गाड़ियों की रफ्तार पर पड़ी कोहरे की मार

Pilibhit Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
पीलीभीत। अगर सर्दी में कहीं बाहर जाना है तो घर से पहले निकलें वरना गाड़ियों की कछुआ चाल से आप परेशान हो जाएंगे। कोहरे में सुरक्षित रेल संचालन के लिए इस बार पताका सिग्नल की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। पताका सिग्नल न होने से गाड़ियों की गति घटाकर अधिकतम 45 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
सर्दियों के घने कोहरे में ट्रेन का संचालन मुश्किल होता है। कोहरे में सिग्नल नजर न आने से लोको पायलटों को समस्या सबसे ज्यादा होती है। गाड़ियों के सुरक्षित संचालन के लिए हमेशा से पताका सिग्नल का इस्तेमाल होता आया है। पताका सिग्नल में स्टेशन से करीब 500 मीटर पहले ट्रेन आने पर पताका फट जाता है और पताके की आवाज से चालक गाड़ी की गति कम कर लेता है। इस तरह गाड़ी ज्यादा विलंब नहीं होती है, लेकिन इस बार पताका सिग्नल की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। वहीं लोको पायलटों को निर्देश हैं कि गाड़ियों को अधिकतम 45 किलोमीटर की गति से ज्यादा तेज न चलाएं। गाड़ियों की गति घटाए जाने से अब ट्रेन का विलंब से रहना निश्चित है।

रेलगाड़ियों के सुरक्षित संचालन के लिए सभी लोको पायलटों को कोहरे में 45 किलोमीटर की गति से गाड़ी चलाने के निर्देश मिले हैं। साथ ही सिग्नल नजर न आने पर अपने विवेक से गाड़ी आगे बढ़ाने के आदेश आए हैं।
बीएन मिश्रा, लोको इंचार्ज-पीलीभीत।

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