पटाखों पर तुगलकी फरमान

Pilibhit Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। नेहरू पार्क से शहर में लगने वाली पटाखा मंडी को हटाकर रामलीला मैदान पर शिफ्ट कर दिया है। प्रशासन का यह फरमान शुक्रवार की रात नेहरू पार्क पहुंचा। दुकानें लग चुकी थीं। बेचारे कारोबारी अपनी बात रखते रहे, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई और अंतत: उन्हें दुकानें उखाड़कर रामलीला मैदान ले जानी पड़ी। कारोबारी यह कहते रहे कि प्रशासन ने पहले यहां दुकान लगाने की अनुमति क्यों दी थी।
मालूम हो कि कई वर्षों से नेहरू पार्क में पटाखा बाजार लगता है। इस बार भी एक सप्ताह पहले से पार्क की सफाई शुरू हो गई थी। आतिशबाजी कारोबारियों को यहां दुकानें लगाने की अनुमति भी मिल गई थी। शुक्रवार की शाम तक पूरा बाजार लग गया था, लेकिन देर रात न जाने क्या हुआ कि सिटी मजिस्ट्रेट डॉ एमएम खान और सीओ सिटी दिनेश शर्मा ने पहुंचकर कारोबारियों से दुकानें रामलीला मैदान ले जाने को कह दिया। लग चुके बाजार को हटाने की दिक्कतों से कारोबारियों ने अवगत कराया, लेकिन अधिकारियों ने दो टूक फरमान सुनाकर चले गए। बेचारे कारोबारी क्या करते पहले दिन भर दुकानें लगाई, फिर रात में ही सब कुछ समेट लिया और रामलीला मैदान पहुंच गए। इससे कारोबारियों में रोष देखा गया। इस बाबत सिटी मजिस्ट्रेट डॉ एमएम खान का कहना है कि पार्क में आतिशबाजी बाजार सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं था, क्योंकि बाजार में एक ही गेट है। दुर्घटना की स्थिति में बचाव संभव न होता, इसलिए एहतियातन यह निर्णय लिया गया।
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विशेष :
12 साल पहले हुए हादसे में गईं थी तीन जानें
वर्ष 2000 से 2001 तक हुए चार बार बड़े हादसे
संवेदनशील सूची में जिला शामिल
केवल चार कारोबारियों के पास है स्थायी लाइसेंस
शहरी क्षेत्र में डेढ़ सौ अस्थायी लाइसेंस हुए जारी
पीलीभीत। जब भी प्रदेश में कहीं पटाखों से बड़ा हादसा होता था तो शहर के आतिशबाज बारह साल पुराने अतीत में चले गए। तराई के इस जिले में वर्तमान में सिटी में चार दुकानदारों को अस्थायी रूप से लाइसेंस मिला है। चूड़ी वाली गली में स्थित चार दुकानों में शमशाद, हनीफ, शाकिर और पुत्तन आतिशबाज को लाइसेंस प्राप्त है। इसके अलावा जिले के अन्य स्थानों पर करीब चौबीस पटाखों की अस्थायी दुकानें है। यहां के आतिशबाज मुख्य रूप से शादी-ब्याहों में प्रयोग होने वाले रोशनी पटाखों को ही बनाते है, जबकि आवाज वाले पटाखे बरेली से यहां पर आते है। वर्ष 2000 में कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला मुनीर खां में एक मकान में अवैध रूप से बन रहे पटाखों में आग लग जाने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2001 में मुहल्ला शेर मोहम्मद में शमशाद आतिशबाज के घर पर रखी आतिशबाजी में आग लगने से दो लोग की मौत हो गई। इसके बाद लाल रोड पर पुत्तन आतिशबाज के घर से पटाखा माल को शिफ्ट करते समय हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
वर्ष 2001 में दीवाली से चार दिन पूर्व चूड़ी वाली गली में एक आतिशबाज की दुकान में आग लग गई। जिसमें किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी। उस समय से यह जिला संवेदनशील में शामिल हो गया।
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दुकान पर सिर्फ डमी रखने के आदेश
इन हादसों के बाद से जिला प्रशासन ने लाइसेंस विक्रेताओं को दुकान पर माल रखने से मना कर दिया है। यह सभी लोग दुकान पर केवल डमी रखते हैं। चार स्थायी पटाखा विक्रेताओं ने अपने गोदाम शहर के बाहर बनाए है।
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दीवाली पर लगेगी डेढ़ सौ दुकानें
दीवाली पर नेहरू पार्क में पिछले दो साल से करीब सवा सौ दुकानें चार दिन के अस्थायी लाइसेंस के रूप में लगती हैं। इससे पहले यह दुकानें गांधी स्टेडियम और रामायण बिहार में लगती थी, लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ी वैसे-वैसे यह जगह और अधिक संवदेन शील हो गई। ऐसे में इस बार रामलीला मैदान पर पटाखों की दुकानों को सजाया गया है।

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