..तो पांच साल पहले ही टाइगर रिजर्व घोषित हो जाता पीलीभीत का जंगल

Pilibhit Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। हिमालय की तराई में स्थित पीलीभीत का विशाल वन क्षेत्र वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां बढ़ती बाघों की संख्या और जंगल में उनके अनुकूल घास के मैदान, पानी के लिए नहरों का जाल आदि मौजूद है। यही वजह है वर्ष 2007-08 में टाइगर प्रोजेक्ट की फाइल चलाई गई, लेकिन केंद्र सरकार की सहमति के बाद भी तत्कालीन प्रदेश सरकार ने इसे अनुमति नहीं दी थी।
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अब मंगलवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन जब जब यह कहा कि पीलीभीत समेत देश में पांच जंगलों को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए सरकार सैद्धांतिक रूप से सहमत है तो यहां के पर्यावरण प्रेमी गदगद हो गए हैं। पर्यावरण प्रेमी टीएच खान और परवेज हनीफ ने कहा है कि केंद्र सरकार की सहमति के बाद अब टाइगर रिजर्व जोन जल्द बनने की उम्मीद बंधी है। इससे बाघों का संरक्षण हो सकेगा।
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यह है पीलीभीत के जंगल की विशेषता
71 हजार 288.08 हेक्टेयर क्षेत्र में घने वन हैं। वनों की सीमा खीरी, शाहजहांपुर, उत्तराखंड और नेपाल के जंगलों से सटी है। टाइगर रिजर्व के लिए वन क्षेत्र में 60 हजार 280 हेक्टेयर कोर एरिया और 12 हजार 745.18 हेक्टेयर बफर एरिया प्रस्तावित किया गया था। यहां वन्य जीवों की बेहतर परिवेश के लिए घास के अच्छे मैदान और वैटलैंड (गीली जमीन) भी मौजूद है।
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टाइगर रिजर्व के लिए इन संसाधनों की होगी जरूरत
वनाधिकारियों के मुताबिक टाइगर रिजर्व के लिए चार हाथी, महावत, चारा कटर, दो ट्रैंकुलाइजिंग गन, पेट्रोलिंग के लिए पांच बोलेरो गाड़ियां, 10 बाइक, वायरलेस नेटवर्किंग व्यवस्था, 40 मोबाइल फोन, 10 स्वचालित आर्म्स के अलावा चारागाह विकास के लिए खरपतवार उन्मूलन, चारा योग्य घास की प्रजातियों का रोपण की आवश्यकता होगी।
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यह होंगे लाभ
पीलीभीत का नाम विश्व पर्यटन स्थलों में शामिल होगा। यहां आने वाले पर्यटकों के माध्यम से आय में वृद्धि होगी। केंद्र सरकार से समय-समय पर आर्थिक मदद मिलेगी और जंगल में लोगों की आवाजाही कम होने से वन्य जीवों को सुरक्षा मिलेगी
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