विश्व विकलांग दिवस -- योजनाओं से लाभांवित होने को भटकते हैं

Pilibhit Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
जिले में हैं 45 हजार विकलांग


पीलीभीत। विकलांग कल्याण के नाम पर सरकार से पेंशन और विकलांग पुर्नवास केन्द्र से उपकरण वितरण की व्यवस्था है। अलबत्ता सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलाए जा रहे प्री-इंटीग्रेशन कैंप में बच्चे और निशक्त जन सेवा संस्थान के प्रयासों से विकलांगता के अभिशाप को चुनौती अवश्य मिल रही है। जिले में करीब 45 हजार विकलांग हैं लेकिन विकलांग कल्याण विभाग में 19385 का ही पंजीकरण है। इनमें से 16878 विकलांग पेंशन पा रहे हैं। 2507 आवेदन कतार में हैं। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी हरीश कुमार बताते हैं कि इस वर्ष विकलांग विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत 60 विकलांगों को लाभांवित किया गया। 42 के आवेदन पेंडिंग हैं।

12 अक्तूबर 2000 को यहां स्थापित देश के पहले विकलांग पुर्नावास केन्द्र पर विकलांगो को उपकरण वितरित किए जाते हैं। केन्द्र समन्वयक सुखवीर सिंह भदौरिया का मानना है कि समाज में विकलांगों को भी सम्मान से जीने का हक है। उनका कहना है कि केन्द्र समन्वयक के रूप में उनका हमेशा यही प्रयास रहता है कि विकलांगों को उनके अधिकार मिलें। इस वर्ष विकलांगों को नौ लाख रुपये के उपकरण वितरित किए गए। सांसद वरुण गांधी ने अपनी निधि से 12 लाख रुपये के उपकरण वितरित करने को डीआरडीए को पत्र लिखा है। जल्द ही यह धनराशि एल्मिको कानपुर को हस्तानांतरित करवाकर उपकरण वितरित करए जाएंगे। श्री भदौरिया भारतीय निशक्त जन सेवा संस्थान के माध्यम से भी विकलांगों की सेवा कर रहे हैं।

विकलांगता के खिलाफ जारी है जंग

विकलांगता के खिलाफ जंग छेड़ चुका नि:शक्त जन सेवा संस्थान पिछले वर्ष तक बरेली, लखीमपुर, दिल्ली व नोएडा में आयोजित शिविरों में जिले के 192 पोलियो से विकलांग बच्चों के आपरेशन की व्यवस्था कर कृत्रिम अंगों का प्रत्योरोपण करवा चुका है। अक्तूबर 2012 में सेंटर फार इंपावरमेंट इनिशियेटिव्स नोएडा के सहयोग से शहर में विकलांग शिविर लगवा कर 225 विकलांगों को पैरों पर खड़े होने योग्य बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। संस्थान के अध्यक्ष अमृतलाल का मानना है कि सच्ची खुशी खरीदी नहीं जा सकती। इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। विकलांग सेवा को जुनून मानने का ही नतीजा है कि उन्होंने इस वर्ष पीलीभीत से बाहर कदम रखते हुए जुलाई 2012 में न्यू क्लब नैनीताल और अक्तूबर में विधिक सेवा प्राधिकरण चंपावत के साथ उत्तराखंड में विकलांगता को चुनौती दी। सरकार पोलियो के अभिशाप को रोकने के लिए अरबों रुपए खर्च कर रही है लेकिन जो इस विकलांगता का शिकार हो चुके हैं उनके लिए कोई प्रयास न होना दुखद है।
विकलांगता को चुनौती दे रहे बच्चे

सामान्य की अपेक्षा मूक-बधिर दे रहे बेहतर परिणाम

सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलाए जा रहे प्री इंटीग्रेशन कैंप में 106 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां अध्ययनरत नेत्रहीन व मूक बधिर बच्चों को विभिन्न उकरणों के माध्यम प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केन्द्र समन्वयक राकेश पटेल बताते हैं कि जिले में नेत्रहीन और मूक बधिर 3681 बच्चे चिन्हित किए गए हैं। प्री इंटीग्रेशन कैंप के अलावा अन्य विद्यालयों में भी इन विकलांग बच्चों को शिक्षित करने के समेकित शिक्षा का प्रशिक्षण ले चुके शिक्षक प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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