भाई ने कहा, पुलिस पिटाई से मरा लीलाधर

Pilibhit Published by: Updated Wed, 10 Jul 2013 05:32 AM IST
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पीलीभीत। कोतवाली बीसलपुर पुलिस की हिरासत में हुई दलित लीलाधर कोरी की मौत से खाकी खून से सनी नजर आने लगी है। मृतक के भाई ने पुलिस पर उसको मारने-पीटने के दौरान मौत होने का आरोप लगाते हुए एसपी को तहरीर दी है। एसपी ने मामले की जांच एएसपी को सौंपी है।
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बीसलपुर के गांव हाफिज नगर बन्हाई निवासी लीलाधर कोरी के भाई वासुदेव ने एसपी को दी तहरीर में कहा है कि लीलाधर के खेतों में लगी शिवाली की फसल चौपट हो गई थी। उसका भाई शिव भक्त था। फसल चौपट होने से कुपित होकर गांव के मंदिर स्थित शिवलिंग को खंडित कर दिया था। आठ जुलाई की रात करीब 10 बजे पुलिस के सीओ, दरोगा अफसर खां 8-10 सिपाहियों के साथ भाई लीलाधर, भाभी भारती देवी और मां राम लली को पुलिस की गाड़ी में बैठाकर बीसलपुर थाने लाए थे। पुलिस के उत्पीड़न, दमन और मारपीट से भाई ने दम तोड़ दिया। आधी रात को मां और भाभी को पुलिस गांव छोड़ आई। भाई के मरने की सूचना पुलिस ने नहीं दी और शव को सीधे पोस्टमार्टम हाउस ले गई। सुबह सभी लोग पोस्टमार्टम हाउस आए। तब वहां शव बिना सील मोहर के पड़ा था। उन लोगों ने एक अंगोछा लेकर शव पर डाला। उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई न करने की भी धमकी दी।


प्रभारी कोतवाल ने भी हटा ली नेम प्लेट
सुबह जब भाजपा कार्यकर्ता पोस्टमार्टम हाउस पर इकट्ठा हुए तो शव के साथ आए चार सिपाहियों ने वर्दियों में लगी अपनी नेम प्लेट निकाल कर जेबों में रख ली। कुछ लोगों ने नेम प्लेट उतारते समय सिपाहियों पर छींटाकशी भी की। हास्यास्पद बात तो यह है कि जब भारी पुलिस फोर्स आने के बाद बीसलपुर प्रभारी कोतवाल राजेंद्र सिंह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो उनकी वर्दी से भी नेम प्लेट नदारद थी।

शव देखते ही फफक कर रो पड़ा वासुदेव
सौतेला भाई वासुदेव जब वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो उस वक्त लीलाधर का शव वाहन में रखा था। शव पर चोटों के निशान देखते ही वह फफक-फफककर रो पड़ा। उसने बताया कि वह सौतेला भाई है। वह तीन भाइयों सेवाराम, पातीराम में दूसरे नंबर पर थे। पिता की अर्सा पहले मौत हो चुकी है। उनके एक पुत्री चार वर्षीय नंदनी और इकलौता पुत्र डेढ़ वर्षीय चरन जीत सिंह है।

खाकी पर पहले भी लगें हैं खून के दाग
पीलीभीत। सूबे की पुलिस पर पहले भी खून के दाग लग चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी पुलिस अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रही है। नौ सालों में जिले की पुलिस पर महिला समेत पांच लोगों की हत्या के आरोप लग चुके हैं।
जिले में दो दशक पहले जहॉनाबाद थाने के पुलिस कर्मियों पर दिलशाद उर्फ बाबू की पिटाई से उसकी मौत होने का भी आरोप लगा था। इस मामले में एसओ मलिक यूनुस अली समेत 12 पुलिसकर्मियों को जेल जाना पड़ा था। अगस्त 2004 में कोतवाली बीसलपुर पुलिस की पिटाई से सिमरा अकबरगंज निवासी रामेश्वर दयाल की पत्नी धर्मवती की मौत हो चुकी है। इस घटना में दरोगा तेजवीर सिंह, सिपाही अमर सिंह और डोरी लाल को जेल जाना पड़ा था। वर्ष 2008 में सदर कोतवाली में मोहल्ला मदीना शाह निवासी अफजल की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। इसी वर्ष बिलसंडा थाने की करेली पुलिस चौकी के सिपाहियों ने अनुसूचित जाति के तोताराम की पुलिस चौकी में ही पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में तीन सिपाहियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 15 अगस्त 2010 को जिले की खाकी फिर दागदार हुई। थाना बरखेड़ा के गांव जारकल्लिया निवासी दलित रामपाल को करोड़ पुलिस चौकी के दरोगा और सिपाही ने बेरहमी से पीटा था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। पुलिस रामपाल को एक बालिका को भगाने के आरोप में पकड़कर चौकी लाई थी। आठ जुलाई की रात बीसलपुर कोतवाली पुलिस पर फिर खून के छींटे पड़ गए और शिवलिंग तोड़ने के आरोपी लीलाधर की पुलिस कस्टड़ी में मौत हो गई।

