छह लाख खर्च फिर भी जलभराव

Pilibhit Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
शहर के कई मुहल्लों में भरा बारिश का पानी
27 नालों की सफाई को 19 लाख में हुआ था
जन- जीवन पर पड़ रहा सीधा असर
अधर में लटकी है नालों की सफाई

पीलीभीत। शहर में नालों की सफाई अधर में है, जिससे इन दिनों हो रही बारिश से निचले मुहल्लों में जलभराव है। इससे लोगों को खासी परेशानी है। यह हाल तब है जब नगरपालिका ने शहर को जलभराव से मुक्त रखने के लिए सफाई की दोहरी व्यवस्था का सहारा लिया और छह लाख रुपये खर्च कर दिए।
कई दिनों से रुक- रुक कर हो रही बारिश से शहर के मोहल्ला खैरुल्ला शाह, मदीना शाह, राजाबाग कॉलोनी, फीलखाना, डालचंद, सुनगढ़ी, आवास विकास, मोहम्मद वासिल, शेर मोहम्मद, गोदावरी स्टेट, अशोक कॉलोनी, भूरे खां, नई बस्ती, होली चौराहा समेत कई मोहल्लों में जलभराव हो रहा है। इन मोहल्लों में पानी निकास की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात का पानी मार्गों पर भरा है। मार्गों पर बने गड्ढे और उनमें भरा बरसात का पानी लोगों की जान जोखिम में भी डाल रहा है। वाहन सवार और पैदल आने-जाने वाले लोग गड्ढे में पानी भरे होने के कारण जान नहीं पाते और वह गिरकर चोटिल हो रहे हैं। हालत है कि जलभराव से लोगों को घर से निकलना दूभर हो रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही है। क्योंकि काफी बच्चे आज भी पैदल स्कूल जाते हैं। सड़कों पर पानी भरा होने से उनके कदम बहकते हैं और अक्सर गिर कर उनकी ड्रेस खराब हो जाती है। शहर को जलभराव से मुक्त रखने के लिए पालिका बोर्ड गठन से पहले तत्कालीन ईओ विजय प्रताप सरल ने शहर के 27 नालों की सफाई के लिए 19 लाख रुपये में ठेका दिया था। निर्धारित समय सीमा में नालों की सफाई नहीं हो पाई और बारिश का मौसम शुरू हो गया। हालात बिगड़ते देख डीएम राजशेखर ने ठेका निरस्त कर पालिका के संसाधनों से सफाई कराने के निर्देश दिए। पालिका ने नालों की सफाई की बागडोर हाथ में आने के बाद कुछ नालों पर काम शुरू किया। सफाई का काम पूरा हुआ होता तो शायद शहर में जलभराव नहीं होता। हालात गवाह हैं कि सफाई की दूसरी व्यवस्था भी शहर को जलभराव से मुक्ति से नहीं दिला पाई।

ऐसे कराई गई सफाई
नालों की सफाई का ठेका 19 लाख रुपये में दिया गया था। डीएम के ठेका निरस्त करने पर पालिका प्रशासन के मुताबिक 14 नालों की सफाई मुकम्मल हुई थी। इसके एवज में पालिका ने करीब पांच लाख रुपए का भुगतान किया। ठेका निरस्त होने के बाद पालिका के संसाधनों से हुई सफाई पर करीब एक लाख रुपए खर्च हुए।

पालिका बोर्ड के वजूद में आने के बाद नालों की सफाई में तेजी आई। ठेका समाप्ति के बाद पालिका के संसाधनों से सफाई कराई गई। मैंने और एसडीएम/ ईओ ने स्वयं मौके पर खड़े हो कर सफाई करवाई है। दरअसल जलभराव का असल कारण पॉलीथिन है। जहां भी जलभराव की सूचना होती है, सफाई के लिए पालिका कर्मी भेजते हैं।
प्रभात जायसवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद

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