मार्च तक निरीक्षण नहीं तो रुकेगी ग्रांट

Pilibhit Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। नैक निरीक्षण को लेकर शहर के दोनों महाविद्यालयों ने भले ही अपनी कमर कस ली हो, लेकिन इनके संसाधनों को देखकर यह मानकों में कोसों दूर हैं। मार्च 2012 तक नैक निरीक्षण नहीं हुआ तो महाविद्यालयों को यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट रोक दी जाएगी।
हायर एजूकेशन को अपग्रेड करने के साथ स्थलीय सत्यापन के शासन ने निर्देश कर दिए थे। यूजीसी (अंडर ग्रांट कमीशन) के जरिए देश भर के कॉलेजों में मार्च 2012 तक नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल) का दौरा करके सर्टिफिकेट दिया जाना प्रस्तावित है। महाविद्यालय में ऑन लाइन एजूकेशन समेत लेटेस्ट लाइब्रेरी, हॉस्टल लैब और हर तरीके की पूर्ण व्यवस्थाएं कराना अनिवार्य कर दिया है। जिले के महाविद्यालयों के लिए यह आदेश तो प्रभावी ही नहीं हो रहे है। क्षेत्रीय उच्चाधिकारियों ने पूर्व में नैक को लेकर आदेश भी दिए थे। शहर के दोनों महाविद्यालयों ने रस्म अदाएगी के लिए यूजीसी बैंगलोर के लिए आवेदन तो कर दिया है, लेकिन मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं पूर्व उतरने की वजह से आवेदन निरस्त कर दिया। उपाधि कॉलेज ने तीन बार और रामलुभाई महाविद्यालय से दो बार प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। ऐसे में टीम केइंतजार में यहां का प्रशासन ग्रांट के सपने संजोए बैठा है।
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नॉक निरीक्षण में आवश्यक मानक:
- महाविद्यालय में पुस्तकालय और संपूर्ण संचालित विषयों की प्रयोगशालाएं हो।
- महाविद्यालय का परीक्षाफल उच्च हो।
- लगातार हो रहे हों शोधकार्य ।
- शोध-पत्रिका हर साल प्रकाशित हो
- सेमिनारों में महाविद्यालय स्टाफ की प्रतिभागिता हो।
- छात्र-छात्राओं को हॉस्टल की हो सुविधा।
- एनएसएस, एनसीसी, रोवर-रेंजर्स की मान्यता हो।
- शैक्षिक परिभ्रमण पर विद्यार्थी प्रति वर्ष जाएं।
- अतिरिक्त पाठ्यतर क्रिया किलाप होने आवश्यक।
- शरीरिक शिक्षा और खेलकूद का स्तर ऊंचा हो।
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रामलुभाई महाविद्यालय की स्थिति
एनसीसी की मान्यता अभी तक नहीं मिली है। छात्रावास भी नहीं है। शोध-पत्रिका अप्रकाशित है। वार्षिक पत्रिका महाविद्यालय में प्रति वर्ष निकल रही है। स्टाफ की पर्याप्त कमी है। शैक्षिक भ्रमण लोकल स्तर पर ही होता है।
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उपाधि महाविद्यालय की स्थिति
महाविद्यालय में स्नातक और परास्नातक स्तर पर कई विषयों का अभाव है। सभी विषयों की प्रयोगशालाओं के साथ हॉस्टल भी नहीं है। लाइब्रेरी में अतिरिक्त विषय की किताबों का टोटा है। कई खेलकूद टीमें नहीं बनी है। स्टाफ की कमी लगातर है। इंग्लिश और एजूकेशन, एमएससी की मान्यता अभी तक नहीं मिली है।
वर्जन..........
तैयारियां कर ली हैं पूरी
रामलुभाई महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि पीजी की मान्यता अधिकांश कोर्सों में नहीं मिली है। पूर्व में कालेज से आइईक्यूए (इंटीट्शनल इलिजिबिलिट फार क्वालिटी एसेसमेंट) की रिपोर्ट बनाकर बैंगलोर के लिए भेजी थी। हैदराबाद कार्यालय से दो नवंबर को टीम यहां पहुंचने की संभावना है।
वर्जन..........
भेज चुके हैं प्रस्ताव
उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पीके सिंह बताया कि 31 मार्च 2012 तक नॉक कराना आवश्यक है, नहीं तो यूजीसी कालेजों की ग्रांट रोक देगा। महाविद्यालय ने पहले तीन बार प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है। दो बार महाविद्यालय मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। तीसरे प्रस्ताव में कुछ उम्मीदों पर खरा उतरने की उम्मीद है।

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