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ड्रेस वितरण में सरकारी आदेश दरकिनार

Pilibhit Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। जिले में ड्रेस खरीद में भारी अनियमितताएं बरती जा रही है। करोड़ों रुपये के ड्रेस कोड वितरण मामले में विभागीय अधिकारी आंखें मूंदे बैठे है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को रेडीमेड ड्रेस की जगह दर्जी द्वारा सिली हुई ड्रेसों का वितरण कराना था, मगर विभाग ने इस आदेशों को दरकिनार कर दिया। बच्चों को घटिया क्वालिटी की ड्रेसों का वितरण बहुत तेजी से हो रहा है।
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जिले में बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिक, अशासकीय, सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब परिवार के बच्चों को साल में दो ड्रेस दिए जाने का प्रावधान था। इसमें अनुसूचित जाति के बालकों को भी शामिल किया गया था। जबकि बालिका वर्ग में सभी को ड्रेस दिए जाने का आदेश था। इसमें एक जोड़ी ड्रेस की कीमत करीब दो सौ रुपये थी। जिले में ड्रेस के लिए शासन से करीब छह करोड़ से अधिक रुपये का बजट का आया था। जिसे विभाग ने विद्यालय प्रबंधन समिति और हेड मास्टर के खाते में डाल दिया था। शासन से आदेश थे कि इस बार बच्चों को दर्जी से सिलवाकर ड्रेस बांटी जानी चाहिए। इससे गुणवत्ता भी सुधरेगी और बच्चे के कपड़े भी फिट आएंगे। इस आदेश के अनुसार डीएम की ओर से यूनीफार्म सिलने वाली दर्जी का नाम भी बताए जाने की व्यवस्था दी गई है। इसकी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई, अलबत्ता इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा। तमाम स्कूलों में ठेकेदार रेडीमेड यूनीफार्म ही बांट रहे है। सूत्रों केमुताबिक जिले के किसी भी एबीएसए ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।

ड्रेस वितरण में क्वालिटी का विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए थे। क्वालिटी में अगर शिकायतें आती है तो इसके लिए संबंधित एबीएसए के क्षेत्र में क्रास चेकिंग कराई जाएगी।
- मनोज कुमार, बीएसए

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