रिटायर बसें दौैड़ रहीं हैं सड़कों पर

Pilibhit Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में परिवहन निगम भी यात्रियों को बेहतर सेवा देने के लिए प्रयासरत है, मगर पीलीभीत डिपो की हालत ज्यादा ठीक नहीं है। यहां डिपो की करीब दस बसें ऐसी हैं जो मानकों से दो से तीन लाख किलोमीटर अधिक चल चुकी है। जिनकी अवधि पूरी होने के करीब है। इनकी दशा दयनीय है जो कि जिला मुख्यालय से रवाना होने के बाद गंतव्य तक पहुंचने तक कई बार रास्ते में अचानक खराब हो जाती। यात्रियों को धक्का लगाना पड़ता है।
खटारा बसों में सीटें भी ऐसी हैं जिन पर बैठने के बाद यात्रियों के कपड़े भी सुरक्षित नहीं रहते हैं। इन बसों में कई शीशे भी गायब रहते हैं। यात्रियों के लिए बस स्टैंड पर भी सुविधाओं का अभाव है। पीने के पानी के लिए दो हैंड पंप लगे हैं और दो टोटियां। डिपो के बेडे़ में 66 बसें हैं। रोडवेज बसों में 35 से 37 बसें दिल्ली को संचालित की जातीं हैं। जबकि टनकपुर के लिए 21, कानपुर तीन, अलीगढ़ एक और बिजनौर के लिए दो बसों का संचालन किया जा रहा है। बाकी अन्य बसें जिले से अन्य स्थानों को रवाना होतीं हैं। जो खटारा बसें हैं। वह आठ लाख किमी. से अधिक तक चल चुकीं हैं। उन्हें बदलने के लिए निगम को लिखा गया है। दस गाड़ियां नीलामी की कगार पर है। छह वर्ष की अवधि पूरे होते ही वे नीलाम करा दी जाएगी। उनके स्थान पर दस बसें निगम को जल्द मिलने की उम्मीद है।
इन मार्गों पर बसों चलाने की योजना :
पूरनपुर - दियोरिया- दिल्ली
माधोटांडा- डिब्बाइया- दिल्ली
पूरनपुर- बिलसंडा- दिल्ली
पूरनपुर- सीतापुर- लखनऊ
बीसलपुर- शाहजहांपुर- लखनऊ
यात्रियों की कहानी उन्हीं की जुबानी
शहर के मुहल्ला सुनगढ़ी निवासी अभिषेक कुमार ने बताया कि अक्सर बैंक के कार्य से क्षेत्र में जाना पड़ता है। बसों की हालत काफी खराब है। बीसलपुर और पूरनपुर क्षेत्र में जाने के लिए मैजिक का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
अधिवक्ता गोपाल शुक्ला ने बताया कि बसों की स्थिति के काफी हद तक यहां की सड़कें की जिम्मेदार है। आसाम चौराहे से नए पुल तक जाने में ऐसा लगता है कि बस कब पलट जाएं।
गंगा ज्वैलर्स के निमित अग्रवाल ने कहा कि बीते दिवस डिपो की गाड़ी से बरेली गए थे। साइड सीटें पर कीले निकली होने के कारण उनकी कमीज फट गई। ऐसा पहली बार नहीं कई बार हो चुका है। यह कंडम बसें कब यहां से हटेंगी।
सरकारी ठेकेदार नवजोत सक्सेना ने बताया कि लखनऊ के जाने के लिए यहां के लोगों को नैनीताल एक्सप्रेस का सहारा है। रोडवेज से शाहजहांपुर के लिए कोई कनेक्ट नहीं है। यहां की बसों से सफर करने का मतलब सिर में दर्द बढ़ाना है।
बॉक्स :
शासन की मंशा के अनुरूप जिला मुख्यालय से जिले की सभी तहसील को मुख्यालयों को जोड़ दिया गया है। यात्रियों द्वारा जो शिकायतें की जातीं हैं उन्हें दूर किया जाता है। निगम से दस नई बसें जल्द मिलने की उम्मीद है। कंडम बसाें की नीलामी विभागीय आदेशानुसार होगी।
एसके वर्मा
एआरएम

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