एक रैंचो चाहिए यहां के बाशिंदों को

Pilibhit Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। एक फिल्म आई थी थ्री ईडीयट्स फिल्म का नायक रैंचो हर किसी से कहता था है, ऑल इज वेल। लोगों को इस फिल्म से जिंदगी जीने की प्रेरणा मिली थी, लेकिन अपने जिले में ऐसा नही है। यहां हर दिन आत्महत्या और उसके प्रयास करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ऐसे में यहां जरूरत है एक रैंचो की, जो उलझन और डिप्रेशन में फंसे नौजवानों को जिंदगी की राह दिखा सके।
जिला अस्पताल के आंकड़ाें पर गौर करें तो ऐसा कोई दिन नहीं, जब जहर खाकर अथवा आग लगाकर आत्महत्या का प्रयास न होता हो। हर दिन चार से छह मरीज आत्महत्या के प्रयास के भर्ती होते हैं। दूसरे तीसरे मौतें भी हो जाती हैं। आत्महत्या का प्रयास करने वालों की उम्र 20 से 45 वर्ष के बीच होती है। कहने का तात्पर्य है कि ज्यादातर युवा ही मौत को गले लगाने का प्रयास करते हैं। इस बाबत कुछ अनुभवी और मनोविज्ञान की जानकारी रखने वालों से भी बात की गई तो यही निकलकर आया कि कुंठा और निराशा के कारण यह घटनाएं बढ़ीं हैं, जिन पर महत्वाकांक्षा की निश्चित सीमा होने, आपस में मेल-मिलाप रहने, ईर्ष्या भावना से दूर रहने तथा लोभ में न फंसने से यह घटनाएं कम हो सकती हैं।
निराश लगा रहे मौत को गले
रामा इंटर कॉलेज के विज्ञान शिक्षक लक्ष्मीकांत शर्मा का कहना है लोगों में छद्म आत्मतत्व विकसित होने, सीमाओं का ज्ञान न होने, प्रतिस्पर्धा और एकल परिवार के चलते निराशाजनक भाव के कारण मौत को गले लगाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। आत्महत्या से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, इसलिए दृढ़ इच्छाशक्ति और विवेक पूर्वक कठिनाइयों का सामना करना चाहिए।
आत्महत्या को समाज दोषी
शारदा अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ राजीव अग्रवाल का मानना है कि बढ़ती आत्महत्याओं के लिए परिवार और समाज मुख्य रूप से दोषी है। बताते हैं, चाहें पढ़ाई हो या फिर अपने पैरों पर खड़े कराने की बात हो, बच्चों पर दबाव परिवार और समाज ही बनाता है। आत्महत्याओं के लिए मीडिया एक्सपोजर भी काफी जिम्मेदार हैं। डिप्रेशन के कारण ही लोगबाग आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं।
परिवार में रखे अपनी समस्या
साहित्यकार देवदत्त प्रसून के अनुसार, मौत को गले लगाना ही समस्याओं से बचने का मात्र विकल्प नहीं है। उन्होंने डिप्रेशन की स्थिति में निदान बताते हुए कहा है, ऐसे लोगों को चाहिए कि वह अपनी समस्या परिवार अथवा सच्चे साथी के समक्ष अवश्य रखें। समस्याओं को लेकर घुटें नहीं, उनका निदान तलाशें।

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