नेताओं और अफसरों ने भी बना ली समितियां, कैसे रुके धान खरीद का खेल

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 12:56 AM IST
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मंडी समिति में लगा धान का ढेर
मंडी समिति में लगा धान का ढेर - फोटो : PILIBHIT

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पीलीभीत। धान खरीद को पारदर्शिता से पूरा कराने के लिए शासन-प्रशासन सख्त है। गड़बड़ी पकड़े जाने पर कार्रवाई भी की जा रही है। मगर ग्रामीण इलाकों में अब भी खेल रुक नहीं रहा है। आए दिन नए मामले प्रकाश में आ रहे हैं। क्रय केंद्रों से लेकर राइस मिलर तक धान खरीद में खेल पर एक दिन पहले सांसद वरुण गांधी भी डीएम से पत्राचार कर चुके हैं। वहीं अब नया मामला समितियों को लेकर चर्चाओं में है। क्रय केंद्र पाने के लिए नेताओं से लेकर क्रय एजेंसियों के पुराने अधिकारियों ने समितियां बनाकर केंद्र पा लिए हैं। उनके द्वारा भी खरीद कराई जा रही है। कुछ राइस मिलर भी समिति बनाकर धान खरीद में कूद पड़े हैं। ऐसे में खेल पर शिकंजा कसना आसान नहीं लग रहा।
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एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद में करीब 70 से अधिक क्रय केंद्रों पर समितियों के काम करने की बात अधिकारी स्वीकारते हैं। इसके पीछे वजह के तौर पर बताया जाता है कि समितियों के पास स्टाफ और संसाधन की बेहतर व्यवस्था रहती है। इसी को देखते हुए समितियों के द्वारा भी खरीद कराने पर जोर दिया जाता है। धांधली के चर्चे तो हर साल रहते हैं। मगर अबकी बार डीएम पुलकित खरे द्वारा शासन की मंशा के तहत खरीद कराने को सख्ती की गई है, जिसे देखते हुए अब कुछ समितियों को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गरमा गया है।
एक समिति क्रय एजेंसी के पूर्व जिला प्रबंधक की बताई जा रही है। भाजपा में अहम पदों पर रह चुके एक बड़े नेता भी समिति चला रहे हैं। एक पूर्व जनप्रतिनिधि की भी समिति बनी हुई है। मकसद कुछ भी बताया जाए मगर चर्चा यही है कि धान खरीद में क्रय केंद्र पाने के लिए ही ऐसा लंबे समय से किया जा रहा है। खरीद के कामों में ही समितियां सक्रिय दिखाई देने की बात अधिकारी तक स्वीकारते हैं। मगर व इस संबंध में खुलकर नहीं बोलना चाहते।
जनपद में करीब 70 समितियां धान खरीद कर रही हैं। इसमें नेता, पूर्व अफसर से लेकर व्यापारी सभी शामिल हैं। ऐसा कोई नियम भी नहीं है कि उन्हें समिति बनाने से रोका जा सके। समितियों के पास स्टाफ, संसाधन मुहैया रहता है। इसी उद्देश्य से इन्हें लगाया जाता है। - वीर विक्रम सिंह, एआर कोऑपरेटिव
क्रय केंद्र बंद होने से बिगड़े हालात, गुस्साए किसान
पीलीभीत। धान खरीद में प्रशासन के सख्ती करने पर यूपीएसएस के 31 और नेफेड के 15 क्रय केंद्र बंद कर दिए गए थे। क्रय एजेंसियों ने तमाम दिक्कतों का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए थे, जबकि इसके पीछे सख्ती को ही अहम वजह माना जाता रहा। प्रशासन इन स्थानों पर कम खरीद वाले क्रय केंद्रों को शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। मगर दूसरे ही दिन बृहस्पतिवार को क्रय केंद्रों के बंद होने का असर दिखाई देने लगा। किसान धान की तौल कराने के लिए टोकन ले चुके थे। अब क्रय केंद्र बंद होने पर उन्हें वहां भटकना पड़ा। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर की मंडी समिति में भी संबंधित क्रय केंद्रों से जुड़े किसानों की तौल नहीं हो सकी। काफी देर बाद भी समाधान न होने पर किसान गुस्सा गए और मंडी सचिव विजिन कुमार के पास पहुंच गए। अव्यवस्था पर नाराजगी जताई। किसानों को किसी तरह शांत कराया जा सका।
एक सप्ताह बाद भी क्रय केंद्र मंडी में नहीं हुए शिफ्ट
बीसलपुर। डीएम ने मंडी में धान की आवक को देखते हुए एक सप्ताह पूर्व नवदिया रोहनिया, जसोली दिवाली, रढ़ैता और रसायाखानपुर के राजकीय धान क्रय केंद्रों को मंडी में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। इनमें से नवदिया रोहनिया और जसोली दिवाली के क्रय केंद्र अगले दिन ही मंडी में शिफ्ट हो गए थे, लेकिन रढ़ैता और रसायाखानपुर के क्रय केंद्र मंडी में शिफ्ट नहीं हुए। वरिष्ठ विपणन निरीक्षक रमेश पाल ने बताया कि दोनों केंद्रों के प्रभारियों से अपने केंद्र तत्काल मंडी में शिफ्ट करने को कह दिया गया है।
क्रय केंद्र पर मांगा जा रहा है सुविधा शुल्क
पूरनपुर। भारतीय किसान संघ के अमर सिंह, बद्री प्रसाद, अनिल, पाल सिंह, तेजपाल सिंह, श्रीकृष्ण आदि ने बृहस्पतिवार को गांव अशोकपुर बिलंदपुर के धान खरीद केंद्र के प्रभारी की एसडीएम से शिकायत की। आरोप है कि क्रय केंद्र पर 150 रुपये प्रति क्विंटल सुविधा शुल्क की मांग किसानों से की जा रही है, जो किसान रुपये देने से इनकार कर रहे हैं उनका धान नहीं तौला जा रहा है। ऐसे में पखवाड़ा भर से किसान खरीद केंद्र पर धान लिए खड़े हैं। किसानों ने एसडीएम से मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। संवाद
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