बाघ से दहशत, सतर्कता के निर्देश

Pilibhit Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
पद चिन्ह मिलेे, टीम ने घायल से पूछताछ की
बाघ ट्रैंकुलाइज न कराने से बढ़ रहा गुस्सा

पीलीभीत/ पूरनपुर। बाघ के हमले में घायल किशोर से अफसरों ने सीएचसी में पूछताछ की। जंगल किनारे बाघ और उसके पद चिन्हों की तलाश की। लोगों से बाघ को लेकर सतर्क रहने का आवाहन किया। हमलों के बावजूद बाघ के ट्रैंकुलाइज न होने से क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। दहशत के चलते किसान खेतों में नहीं जा रहे है।
मालूम हो कि गांव जटपुरा, गजरौला खास, बिलहरी के आस-पास कई दिनों से डेरा जमाए बाघ ने कल गांव जटपुरा निवासी दीपू पर उस समय हमला कर घायल कर दिया था जब वह अपने पिता राजकुमार सिंह के साथ धान के खेत में निराई करने गया था। सामाजिक वानिकी के अफसरों ने सीएचसी में किशोर और उसके पिता से घटना के बारे में पूछताछ की। रेंजर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाघ के चिन्ह मिले हैं। आसपास के गांव के लोगों से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने बताया कि बाघ को जंगल में खदेड़ने के प्रयास किए जा रहे है, लेकिन खेतों में गन्ने की फसल से इसमें सफलता हाथ नहीं लग पा रही है। बाघ की दहशत के चलते किसान खेतों में जाने से कतरा रहे है। स्वीकृत के बाद भी बाघ ट्रैंकुलाइज न कराने को लेकर लोगों में दिनों-दिन वन विभाग के अफसरों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। असुरक्षा के अभाव में मौतों से घट रही है बाघ और लैपर्ड की संख्या
इको टूरिज्म को भेजा गया प्रस्ताव लटका
टाइगर प्रोजेक्ट की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद भी अड़चन

माधोटांडा। जिले के जंगल की प्राकृतिक सौंदर्य के रुप में अलग पहचान है। जहां इको टूरिज्म के लिए भेजा गया प्रस्ताव शासन की हरी झंडी के लिए इंतजार में लंबित पड़ा है। वहीं टाइगर प्रोजेक्ट की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद भी केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच लटका हुआ है। जंगल से बाघ और लैपर्ड की संख्या सुरक्षा के अभाव में मौते होने से घटती जा रही है।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पीलीभीत के हरे-भरे जंगलों की राजनीतिक उपेक्षा के चलते न तो यहां का जंगल सेंच्युरी और टाइगर प्रोजेक्ट घोषित हो सका था और न ही पर्यटन को बढ़ावा देने को इसे इको टूरिज्म घोषित किया जा सका। जंगलों मेें बाघ और लैपर्ड हमेशा अधिक रहे। टाइगर प्रोजेक्ट लागू करने को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार में लंबे समय से आपत्ति लगाने और उनका निस्तारण करने में ही लंबा समय बीत गया। नतीजे में जंगल से बाघों और तेदुओं की संख्या घटने लगी है। पिछले सालों में विभिन्न कारणों से छह बाघ और तीन लैपर्ड की मौत हो चुकी है। अधिकांश की पानी में डूबकर स्वभाविक मौत बताई गई, लेकिन हो हल्ला होने पर शिकारी भी पकड़े गए थे।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Lucknow

भाजपा ने भी उतारा अपना कैंडिडेट, गोरखपुर से उपेंद्र और फूलपुर से कौशलेंद्र को दिया टिकट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को दिल्ली गए थे। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मुलाकात भी थी। इस मुलाकात में प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगी है।

19 फरवरी 2018

Related Videos

जीजा की जान खतरे में देख बाघ से जा भिड़ा साला

पीलीभीत में बाघ का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। यहां गांव रायपुर में बाघ ने रंजीत सिंह नाम के एक शख्स पर हमला बोल दिया।

19 फरवरी 2018

Switch to Amarujala.com App

Get Lightning Fast Experience

Click On Add to Home Screen