बिना किताब कैसे हो पढ़ाई

Pilibhit Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। सरकारी स्कूलों में कक्षा आठ तक की पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण पूरी तरह न हो पाने के कारण पुस्तक विक्रेताओं को किताबें नहीं मिल पाई हैं। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में मान्य कई प्रकाशकों की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं है। जुलाई माह के 13 दिन बीत चुकेे हैं और पाठ्य पुस्तकाें की पूरी सीरीज अब तक बाजार में उपलब्ध नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे में बच्चे पढ़ाई कैसे कर पाएंगे।
शिक्षण सत्र के शुरुआती पखवाड़े में बच्चे स्कूल जा तो रहे हैं लेकिन बिना किताबों के। वजह यह कि शासन से करीब आठ प्रकाशकों की विभिन्न पुस्तकों को मान्य किया गया है। यह तय नहीं है कि किस प्रकाशक की पुस्तक किस स्कूल में पढ़ाई जाएंगी। पुस्तक विक्रेता इसी भय के कारण किताबें खरीद नहीं पा रहे हैं। उनका मानना है कि जिस प्रकाशक की पुस्तकों की अधिक डिमांड आएगी उसी की पुस्तकों का आर्डर दिया जाएगा। इधर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों और जूनियर हाईस्कूलों में नि:शुल्क पुस्तकें वितरित करने का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। पुस्तक विक्रताओं का मानना है कि जब तक सरकारी स्कूलों में किताबों का शत प्रतिशत वितरण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक पुस्तकों का आर्डर देने में रिस्क रहता है। इक्का दुक्का विषयों की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं। जाहिर है कि किताबें समय से न मिल पाने के कारण कोर्स देर से पूरा होगा और परीक्षा के समय इसका असर भी साफ नजर आएगा।
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असमंजस में है पुस्तक विक्रेता
पुस्तक विक्रेता असमंजस की स्थिति में हैं। कई प्रकाशकों की पुस्तकें शासन से मान्य होने के कारण यह नहीं पता चल पाता कि किस प्रकाशक की कौन सी किताब किस स्कूल में पढ़ाई जाएगी। ऐसे में किताबों का आर्डर देने में काफी रिस्क रहता है। एक सप्ताह बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जुलाई के अंत तक सभी किताबें बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी।
सैय्यद वाजिद अली
पुस्तक विक्रेता
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जुलाई के अंत तक मिल जाएंगी सभी किताबें
अभी सरकारी स्कूलों में कोर्स पूरी तरह नहीं बंट पाया है। जिसकी वजह से यह साफ नहीं हो पा रहा है कि कितने बच्चों के लिए किताबें उपलब्ध कराई जाएं। प्राइवेट व इंगलिश मीडियम स्कूलों की किताबों को लेकर कोई समस्या नहीं है। जिस प्रकाशक की पुस्तकें अधिक पसंद की जाती हैं, वह मार्केट में उपलब्ध हैं। माध्यमिक स्कूलों की किताबें जुलाई के अंत तक मिल जाएंगी।
रवि शर्मा
पुस्तक विक्रेता
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कोर्स विलंब से पूरा होने की रहेगी चुनौती
किताबें बाजार में न आने के कारण बच्चों और अभिभावकों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। अलग अलग प्रकाशकों की किताबें लगी होने के कारण बाजार में पूरी सीरीज नहीं मिल पा रही है। जितनी किताबें अब तक बच्चों को मिली हैं उसी से काम चलाया जा रहा है। विलंब होने के कारण कोर्स समय से पूरा कराने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
अखलाक हसन खां
प्रधानाचार्य, इकरा पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज
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स्कूल प्रबंधन व पुस्तक विक्रेताओं में सामंजस्य जरूरी
किताबें पूरी न मिलने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कुछ बच्चों ने मिलने-जुलने वालों से पुरानी किताबों की व्यवस्था कर ली है तो कुछ बच्चे बाजार में उपलब्ध आधी अधूरी किताबों के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं। होना तो यह चाहिए कि स्कूल प्रबंधन और पुस्तक विक्रेता सामंजस्य बनाकर कार्य करें। इससे किताबों में विलंब नहीं होगा। बच्चों का भी हर्ज नहीं होगा।
अनीता जोशी
शिक्षिका, अवंती बाई बालिका इंटर कॉलेज

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