गन्ना विकास समिति के दो करोड़ फंसे

Pilibhit Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
पीलीभीत। गन्ना विकास समिति पीलीभीत के करीब दो करोड़ रुपये की धनराशि फंस गई है। इससे समिति की आर्थिक स्थिति बदतर है। हालांकि किसान कर्जा चुकाना चाहते हैं, लेकिन समिति के अधिकारी अपने कर्जदारों को ही पर्ची जारी नहीं करवा पा रही है। समिति सचिव की मानें तो सट्टों की संख्या काफी होने तथा पुराने कर्जदारों का रिकार्ड ढंग से मेनटेन न होने के कारण ऐसा हुआ है। इधर किसान पर्चियों के लिए समिति के चक्कर लगा रहे हैं।
बता दें गन्ना विकास समिति किसानों को उनके सट्टे के आधार पर लोन देती है। पिछले एक दशक में किसानों पर करीब दो करोड़ 16 लाख का बकाया है। बकाए की यह धनराशि हर साल बढ़ती जा रही है। इस बार समिति में हुई बैठक में सोसायटी अध्यक्ष विनोद गंगवार ने जिला गन्ना अधिकारी के समक्ष बकाएदार किसानों को प्राथमिकता के आधार पर पर्चियां जारी कराने को कहा था। उनका मकसद समिति के बकाए की वसूली करना था। बैठक में यह प्रस्ताव भी पास हुआ, लेकिन 16 नवंबर से लगातार जारी हो रहे इंडेट में आज तक एक भी बकाएदार को शामिल नहीं किया गया। गन्ने की पर्चियां ही जारी नहीं हुईं तो वसूली का मतलब भी नहीं। कुल मिलाकर समिति के दो करोड़ से अधिक की धनराशि किसानों में फंसी है, जिसकी चिंता न तो समिति सचिव को है और न ही जिला गन्ना विभाग ही इस ओर कोई ध्यान दे रहा है।

समिति अध्यक्ष गंभीर, गन्ना आयुक्त को भेज खत

गन्ना विकास समिति अध्यक्ष दो करोड़ से अधिक की बकाया धनराशि को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने गन्ना आयुक्त को भेजे गए पत्र में लिखा है कि समिति की करोड़ों की वसूली नहीं हो पा रही है। समिति अधिकारियों की हठधर्मिता से किसानों को पर्ची जारी न होने के कारण ऐसा हो रहा है, जिससे किसानों पर जहां ब्याज बढ़ रहा है, वहीं समिति की भी आर्थिक स्थिति सुधर नहीं पा रही है।

किसान बोले, पर्ची मिलती तो चुकता कर देता कर्ज

गांव रूपपुर कमालू निवासी हीरालाल यादव पर पांच हजार का कर्ज है। वह नवंबर से ही पर्ची के लिए समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें पर्ची नहीं मिल सकी। वह कहते हैं कि इससे उनका कर्ज बढ़ जाएगा तो वह चुकता भी नहीं कर पाएंगे। इसी तरह बंजरिया हड़ैला के किसान आनंद कुमार कहते हैं कि उनके पिता ने 11 हजार का कर्जा लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि गन्ना बिकेगा तो कर्ज चुकता हो जाएगा। गेहूं बुबाई के लिए खेत खाली करना था, लेकिन अभी तक पर्ची ही जारी नहीं हुई। इससे गेहूं बुबाई भी नहीं हो पाएगी। गांव महुआ के किसान परमेश्वरी दयाल और उनके भाइयों के सट्टे पर 15 हजार से ज्यादा बाकी है। वह भी पर्ची के लिए चक्कर लगा रहे हैं।

इस पेराई सत्र की सबसे पहले 16 नवंबर को डिमांड लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें लिस्ट गड़बड़ हो गई, जिससे बकाएदारों की पर्चियां जारी नहीं हो सकीं। उसके बाद लगातार प्रयास जारी हैं। नियमानुसार पुराने कर्जदारों को प्राथमिकता के आधार पर पर्चियां जारी होनी चाहिए, लेकिन स्टाफ के अभाव तथा कर्जदारों का रिकार्ड ढंग से मेनटेन न होने के कारण ऐसा हुआ। फिलहाल अब एक या दो दिन बाद उनकी पर्चियों जारी करना शुरू कर दी जाएंगी।
सुधीर कुमार वर्मा, सचिव, गन्ना विकास समिति-पीलीभीत।

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