दिमागी बुखार से दो बच्चों की मौत,18 लोग बीमार

Pilibhit Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST
बीसलपुर। बुधवार को बीसलपुर के गांव कटैया में फिर दो बच्चों की दिमागी बुखार से मौत हो गई। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि मौत तेज बुखार से हुई है। गांव में 18 से अधिक लोग बुखार की चपेट में हैं। उधर, मृत बच्चों के घरों में कोहराम मचा है।
गांव कटैया के प्रधान मेवाराम के अनुसार यहां चार दिन पूर्व दिमागी बुखार फैल गया था। उन्होंने सरकारी अस्पताल दियोरिया में लिखित सूचना दी, मगर डॉक्टर बेपरवाह रहे। नतीजतन बुखार ने गंभीर रूप धारण कर लिया। बुखार की चपेट में आए रामचंद्र भारती के पांच वर्षीय पुत्र सुधांशु की हालत मंगलवार को काफी ज्यादा बिगड़ गई। उसे पीलीभीत के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मंगलवार की शाम को उसकी मौत हो गई। इसी परिवार के श्रीपाल भारती की छह वर्षीय पुत्री अंजलि की हालत मंगलवार को काफी बिगड़ गई थी। उसे पीलीभीत ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। अंजलि गांव के ही प्राथमिक विद्यालय की छात्रा थी।
गांव में सुदेश, पूनम, राजकुमारी, इतवारी लाल, नंदलाल, राहिताश, आकाश, शुभम, प्रियांशु, मीना, सावित्री, बबली, रामजीत, वर्षा, ध्रुव, विकास, रवि, रामचंद्र, भजनलाल और विमलेश आदि लोग पीड़ित हैं। इनमें अधिकांश बच्चे हैं। बीमार लोगों का इलाज गांव के ही एक डॉक्टर के यहां चल रहा है। इधर दो बच्चों की मौत की खबर सुनते ही सरकारी अस्पताल से डॉक्टरों की टीम पहुंची और मरीजों के खून के नमूने लिए और दवाएं बांटी। भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने भी गांव पहुंचकर मृत बच्चों के परिजनों को ढांढस बंधाया और सीएमओ से सेलफोन पर वार्ता कर बुखार के प्रकोप को हर हाल में रोकने के लिए कहा।चार रिपोर्ट में तीन मिले डेंगू पॉजिटिव
पूर्व में पूरनपुर नगर के रजागंज निवासी सोलह वर्षीय सैफी बी, गणेशगंज के चौबीस वर्षीय राजू, पूरनपुर के सरकारी अस्पताल के एंबुलेंस चालक रानी पत्नी दीपक के ब्लड टेस्ट के नमूने के लेकर लखनऊ के केजीएमसी को भेजे थे। रीजनल लैब संचार रोग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की रिपोर्ट में जिले में तीन केस डेंगू के पॉजीटिव मिले है। इनमें सैफी बी, राजू, रानी को डेंगू होने की पुष्टि हो गई।
मौतें से पल्ला झाड़ रहा महकमा
डेंगू और दिमागी बुखार नहीं मान रहे डॉक्टर
दो माह में चार दर्जन से अधिक हो चुकी मौतें
सिटी रिपोर्टर
पीलीभीत। जिले में लगातार बुखार से पीड़ित बच्चों, युवाओं और बूढ़ों की मौत हो रही है। लोग इसे डेंगू और दिमागी बुखार मान रहे हैं, किंतु स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर रटीरटाई एक ही बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि तेज बुखार आता है और सही इलाज के अभाव में मौतें हो रहीं हैं। गौर करने वाली बात है कि जिले में बुखार की महामारी जैसी स्थिति है और स्वास्थ्य विभाग असहाय नजर आ रहा है।
सरकार करोड़ों रुपये खर्च करके चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है। लेकिन धरातल पर चिकित्सा व्यवस्थाएं ठप पड़ी है। जिले में छह सीएचसी, 21 न्यू पीएचसी, दो ब्लाक लेबिल पीएचसी, 199 सब सेंटर, करीब एक हजार स्वास्थ्य कर्मियों का स्टाफ है। डेंगू की लक्षण की आशंका में उसकी ब्लड नमूना टेस्टिंग के लिए लखनऊ भेजा है। ऐसे में डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं है। यहां तो न डेंगू टेस्ट की सुविधा है और न ही प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए ब्लड सेपरेटर की व्यवस्था। डेंगू और दिमागी बुखार के डंक से निपटने के दावे हवाई है। पिछले दस दिनों में एक दर्जन लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। जहानाबाद के मुख्य बाजार निवासी सुरेश कुमार की दो वर्षीय पुत्री उन्नति की बुखार से मौत। बरखेड़ा के गांव पिपरिया मंडन में छह बच्चोें की मौत, डढ़िया भगत में तीन साल की बच्ची की मौत, 23 अक्तूबर को शहर के डाक अभिकर्ता की बरेली में बुखार से मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमे चुप्पी साध रहा है।

न कोई सुविधा और न कोई इंतजाम
प्लेटलेट्स कम होने पर ब्लड सेपरेटर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी से लेकर प्राइवेट में ब्लड चढ़ाया जाता है। यदि ब्लड में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाती है तो उसकी पूर्ति करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास केवल मरीज को लखनऊ, दिल्ली, आगरा, बरेली के लिए रैफर कर दिया जाता है।
डेंगू के लक्षण :
तीसरे दिन कंपकंपी के साथ तेज बुखार आना
एक- दो दिन के अंतराल में बुखार आना
बुखार का बार-बार उतरना चढ़ना
उल्टी और सिरदर्द की शिकायत
लीवर में घाव होना
डेंगू से बचाव :
प्लेटलेट्स पुष्टि पर नियमित दवा लें
पानी के बर्तन ढककर रखें
जमा पानी में मिट्टी का तेल अवश्य डालें
मच्छर दानी का इस्तेमाल बेहद जरूरी
मॉसकीटो ट्यूब, नेट का इस्तेमाल करें

क्या कहते अधिकारी
जिन मरीजों में डेंगू या दिमागी बुखार के लक्षण दिखते है। उनका सैंपल भेज दिया जाता है। प्राइवेट डॉक्टर अगर किसी मरीज को डेंगू का घोषित करते है तो पहले वह विभाग को सूचना देंगे। जिले में कोई महामारी नहीं फैली है। मौसमी बुखार है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं का भरपूर स्टॉक है। सूचना पर तुरंत टीम भेजी जाती है।
डॉ. राकेश तिवारी, सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग को झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां बुखार के केस लगातार आ रहे है। वहां टीम को भेजने के आदेश दिए गए है। ग्राम स्वच्छता समिति गांव में छिड़काव कराएं। अगर कई पर लापरवाही बरती गई तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
अमित गुप्ता, डीएम
तेज बुखार से बच्चों की मौत: चतुर्वेदी
बीसलपुर। सरकारी अस्पताल बिलसंडा के अधीक्षक डॉ. सीएम चतुर्वेदी ने बताया कि गांव कटैया के दोनोें बच्चों की मौत तेज बुखार से हुई है। उन्होंने बच्चों के दिमागी बुखार से मरने की पुष्टि नहीं की है।

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