कुशल तैराक बाघ डूबकर नहीं मर सकता

Pilibhit Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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विशेषज्ञों ने कहा नहीं है स्वाभाविक मौत, आखेट की आशंका
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पीलीभीत। बाघ कुशल तैराक होता है। वह पानी में डूबकर नहीं मर सकता। हां, हालात उसे पानी में जरूर डुबो सकते हैं।
पूरनपुर सामाजिक वानिकी क्षेत्र में बड़ी नहर से मिले करीब छह साल के बाघ के शव को लेकर वन्य जंतु विशेषज्ञों की यही राय है। मुख्य वन संरक्षक लखनऊ रूपकडे से अमर उजाला ने सेलफोन पर इस बावत पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि आखेट हुआ है। आखेट मानकर जांच शुरू करा दी गई है। सबसे पहले पांच टीम बनाकर नहर के किनारे उस स्थान को तलाशने की कोशिश हो रही है, जहां से बाघ नहर में गिरा। एक टीम बाघ के शिकार को तलाशने में जुट गई है।
बकौल मुख्य वन संरक्षक, शिकार दो स्थिति में होता है। पहला-बाघ अपने शिकार को दो या उससे अधिक बार में खाता है। बाघ से परेशान लोग उसके शिकार में जहर डाल देते हैं। बाघ जब दोबारा अपना शिकार खाने आता है तो जहर के प्रभाव से मारा जाता है। दूसरा-बाघ की खाल, नाखून, दांत और मूछ के बाल आदि सभी कुछ काफी कीमती होते हैं। इनके चक्कर में शिकारी यह काम करते हैं। बाघ की मौत के क्या कारण हैं वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही साफ होगा। प्रथम दृष्ट्या मामला शिकार का प्रतीत होता है।
तराई आर्कलैंड स्केप के यूपी और उत्तराखंड हेड डॉ. हरीश गुलरिया का भी मानना है कि टाइगर पानी में डूब नहीं सकता, क्योंकि वह कुशल तैराक होता है। मौके पर आए तराई आर्कलैंड के प्रदेश को आर्डिनेटर डॉ. मुदित गुप्ता कहते हैं कि चूंकि मृत बाघ कि शरीर पर कोई खरोंच तक नहीं है, सभी अंग सुरक्षित मिले हैं। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक कुछ भी कहना जल्दी होगा, फिर भी बाघ की मौत स्वाभाविक नहीं है।

शव न निकालने पर ग्रामीणों के काटा हंगामा

घुंघचाई। बाघ का शव कई किलोमीटर तक नहर में तैरता चला गया। शव न निकालने पर एकत्र हुए लोगों ने हंगामा काटा। अगर लोग हंगामा न करते तो बाघ का शव पानी के साथ शाहजहांपुर जिले की सीमा में पहुंच जाता।
हरदोई ब्रांच की एक झाल में फंसे बाघ के शव को गांव दंदौल कालोनी के अनिल मौर्या ने सबसे पहले देखा। अनिल ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे वह बाइक से घुंघचाई में अपनी दुकान खोलने जा रहा था। गांव डूडा के समीप झाल में बाघ के शव को फंसा देखा। अधिकारियों के पहुंचने से पहले बाघ का शव डूडा से करीब तीन किलोमीटर दूर दंदौल पुल के समीप पहुंच चुका था। बाघ के शव को नहर से न निकाले जाने पर एकत्र हुए लोगोें ने हंगामा कांटना शुरू कर दिया। इस पर मजबूरन वन विभाग के कर्मचारियोें ने बाघ के शव को नहर से बाहर निकाला।
घटनाक्र म एक नजर में
8.00 बजे: गांव डूडा के समीप देखा गया बाघ का शव।
8.30 बजे गढ़ा रेंज के फारेस्टगार्ड आनंद पहुंचे।
9.00 बजे अन्य वनकर्मियों के पहुंचने का सिलसिला हुआ शुरू।
9.20 बजे बाघ के शव को नहर के किनारे खींच कर गया डाला गया।
9.40 बजे डीएफओ मनोज सोनकर पहुंचे।
1.25 बजे पशु चिकित्सक मौके पर पहुंचे।
1.40 पर शव पोस्टमार्टम को रवाना।

गायब रहे सामाजिक वानिकी अफसर
पूरनपुर। बाघ का शव जिस क्षेत्र में मिला वह सामाजिक वानिकी का क्षेत्र बताया गया। शव मिलने के बावजूद सामाजिक वानिकी के अफसर गायब रहे। डीएफओ बार-बार सामाजिक वानिकी के अफसरों की लोकेशन लेने को आदेश देते रहे। मौके पर पहुंचे सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर एसके वर्मा से अन्य अफसरों की जानकारी की। डिप्टी रेंजर ने बताया कि रेंजर अवकाश पर हैं। इस संबंध में सामाजिक वानिकी के डीएफओ अरविंद सिंह ने मोबाइल पर बताया कि वे अवकाश पर गए थे। बाघ का शव मिलने की जानकारी मिलने पर वह आरवीआरआई बरेली पहुंच रहे है। उन्होंने बताया कि पूरनपुर रेंजर भी अवकाश पर है। उनको भी लौटने को कहा गया है।

कुछ घंटे पहले ही मरा है बाघ

पूरनपुर। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कन्जर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां ने बताया कि बाघ का शव फ्रेश होने और उससे बदबू न आने से सात-आठ घंटे पहले ही उसकी मौत होने की आशंका है। इतने स्वस्थ्य लग रहे बाघ की मौत बड़ी बात है।

जंगल के बाहर घूम रहे बाघ का तो नहीं है शव!
पूरनपुर। छह माह से बाघ जंगल के बाहर घूम रहे हैं। एक किसान को निवाला बनाने के साथ कई लोगों को हमला कर बाघ लहूलुहान कर चुके हैं। लोग कयास लगा रहे हैं कि रविवार को मिला बाघ का शव कहीं जंगल के बाहर घूम रहे किसी बाघ का तो नहीं है। पिछले कई दिनों से बाघ जटपुरा, बिलहरी, गजरौला खास के अलावा घुंघचाई क्षेत्र में मटेहना कालोनी, जरा कोठी क्षेत्र में देखे जा रहे हैं।
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