खिलने दो खुशबू पहचानो, कलियों को मुस्कानें दो

Pilibhit Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। आज नौमी है। नवरात्र के व्रत रखने वालों को कन्याओं को भोज कराना है। कन्याओं की संख्या पूरी करने को लोगों ने एक दिन पहले ही दिमाग दौड़ाना शुरू कर दिया। दरअसल कोख में कन्याओं के कत्ल ने हालात ही ऐसे पैदा कर दिए हैं। बेटों की चाह में बेटियाें को खत्म करने का चलन बढ़ा है। सरकारी आंकड़े खुद इसके गवाह हैं।
नौ दिन तक देवियों की पूजा और व्रत के बाद कन्या भोज भारतीय संस्कृति का अनूठी परंपरा है। कन्याओं के महत्व को रेखांकित करने का यह बेहतर जरिया है। दुखद यह है कि देवी स्वरूप कन्याओं को गर्भ में मार डालने का दुस्साहस ही आज लोगों को कन्याएं तलाशने को विवश कर रहा है। आवास विकास की निशी सिंह, बाग गुलशेर खां की दीपिका शर्मा की माने तो कन्याएं तलाशने के लिए दिमाग पर बोझ डालना पड़ रहा है। इरअसल सरकारी प्रयासों से कन्या भ्रूण हत्या रुक नहीं रही। रुके भी कैसे, कमाऊ बेटा पाने की चाहत इस दुस्साहस का प्रेरणा स्त्रोत जो है। मददगार के रूप में अल्ट्रा सोनोलॉजिस्ट धन के लालच में परीक्षण रिपोर्ट का खुलासा कर देते हैं। अल्ट्रासाउंड केन्द्रों पर ‘लिंग परीक्षण संबंधी जांच निषेध है’ के बोर्ड महज दिखावा भर हैं। गर्भवती का एबार्शन करने वाले डॉक्टर भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। पिछले दिनों एक चैनल पर आमिर खान के कार्यक्रम सत्यमेव जयते में कन्या भ्रूण हत्या के प्रति लोगों को जागरूक करने की कोशिश हुई। कार्यक्रम को काफी सराहना भी मिली लेकिन फिर भी लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि बेटियों की कोख में हत्या ही बेटों के लिए मुसीबत का रूप लेने जा रही है। लिंगानुपात इसकी गवाही देने को काफी है। इस पर नियंत्रण के लिए किसी शायर की यह पंक्तियां कितनी मौजू हैं। खिलने दो खुशबू पहचानो, कलियों को मुस्कानें दो।
आंकड़ों पर एक नजर
एक अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2010 तक जिले में कुल 36618 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें से 19114 बालक और 17504 बालिकाएं थीं। एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2011 तक 40976 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 21554 बालक और 19422 बालिकाएं थीं, जबकि एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2012 तक 42353 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 22295 बालक और 20058 बालिकाएं थीं। हर वर्ष बालिकाओं की संख्या कम रही।
प्रेरणा स्त्रोत बन सकते हैं ऐसे दंपति
लिंगानुपात को नियंत्रित रखना वास्तव में चुनौती बन गया है। कन्या भ्रूण हत्या करने वालों को सोचना होगा बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। ऐसे दंपति को प्रेरणा स्त्रोत स्वीकार करना होगा जो अपनी बेटियों को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सीए, आईएएस और आईपीएस जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए तैयार कर रहे हैं। ऐसे लोगों को आदर्श मानने की जरूरत है।

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