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तीन साल से बिस्तर पर हैं सूर्यप्रकाश

Pilibhit Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। पिछले करीब साढ़े तीन साल से एक व्यक्ति इलाज के लिए तरस रहा है। खुद की माली हालत कमजोर है और कोई सरकारी या गैर संस्था भी सहारा देने के लिए आगे नहीं आई है। कई बार इलाज के लिए सरकारी दफ्तरों, निजी संस्थाओं का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हर तरफ से निराशा ही हाथ लगी।
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शहर में मंडी समिति के समीप रहने वाले तीस वर्षीय सूर्यप्रकाश हंसी-खुशी अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजशन (डब्ल्यूएचओ) के तहत नोएडा में सूर्यप्रकाश मॉनीटर के पद पर कार्यरत थे। दस जनवरी 2009 की उस मनहूस घड़ी को वह कभी नहीं भूल पाते जब कार्यालय से घर जाते वक्त किसी वाहन ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। सूर्यप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए। कोमा से बारह दिन बाद बाहर निकलने पर सूर्यप्रकाश ने अपने को बिस्तर पर पाया। पिता प्रेमनारायण ने अपनी हैसियत के अनुसार काफी इलाज कराया, मगर धीरे-धीरे धनाभाव आड़े आने लगा। चिकित्सक ने परिजनों को बताया कि सूर्यप्रकाश की रीढ़ की हड्डी टूट गई है। सर्जरी करने में तीन से चार लाख रुपये का खर्चा आएगा।

सूर्यप्रकाश पूरी तरह पिता प्रेमनारायण और पत्नी शिवानी पर निर्भर हैं। सारी दैनिक क्रियाओं के लिए उन्हीं का सहारा लेना पड़ता है। सूर्यप्रकाश के चार वर्षीय पुत्र मानस ने जब से होश संभाला है तब से अपने पिता को बिस्तर पर ही देखा है। पूरा परिवार उन्हें चलता-फिरता देखना चाहता है, लेकिन मुफलिसी के चलते उन्हें उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आती। लेकिन बिस्तर पर पड़े सूर्यप्रकाश को अब भी ये आस है कि कोई न कोई सामाजिक संस्था उन्हें इस घनघोर नैराश्य से बाहर निकालने के लिए आगे आएगी। उनका इलाज हो सकेगा और वह बिस्तर से उठ कर सामान्य जीवन जी सकेंगे।

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