फिर गच्चा दे गया बाघ

Pilibhit Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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पूरनपुर। रविवार को बाघ दुधियाखुर्द रेलवे स्टेशन के पीछे आबादी के समीप गन्ने के खेत में पहुंच गया। इससे इलाके में दहशत व्याप्त हो गई। ट्रैंकुलाइज टीम भी मौके पर पहुंची। खेत के एक ओर जाल लगाकर बाघ को ट्रैंकुलाइज करने का अभियान शुरू हुआ। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद भी बाघ की आहट न मिलने पर टीम लौट गई। मौके पर वनकर्मियों को बाघ की निगरानी के लिए तैनात कर दिया गया है।
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दुधियाखुर्द से करीब एक किलोमीटर दूर बालामनी के गन्ने के खेत में तीन दिनों से देखे जा रहे बाघ को शनिवार की देरशाम फिर जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी की टीम के नेतृत्व में शुरू किया गया। पटाखे दागने और खेत में ट्रैक्टर घुसाने पर बाघ खेतों से निकलकर जंगल की ओर भागा। टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां ने बताया कि जंगल के करीब एक किलोमीटर दूर बाघ कही फिर गायब हो गया।
सुबह बाघ दुधियाखुर्द रेलवे स्टेशन के पीछे आबादी के समीप एक गन्ने के खेत में देखा गया। गन्ने के खेत केे समीप रहने वाले निर्मल प्रसाद की ऐसी सूचना पर सामाजिक वानिकी की टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने खेत के समीप बाघ के पग चिन्ह ट्रेस किए। इस पर गन्ने के खेत की घेराबंदी शुरू की गई। जाल, पिंजरा सब तैयार कर लिया गया। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. शहनवाज अमीन, डॉ देवेंद्र चौहान ट्रैंकुलाइज वैन से मौके पर पहुंचे। पटाखे खेत में फेंक कर दागे गए। लेकिन बाघ की आहट नहीं मिली। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट के अनुसार बाघ खेत में होता तो इतना करने पर जरूर उसकी आहट मिलती।
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सोमवार को होंगे हाथियों को मंगाने के प्रयास
सामाजिक वानिकी के रेंजर हसीब बेग ने बताया कि सोमवार को हाथियों को मंगवाने के प्रयास शुरू किए जाएंगे। वेग की मानें तो शनिवार को देरशाम बाघ को जंगल में खदेड़ने के प्रयास में वह सफलता के करीब थे। बाघ जंगल से कुछ दूरी पर ही रह गया था, लेकिन आगे से कुछ लोगों ने ट्रैक्टर लगा दिए, जिससे वह जंगल में नहीं जा पाया। 0000
अभियान के समय एक हुआ जख्मी
शनिवार की शाम बाघ को खदेड़ने के प्रयास में एक व्यक्ति ट्रैक्टर से नीचे गिरकर दब गया और घायल हो गया, जिसका गांव में ही इलाज कराया गया।

शिकार को लेकर जंगल से बाहर आ रहे है बाघ : एक्सपर्ट
पूरनपुर। जंगल में पानी न मिलने के कारण बाघों के जंगल के बाहर आने के तर्क को खारिज करते हुए ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. शहनवाज अमीन का कहना है कि बाघ भोजन की तलाश में ही जंगल से बाहर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मां से बिछुड़ने के बाद कम उम्र के बाघ जंगली जानवरों का शिकार आसानी से नहीं कर पाते। इसलिए वे आबादी के समीप आते हैं। यहां उन्हें आसानी से शिकार मिल जाता है।

बाघ ने कुत्ते पर बोला हमला
घुंघचाई। रविवार की शाम करीब साढ़े छह बजे चंदोइया कॉलोनी के निकट बाघ ने गांव निवासी अमरजीत सिंह के कुत्ते पर हमला बोल दिया, लेकिन वह बच निकला। ग्रामीणों ने बाघ देखे जाने की सूचना वनाधिकारियों को दी है।
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