आशाओं की पहचान होगी आसान

Pilibhit Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। आशाओं को आधुनिक भूमिका में लाने के लिए सरकार ने एक नई कवायद शुरू की है। ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर सर्वे के लिए उन्हें परिचय पत्र के अलावा एक लेडीज छाता दिया जाएगा। इसका लाभ जिले की 1310 आशाओं को मिलेगा। एनआरएचएम के मिशन निदेशक ने इसका फरमान मुख्यालय को पहुंचा दिया है। टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए विभागीय अधिकारियों ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
शासन का मानना है कि आशाओं को टीकाकरण, परिवार नियोजन कार्यक्रम, पल्स पोलियो, जननी सुरक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर जाना पड़ता है। कई बार इन्हें अपना नाम पता बताने के लिए ग्रामीणों के सामने काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं तेज धूप में डोर टू डोर सर्वे करना पड़ता है। इन सभी समस्याओं से निजात के लिए उन्हें विभाग से आई कार्ड और एक छाता मुहैया कराया जाएगा। छाते की खरीद बाजार से न होकर शासन द्वारा दिए गए मानकों पर निर्धारित की गई है। इसमें छाते का कपड़ा सफेद रंग का और उस पर एनआरएचएम का साइन बना होगा, जिससे उसे बाजार में न बेचा जा सके। क्वालिटी के गिरावट पर उसकी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की होगी। जिले के सात ब्लाक में करीब 1310 आशाएं कार्यरत है। इसमें पूरनपुर में सर्वाधिक 312 आशाएं हैं। सामान के सरकारी रेटों को शासन ने निर्धारित कर दिया है। सीएमओ को टेंडर प्रक्रिया का जिम्मा सौंपा गया है। इसका खर्चा एनआरएचएम मद से दिया जाएगा।
शासन का आदेश प्राप्त हो चुका है। आशाओं को आधुनिक बनाने की कवायद की जा रही है। परिचय पत्र और छतरी के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द प्रारंभ करा दी जाएगी। डिमांड के अनुसार डाटा तैयार किया जा रहा है।
- डॉ राकेश तिवारी, सीएमओ।

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