सैकड़ों वर्ष पुराना है हाफिज नगर का शिव मंदिर
बीसलपुर। हाफिजनगर का सैकड़ों वर्ष पुराना यह मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का केंद्र हैं। यहां सावन मास में भारी भीड़ रहती है। किवदंती है कि यहां शिवलिंग भूमि से प्रकट हुआ था। मंदिर के द्वार पर वर्ष 1457 की एक प्लेट लगी है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि शिवलिंग पर मंदिर की स्थापना वर्ष 1457 में हुई होगी। यह मंदिर किसने बनवाया था। यह रहस्य के गर्भ में है। गांव के बुजुर्ग भी इस बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं। गांव के बुजुर्ग 90 वर्षीय राजाराम मिश्रा ने बताया कि हमने भी शिवलिंग भूमि से प्रगट होने की बात अपने पुरखों से सुनी थी। मंदिर किसने बनवाया उन्हें नहीं पता। मंदिर के टूटे शिवलिंग को देखने वालों की भारी भीड़ रही। एसपी के आदेश पर दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मंदिर परिसर में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

शिवलिंग टूटने से आहत हैं मंदिर के पुजारी
बीसलपुर। शिव मंदिर का शिवलिंग तोड़े जाने से मंदिर के पुजारी पुजारी सुंदर दास काफी आहत हैं। वह बताते हैं कि दूसरे दिन भी मंदिर में पूजा अर्चना नहीं हो पाई, जिससे श्रद्धालु काफी निराश रहे। घटना से अनभिज्ञ कुछ श्रद्धालु मंगलवार को सुबह मंदिर में पूजा अर्चना करने गए। वहां पहुंचकर उन्हें घटना की जानकारी हुई। उसके बाद वे क्षुब्ध होकर वापस लौट गए।

एडीएम और एसपी ने किया मौका मुआयना

बीसलपुर। मंगलवार को एसपी एन कोलांची एडीएम आनंद कुमार के साथ गांव पहुंचे और शिव मंदिर में टूटे शिवलिंग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंदिर के पुजारी सुंदर दास, ग्रामीणों और मृतक के परिवार वालों से पूछताछ की। इस मौके पर एसडीएम रामप्रकाश, सीओ जीएस राठी, सीओ सिटी सुवेग सिंह सिद्धू, एसएसआई आरपी सिंह और जिले के कई थानों के प्रभारी भी मौजूद थे।

लीलाधर की मौत से घर में मचा कोहराम
बीसलपुर। पुलिस हिरासत में हुई लीलाधर की मौत के बाद उसके घर में कोहराम मच गया है। मृतक के पिता बाबूराम का 30 वर्ष पहले ही निधन हो चुका था। लीलाधर की वृद्ध मां रामलली, पत्नी भारती, चार वर्षीय पुत्री नंदिनी, भाई सेवाराम, पातीराम, वासुदेव, बहन करतला देवी, सुंदर देवी और बुधो देवी का रोते-रोते बुरा हाल हो रहा है। लीलाधर के इकलौते एक वर्षीय पुत्र चरनजीत को अपने पिता के दिवंगत होने का ज्ञान नहीं था।

मां बोली, पुलिस ने मार डाला मेरा लाल
बीसलपुर। लीलाधर की मौत की जानकारी सुबह जब सात बजे ग्राम प्रधान ने दी तो उसकी मां रामलली दहाड़े मारकर चीख पड़ी। वह सिर्फ यही कह रही थी कि पुलिस वालों ने मेरे लाल को मार डाला। एसपी-एडीएम को मृतक की मां रामलली और पत्नी भारती ने बताया कि लीलाधर को कोई भी बीमारी नहीं थी। जब पुलिस उसे पकड़कर ले गई थी, तो वह पुलिसकर्मियों के साथ जीप तक पैदल ही गया था। आरोप लगाया कि उसके बेटे ने करीब सात वर्ष पूर्व गांव की ही एक लड़की से अंतर्जातीय विवाह किया था। इसी वजह से गांव वाले उनके काफी नाराज थे और लीलाधर को हर समय नीचा दिखाने का षड़यंत्र रचते रहते थे। इसी षड़यंत्र के तहत जहरीला इंजेक्शन लगवाकर उसके बेटे की हत्या पुलिस से मिलकर कराई गई है।

