सिर में आई चोट से जेल बंदी की मौत, हड़कंप

Pilibhit Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
गैरइरादतन हमले के आरोप में चार अगस्त से बंद था
आठ अगस्त की सुबह जिला अस्पताल भेजा गया
डॉक्टरों ने नहीं किया था भर्ती
वापस लेकर जेल अस्पताल में हुआ था भर्ती
रात बेड से गिरने पर बिगड़ी हालत

पीलीभीत। जिला कारागार में निरुद्ध 70 वर्षीय बंदी की बुधवार की रात हालत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई। शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत सिर में आई चोट के कारण दर्शाई गई है। पोस्टमार्टम बाद कारागार प्रशासन ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
बीसलपुर कोतवाली पुलिस ने ग्राम खरगपुर निवासी 70 वर्षीय सरनाम सिंह और उसके दो बेटे ओमवीर व कुसुमपाल को चार अगस्त को बंदी बनाकर जिला कारागार भेजा था। जिला कारागार अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि आठ अगस्त को बंदी सरनाम सिंह की तबियत खराब हो गई, इस पर उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां हालत में सुधार होने पर वापस लाकर जिला कारागार अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात करीब 23.30 मिनट पर वह बेड से अचानक नीचे गिर पड़ा, जिससे उसकी दाहिने आंख की भौं पर चोट लग गई। बंदी रक्षक सज्जन कुमार की सूचना पर वह जेल डॉक्टर आरके सक्सेना के साथ आए और बंदी की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल भिजवाया, जहां शुक्रवार की रात 1.55 पर उसने दम तोड़ दिया। जेल प्रशासन ने मौत की सूचना विशेष मैसेंजर से परिजनों को दी। पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की बंदी पुत्रों के प्रार्थना पत्र को कारागार प्रशासन ने न्यायालय को भेजकर अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया था, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी है। शुक्रवार को पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दोनों भाइयों को जेल से उनके गांव ले जाया जाएगा।

ठीक से होता इलाज तो बच जाती जान
परिजनों ने लगाया अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

पीलीभीत। ग्राम खरगपुर निवासी मृतक बंदी सरनाम सिंह के बड़े पुत्र मेहर सिंह ने बताया कि गांव के ही शिवराज से गन्ने के भुगतान को लेकर कहासुनी हो गई थी, जिसमें शिवराज सिंह अपने पुत्रों आदि के साथ उसके घर घुस गए थे और परिजनों की पिटाई कर दी थी। इस घटना में दोनों पक्षों को चोटें आईं थी। बकौल मेेहर सिंह, पुलिस ने उसके काफी प्रयासों के बाद रिपोर्ट दर्ज नहीं की और न ही घायल पिता का मेडिकल परीक्षण कराया। पुलिस ने हमलावरों से साठगांठ कर एक पक्षीय रिपोर्ट दर्ज कर ली और पिता सरनाम सिंह समेत दो भाइयों को धारा 308, 323, 324, 506 के तहत जेल भेज दिया। उनका कहना है कि हमलावरों की पिटाई से बुजुर्ग पिता को अंदरूनी चोटे आईं थी। जिला कारागार में जब तबियत खराब हुई तो उन्हें जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां डॉक्टरों ने लापरवाही दिखाई और सही ढंग से इलाज नहीं किया, जिन्हें वापस जेल भेज दिया। अगर डॉक्टर जिला अस्पताल में भर्ती कर ठीक ढंग से इलाज कर देते और उन्हें जिला कारागार पुन: न भेजते तो पिता की जान बचाई जा सकती थी।
सरनाम के घर कोहराम
बीसलपुर। सरनाम सिंह यादव की जेल में मौत हो जाने से उनके घर में कोहराम मच गया है। सूचना मिलते ही उनके परिजन शव लेने जिला मुख्यालय रवाना हो गए।

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