प्रशासन ने नहीं लिया पिछली बर्बादी से सबक

Pilibhit Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। शारदा और देवहा नदी की पिछले वर्षों मचाई गई तबाही के बाद भी जिला प्रशासन ने सबक नहीं लिया। सिंचाई विभाग छह करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया है। उधर शारदा पर बनाए जा रहे स्पर नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे बाढ़ बचाव के लिए बनाए जा रहे स्परों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
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मानसून के देर से आने के कारण अभी जिले में बाढ़ का प्रकोप नहीं है, मगर बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। नदियों के उफान से बाढ़ आने का अंदेशा लगाया जा रहा है। पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ में देवहा और शारदा करीब आठ सौ किसानों की हजारों एकड़ से अधिक कृषि योग्य भूमि और तमाम मकानों को अपने आगोश में समेट चुकी है। बाढ़ से पिछले वर्षों से हुई तबाही के बाद भी जिला प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। देवहा नदी की बाढ़ से बीसलपुर तक का इलाका प्रभावित होता है। एक अनुमान के मुताबिक इस नदी में करीब पांच सौ करोड़ की संपदा समा चुकी है। शारदा और देवहा नदियों की विभीषिक को रोकने के लिए करोड़ों रुपये धनराशि खर्च हो चुकी है। इस वर्ष ठोकरों के निर्माण के लिए साढ़े पांच करोड़ और डियूनीडाम की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को पांच करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि में सिंचाई विभाग डियूनीडाम पर नौ स्पर बनाए हैं। यहां चल रहा मिट्टी का कार्य अभी पूर्ण नहीं हो पाया है।
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केंद्रीय राहत कोष से मिले 10.35 करोड़
केंद्रीय राहत निधि (सीआरएफ) से इस वर्ष बाढ़ राहत को 10.35 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें शारदा के किनारे ठोकरों के निर्माण के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये व डियूनी डाम पर कार्य के लिए सिंचाई विभाग को पांच करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है, जिसमें से सिंचाई विभाग छह करोड़ रुपये ही खर्च कर सका है।
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भू - कटान को बने स्पर हो रहे क्षतिग्रस्त
पखवाड़े भर पहले सिंचाई विभाग बाढ़ खंड पूरनपुर ट्रांस द्वारा शारदा क्षेत्र में जीओ बैग लगाकर श्रीनगर में स्पर बनवाए जा रहे थे, जो मामूली बढ़े जलस्तर में ढह गए। जिस पर ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया था। नहरोसा ग्राम पंचायत ने नदी की धार मोड़ने के लिए सीसी बैग से स्पर बनाए थे, इन स्परों से करीब दो फीट पानी ऊपर बहने लगा, जिससे भू-कटान तेज हो गया।
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बरसात आने पर ही जागता है प्रशासन
शारदा नदी हर बरस कहर बरपाती है, मगर शासन, प्रशासन को बरसात में ही बाढ़ और कटान से बचाव की याद आती है। नदियों के बढ़ रहे जलस्तर के साथ बाढ़ और कटान के बचाव के लिए कार्य शुरू कर दिए हैं। श्रीनगर के लोगों ने दो पखवाड़े पूर्व निरीक्षण करने आए डीएम से मौके पर ही 11 सौ मीटर स्पर बनवाने की मांग की थी। डीएम के आदेश पर सप्ताह भर बाद अधिशाषी अभियंता भानु प्रताप सिंह ने बुधवार से काम धीमीगति से शुरू करा दिया।
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