपरा बरसों से जारी है। यह अपने आप में हिंदू मुस्लिम एकता की जीती जागती मिसाल है।
पहले महिलाएं लगा देती थी जाम
पूरनपुर। माधोटांडा में सड़क पर जाम लगाकर महिलाएं होली खेलती है। समय के साथ ही होली खेलने के तौर तरीके में भी परिवर्तन हो गया है। महिलाएं खटीमा-पूरनपुर मार्ग पर जाम लगाकर होली का आनंद लेती थी। इस पर मार्ग पर पूरी तरह से आवागमन बंद रहता था। उस मार्ग से कोई निकलने का प्रयास करता था, तो उसके बदले कुछ देना पड़ता था। अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है। अब महिलाएं ठाकुरद्वारा मंदिर में एकत्र होकर होली खेलती हैं।
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