यहां तो अंधेरे में देखे जाते मरीज

Pilibhit Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। जिला अस्पताल में इलाज को आए मरीजों और तीमारदारों का हाल-बेहाल है। दिन में 11 से तीन बजे तक की कटौती में यहां पर जनरेटर न चलने से चिकित्सक समेत मरीजों का हाल-बेहाल हो जाता है। पूर्व में डीएम अमित गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान जनरेटर चलाने के तो आदेश दे दिए, लेकिन बजट के अभाव में अस्पताल प्रशासन के दावे कागजी साबित हुए।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन नए व पुराने मरीजों की संख्या एक हजार के करीब रहती है। इसमें करीब सौ से डेढ़ सौ रोगी विभिन्न वार्डों में भर्ती भी रहते है। अस्पताल में बिजली न होने पर जनरेटर चलाने के आदेश है, जिसके लिए अस्पताल में 62.5 केवीए, 63 केवीए, 10 केवीए समेत दो जनरेटर 2.5 केवीए है। बड़े जनरेटर से ही अस्पताल बिल्डिंग को सप्लाई दी जाती है। इसके लिए 63 केवीए जनरेटर औसतन एक घंटे में 13 लीटर डीजल खाता है। प्रतिमाह जनरेटर के लिए लगभग 90 हजार के धन का खर्चे होता है, लेकिन पिछले चार माह से बजट के अभाव में जनरेटर चलना बंद हो गया है। ऐसे में ओपीडी में सैकड़ों मरीजों को देखने के लिए चिकित्सकों और स्टाफ का दम निकल जाता है।
रोगी कल्याण समिति से ही हर माह करीब 25 से तीस हजार रुपये का भुगतान हो जाता है। डीजल और मेटीनेंस का करीब सात लाख रुपये बकाया है। हर माह जनरेटर के लिए एक लाख रुपये मिले तो काफी हद तक परेशानियां दूर हो सकती है। फिलहाल अन्य योजनाओं से इसकी पूर्ति की जा रही है।
डॉ केके शर्मा, कार्यवाहक सीएमएस।

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