जिला पंचायत सदस्य दोबारा चुनेंगे अध्यक्ष

Pilibhit Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से जिले की पंचायतों में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। जिले के इतिहास में यह पहला मौका है जब जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अध्यक्ष चुनने के लिए एक ही कार्यकाल में दोबारा मौका मिलेगा। यूं तो अभी चुनाव की तारीखें घोषित नहीं हुई हैं, फिर भी खरीद फरोख्त शुरू हो गई है। जिले के सांसद, मंत्री और विधायकों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
प्रदेश में सरकार बदलते ही जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों में अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का दौर शुरू हुआ। सबसे पहले शिकार हुईं जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता वर्मा। उनके पति बुद्ध सेन वर्मा भी जिला पंचायत सदस्य हैं। अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 29 सदस्यों में से आधा दर्जन सदस्य अनीता वर्मा के रिश्तेदार हैं। अविश्वास प्रस्ताव की आंधी में पूरनपुर क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष गीता भारती, अमरिया ब्लाक प्रमुख सुखमीत कौर, बिलसंडा ब्लाक प्रमुख राकेश प्रताप सिंह की कुर्सी चली गई। बीसलपुर ब्लाक प्रमुख शशी मिश्रा ने मतदान की तारीख से पहले ही इस्तीफा देकर कुर्सी छोड़ दी। सात ब्लाकों में बरखेड़ा ब्लाक प्रमुख ज्ञान प्रकाश गंगवार और ललौरीखेड़ा ब्लाक प्रमुख सुमन गंगवार ही अविश्वास प्रस्ताव में जीत हासिल कर कुर्सी बचा पाईं।
शहर से विधायक और प्रदेश के खादी ग्रामोद्योग राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद की निगाह जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कई सालों से है। अविश्वास प्रस्ताव के बाद शासन ने जो तीन सदस्यीय समिति बनाई है। उसमें उनकी बेटी रुकैय्याबी, गायत्री गंगवार और किरन सोनकर हैं। हालांकि पूरनपुर और अमरिया ब्लाक प्रमुखों के अगले चुनाव होने पर परिणाम उच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका के अधीन रखे गए हैं। इसके बावजूद जिला पंचायत और खाली हुए ब्लाकों में ब्लाक प्रमुखों की कुर्सी पर निगाह लगाए नेताओं ने अभी से चुनाव प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। जिले के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अध्यक्ष के चयन के लिए दोबारा मतदान का मौका मिलेगा। पंचायत चुनावों के जानकारों का कहना है कि इन सदस्यों की पूछ केवल अध्यक्षों के चुनाव में ही होती है, इन्हें अलग से कोई अधिकार नहीं होते हैं, इसलिए अध्यक्ष बनने के बाद सदस्य को कोई तवज्जो नहीं दी जाती है। यह दीगर है कि अभी शासन ने चुनावों की विधिवत तारीखें घोषित नहीं की हैं, लेकिन फिर भी अध्यक्ष बनने की जोड़तोड़ में लगे नेताओं ने सदस्यों की खरीद फरोख्त शुरू कर दी है। दावतों का दौर शुरू हो गया है। इन चुनावों में सांसद और जिले के विधायकों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
बसपा की बैठक बुलाते ही सरगर्मी बढ़ी
जिला पंचायत सदस्य नरैनो देवी के पुत्र और बसपा नेता संजय गंगवार ने 25 अक्तूबर को शहर के होटल में जिला पंचायत सदस्यों की बैठक बुलाई है। इसमें अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सपा के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रत्याशी तय किया जाएगा। बसपा नेता के बैठक बुलाते हुए जिला पंचायत को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। बैठक में पूर्व मंत्री अनीश अहमद खां को भी बुलाया गया है।

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