दूसरे दिन भी जीआरपी के हाथ खाली

Pilibhit Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत/पूरनपुर। पीलीभीत-मैलानी पैसेंजर में गोला के एक यात्री की गोली मारकर हत्या मामले में पुलिस के हाथ दूसरे दिन भी खाली रहे। हालांकि पुलिस ने ताबड़तोड़ छापे मारकर करीब दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया गया है। इधर रेलवे के सीओ लखनऊ से यहां पहुंचे और तीन टीमों का गठन कर खुद भी छापे मारे।
मालूम हो कि 27 सितंबर की शाम पूरनपुर और दूधियाखुर्द स्टेशन के बीच स्थित उदयकरनपुर हाल्ट पर खीरी के थाना गोला अंतर्गत गांव टिहुलिया निवासी अमीन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दूसरे दिन थाना जीआरपी पीलीभीत में मृतक के छोटे भाई कलामुद्दीन की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई। इधर सीओ रेलवे आरडी यादव लखनऊ से यहां पहुंचे और मौका मुआयना कर संदिग्धों के यहां खुद भी छापे मारे। देर शाम तक पुलिस के हाथ सफलता नहीं लगी है।
खुलासे को तीन टीमें गठित
घटना के खुलासे को पहली टीम का नेतृत्व सीओ द्वितीय आरडी यादव खुद कर रहे हैं, जबकि दूसरी टीम में उन्होंने थाना जीआरपी एसओ सुखवीर सिंह भदौरिया तथा तीसरी में चौकी इंचार्ज पूरनपुर को लगाया है
सीओ बोले-जल्द होगा खुलासा
पूरनपुर। सीओ जीआरपी आरडी यादव ने घटना के समय आसपास के लोगों से पूछताछ की। उनका कहना है कि जल्द मामले का खुलासा होगा। मृतक के परिजन किसी से रंजिश होने से इनकार कर रहे हैं।
जीआरपी स्कॉट होता तो न होती घटना
पूरनपुर। पूरनपुर-मैलानी के बीच ट्रेनों में डकैती-लूट, हत्या और कई बार लूट के प्रयास पर ट्रेनों में जीआरपी स्कॉट शुरू किया गया था। अगर रात भी ट्रेन में जीआरपी स्कॉट होता तब हत्या की घटना को बचाया जा सकता था। लखनऊ से चलकर बरेली जाने वाली पैसेंजर ट्रेन मेें 25 मई 2003 को कुर्रैया रेलवे स्टेशन पर बरेली के पापड़ और दवा व्यापारी गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तबूर 2003 में मोहल्ला रजागंज के एक युवक की सेहरामऊ स्टेशन के समीप रंजिशन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। करीब दो साल पूर्व पूरनपुर-दुधिया खुर्द के बीच कई बार लूटपाट का बदमाशों ने प्रयास किया। शाम की ट्रेन में जीआरपी स्कॉट को लेकर सीओ जीआरपी आरडी यादव ने बताया कि यह ट्रेन दिन में चलती है, इसलिए स्कॉट नहीं चलता। अब इस ट्रेन में स्कॉट ड्यूटी के लिए सिपाहियों की मांग की जाएगी।
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मौत की खबर सुनते ही छलके पूरे गांव के आंसू
ग्राम टिहूलिया के अमीन की मौत की खबर जैसे ही पहुंची पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। आंखें आंसुओं से भर गयी। गुरुवार की रात गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। अमीन की नेक दिली और हमदर्दी का कायल पूरा गांव था। गांव के सुनील कुमार की आंखों से गिरते आंसू रुक नहीं रहे हैं। सुनील रोते हुए बताते हैं कि गरीबी के चलते वह अपनी पत्नी सुनीता देवी की दवा नहीं ला पा रहे थे। तब अमीन चाचा ने हमसे कहा चलो मैं तुम्हें पीलीभीत से दवा दिला लाता हूं। हम लोगों को वे अपने साथ ले गए दवा दिलवाई, लेकिन वापस आते समय.....। इतना बोलकर सुनील की आवाज लड़खड़ाने लगती है। गांव में हमेशा लोगों की मदद करने वाले अमीन की मौत पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है।
अम्मी अब्बा कहां हैं......
कामिल, हामिद, ताहिल, तालिब और अफसाना का रो-रो कर बुरा हाल है। अमीन के छह बच्चे हैं, जिसमें बड़ी लड़की की शादी हो चुकी है। अब परिवार में सबसे बड़ी अफसाना (15) है। बच्चे अपने अब्बा के बारे में पूछकर रोते दिखे। बच्चों को रोते देख हर किसी की आंखें नम हो जा रही थीं। अमीन की मौत के बाद परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं है।

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