फिंगर प्रिंट टीम ने लिए निशान
एसपी एन कोलांची के निर्देश पर जिला मुख्यालय से आई फिंगर प्रिंट टीम ने सोमवार को गांव हाफिजनगर पहुंचकर शिव मंदिर से और क्षतिग्रस्त शिवलिंग से हाथों और पैरों के निशान लिए। निशान लेने के बाद टीम जिला मुख्यालय लौट गई।

आठ वर्ष पूर्व भी हुई थी एक घटना
बीसलपुर। आठ वर्ष पूर्व गांव हाफिजनगर बन्हाई निवासी तोत्रपाल गंगवार ने मंदिर में जान बूझकर दीर्घ शंका कर दी थी। उसी दिन से उसके हाथ पैर सड़ने लगे थे। अपनी गलती का अहसास होते ही तोत्रपाल ने अगले दिन से मंदिर की नियमित धुलाई, सफाई और पूजा अर्चना करने लगा था। तीन माह के भीतर ही वह बिल्कुल ठीक हो गया था। हालांकि तोत्रपाल इस समय दुनिया में अब नहीं है।

कई घंटे रुकी रही पुलिस की जीडी
बीसलपुर। शिवलिंग तोड़े जाने की हुई घटना के बाद कोतवाली की जनरल डायरी (जीडी) कई घंटे तक रुकी रही थी। पुलिस के अनुसार मंदिर में शिवलिंग तोड़ने की घटना शाम छह बजे हुई। मंदिर के महात्मा सुंदर दास ने रात आठ बजे पुलिस को घटना की तहरीर दी थी। तहरीर मिलने के काफी देर बाद पुलिस मौके पर गई और लीलाधर को पकड़कर लाई। पुलिस हिरासत में लीलाधर की मौत हो गई, जिससे घबराकर पुलिस ने महात्मा की तहरीर पर लीलाधर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली। सूचना मिलने और लीलाधर की मौत होने के बीच कई घंटे का समय लगा। पुलिस इस बीच जीडी को रोके रही।

भाजपाइयों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
पीलीभीत। भाजपा कार्यकर्ताओं ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर लीलाधर हत्याकांड के निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस कार्यप्रणाली की निंदा की है। ज्ञापन देने वालों में दीपक अग्रवाल, दीपक पांडेय, बांकेलाल, सोनू वाल्मीकि, राहुल, अनिल राठौर, विनोद वाल्मीकि, रमेश गंगवार, देेवेंद्र सिंह टोनी, धर्मपाल वर्मा, विजय तिवारी, राजकुमार भारती, रामनाथ वर्मा, स्वामी प्रवक्तानंद शामिल हैं।

अपने ही सवालों के जवाब में उलझी पुलिस
कदम-कदम पर भी करती रही गल्तियां
पीलीभीत। हाफिजनगर बन्हाई निवासी लीलाधर कोरी की मौत के मामले में पुलिस भले ही अपने को पाक-साफ बता रही हो, लेकिन वह अपने ही सवालों के जवाब में पूरी तरह से उलझ गई है। कदम-कदम पर की गई गल्तियाें ने खाकी को शक के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
बीसलपुर कोतवाली के प्रभारी कोतवाल राजेंद्र सिंह का कहना है कि लीलाधार कोरी बीमार था। उसे दवाई दिलवाई गई थी। वह दवाई नहीं खा रहा था। तब उसकी मां रामलली और पत्नी भारती देवी को सरकारी जीप से कोतवाली बुलाया गया। उसके साथ किसी न कोई मारपीट नहीं की है। उसकी मौत बीमारी के चलते हुई है। यदि मान लिया जाए कि उसकी स्वभाविक मौत हुई है तो पुलिस ने बुलाने के बाद मां-पत्नी को उससे क्यों नहीं मिलवाया।
मृतक के भाई वासुदेव के मुताबिक मां-पत्नी को घर से लाने के बाद पुलिस ने जीप रेलवे लाइन के किनारे डेढ़ घंटे खड़ी रखी। आखिर पुलिस ने वाहन क्यों रोके रखा? पुलिस उसकी मौत के बाद शव को लेकर वाहन से इधर-उधर क्यों टहलती रही। अगर पुलिस पाक-साफ थी तो शव परिवार वालों को सूचना देती और शव का पंचनामा भरकर उसे सील कर पोस्टमार्टम को भेजती, लेकिन पुलिस ने ऐसा क्यों नहीं किया। ऐेसे तमाम सवाल उभर कर सामने आ रहे हैं, जिनका जवाब न तो प्रभारी कोतवाल के पास है और न ही पुलिस अधिकारी दे पा रहे हैं।

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