रोशनी देने में पिछड़ा महकमा

Pilibhit Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। सरकार जहां हर साल एनआरएचएम योजनाओं पर पानी की तरह धन बहा रही है वहीं ये योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। ऐसी ही योजना है अंधता निवारण कार्यक्रम। इसमें पिछले वित्तीय वर्ष में केवल 20 फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो सका।
बूढ़ी दादी की आंखें सफेद मोतियाबिंद से ग्रस्त हैं लेकिन सरकार से आए लेंस का फायदा उनको नहीं मिल पा रहा है। जिले का स्वास्थ्य विभाग मोतियाबिंद ऑपरेशन के लक्ष्य से काफी पीछे है। वर्ष 2011-12 में केवल बीस फीसदी ही लक्ष्य पूरा हो सका। इधर नए वित्तीय वर्ष का लक्ष्य पिछले से डेढ़ गुना बढ़कर आया है। इसमें पचास प्रतिशत निजी, तीस प्रतिशत सरकारी और बीस प्रतिशत एनजीओ पर जिम्मा रहता है। आपरेशन का दिया गया लक्ष्य केवल जिला अस्पताल ने ही पूरा किया, देहात क्षेत्रों में किसी भी सीएचसी और पीएचसी पर आई सर्जन न होने से एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका। योजना में करीब दस लाख रुपये का बजट विभाग को मिला है। 2012-13 का लक्ष्य 10,473 है, जिसमें अभी तक विभाग करीब 1015 ऑपरेशन का लक्ष्य ही पूरा कर सका है। जिला अस्पताल के दो डाक्टरों पर ही इस लक्ष्य को पूरा करने का भार है।
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योजना के तहत प्रति आपरेशन खर्चा
दवा और लेंस : : 450 रुपये
पोस्ट आपेरिटव चश्मा : 125 रुपये
पीओएल पेट्रोल एवं डीजल: 100 रुपये
प्रचार एवं प्रसार : 75 रुपये
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कुल योग : 750 रुपये
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स्टाफ न होने से पिछड़ा कार्यक्रम
सीएमओ डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि सीएचसी-पीएचसी पर कैंप लगाए गए, लेकिन नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी से वहां ऑपरेशन नहीं हो पाए। मरीजों को जिला अस्पताल में ऑपरेट किया गया। अंधता निवारण कार्यक्रम के लक्ष्य में हम पीछे हैं। डॉक्टरों की तैनाती के लिए शासन को अवगत कराया जा चुका है।

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