लेवी खत्म होने से चावल उद्योग और धान उत्पादकों की बढ़ी मुसीबतें

Pilibhit Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। डेढ़ दशक पहले चीनी उत्पादन करने वाले क्रेशर ठप होने के बाद अब केंद्र सरकार के एक फरमान से जिले के चावल उद्योग पर गहरा असर पड़ने जा रहा है। इससे राइस इंडस्ट्री और धान उत्पादकों पर संकट के बाद मंडराने लगे हैं। केंद्र सरकार ने राइस मिलों की लेवी समाप्त कर दी है।
मालूम हो कि जिले में करीब 126 राइस मिलें हैं। इनमें तकरीबन आठ हजार लोग काम करते हैं। सीजन में राइस मिलों से करीब 300 करोड़ का कारोबार होता है। भारत सरकार द्वारा अब तक किसानों का धान खरीदने को सरकारी एजेंसियों के साथ राइस मिलों को भी अनुमति दी जाती थी। राइस मिलर सरकारी कीमतों पर किसानों से धान खरीदते थे और चावल बनाकर कुल खरीदे गए धान का 60 फीसदी हिस्सा चावल की लेवी के रूप में सरकार को बेच देते थे। इसके लिए सरकार द्वारा धान के निर्धारित मूल्यों के साथ चावल बनाने में आए खर्च की भी अदायगी की जाती थी। केंद्र सरकार के इस फरमान के बाद से छोटे स्तर पर संचालित की जाने वाली कई राइस मिलें बंद होने की संभावना बढ़ गई है। वहीं बड़े व्यापारी भी मिल में कार्यरत कर्मचारियों को कम करने को मजबूर हो जाएंगे। ऐसे में हजारों कर्मचारियों को बेरोजगार होना पड़ेगा।
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सरकारी खजाने को भी होगा नुकसान
जिले में संचालित राइस मिलें सीजन के दौरान यानि अक्तूबर से मार्च के बीच धान की खरीद और सरकार को लेवी की सप्लाई करती हैं। मिलों द्वारा किए जाने वाले 300 करोड़ के कारोबार से सरकार को राजस्व मिलता है। लेवी बंद होने के बाद सरकार को राजस्व को खासा नुकसान होगा।
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क्या कहते हैं कारोबारी
फैसले पर पुर्नविचार करे सरकार
केंद्र सरकार ने सिर्फ यूपी और आंध्र प्रदेश की राइस मिलों से लेवी हटाई है। सरकार को सिर्फ दो प्रदेशों के कारोबारियों और किसानों के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री को पत्र भेजकर इस निर्णय पर पुर्नविचार कराने की मांग की है।
गिरीश कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष-राइस मिलर्स एसोसिएशन, पीलीभीत।

बंद हो जाएगा राइस कारोबार
चीनी उद्योग के बाद प्रदेश में राइस मिलों का कारोबार संचालित किया जा रहा है। लेवी समाप्त किए जाने से चावल का कारोबार खतरे में आ गया है। यदि सरकार के पास धान की अधिकता है तो उसे एक्सपोर्ट करना चाहिए। क्योंकि इससे कारोबार और किसानों दोनों को नुकसान होगा।
दिनेश अग्रवाल, गजानंद रामानंद राइस मिल-पीलीभीत।
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किसान हित में फैसला वापस हो
लेवी समाप्त होने से सबसे ज्यादा समस्याएं किसानों के सामने आएंगी। किसान गेहूं की तरह अब धान भी औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने पर मजबूर होगा। सरकार को किसान हित में अपना फैसला वापस लेना चाहिए। वरना रोजी और रोटी का संकट हो जाएगा।
सुनील कुमार अग्रवाल, महामंत्री-राइस मिलर्स एसोसिएशन, पीलीभीत।
बंद हो जाएंगी छोटी मिलें
केंद्र सरकार द्वारा लेवी समाप्त किये जाने के बाद छोटी राइस मिलों के बंद होने की संभावना बढ़ गई है। सरकारी खजाने में जाने वाले टैक्स का भी खासा नुकसान सरकार को उठाना पड़ेगा। लिहाजा सरकार को चाहिए वह एक बार फिर इस फैसले पर विचार करे।
गोपाल कृष्ण अग्रवाल, उपाध्यक्ष-राइस मिलर्स एसोसिएशन, पीलीभीत।

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