ईनाम पाने वाली मिल को पौने दो अरब का घाटा

Pilibhit Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
बीसलपुर। किसान सहकारी चीनी मिल की बीते पेराई सत्र में 32 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, लेकिन बार के घाटे को मिलाकर अभी तक लगभग पौने दो अरब रुपये का घाटा हो चुका है।
मालूम हो कि इस मिल की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। सन 1975 से 1988 तक यह मिल काफी मुनाफे में रही। वर्ष 1988 में तो इस मिल को सर्वाधिक राष्ट्रीय चीनी उत्पादकता का प्रथम पुरस्कार भी मिला था। यह पुरस्कार मिल के तत्कालीन जीएम एसपी सिंह ने जीता था। उसके बाद इस मिल को ऐसी नजर लगी कि मिल घाटे में जाने लगी। सन 1988 के बाद से अब तक कोई भी ऐसा वर्ष नहीं गया है, जिसमें मिल को घाटा न हुआ हो। पिछले वर्ष तक यह घाटा पहुंचकर लगभग डेढ़ अरब का आंकड़ा छू चुका था।
बीते पेराई सत्र में मिल ने करीब 28 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था। मिल के एकाउंट सेक्शन ने बीते पेराई सत्र की बैलेंस शीट तैयार कर ली है। तैयार बैलेंस शीट के अनुसार मिल को बीते पेराई सत्र में 32 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इस घाटे को मिलाकर मिल का कुल घाटे ने लगभग पौने दो अरब का आंकड़ा छू लिया है। मिल के जीएम राकेश मोहन ने तैयार की गई बैलेंस सीट की प्रतियां डीएम और उत्तर प्रदेश किसान सहकारी चीनी मिल संघ (फेडरेशन) के अधिकारियों को भी भेज दी हैं।

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