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न लहलहाते पौधे, न फूलों की सुगंध

Pilibhit Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। सूबे में चार जुलाई से वन महोत्सव सप्ताह मनाया जा रहा है जो 10 जुलाई तक चलेगा। अपने जिले के वन विभाग और स्वयंसेवी संस्थाएं गोष्ठियां, पौधरोपण आदि कार्यक्रम करके इसे मनाएंगे, लेकिन शहर में हरियाली लाने की मंशा से बनाए कराए गए पार्कों की हालत बदतर ही रहेगी। इस ओर हमेशा की तरह इस बार भी किसी का ध्यान नहीं जाएगा।
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अपने शहर का दुर्भाग्य है कि यहां मनोरंजन के साधन के नाम पर कुछ भी नहीं है। पहले सिनेमाहाल थे। अब सिर्फ एक टॉकीज बचा है। शहर में पार्कों के लिहाज से देखें तो चार प्रमुख पार्क बच्चों और बड़ों के मनोरंजन तथा शहर में हरियाली दिखाने की मंशा से बनाए गए थे। इनमें सामाजिक वानिकी वन प्रभाग की देखरेख वाला टनकपुर स्थित नेहरू उद्यान केंद्र, ड्रमंडगंज चौराहा स्थित रामस्वरूप पार्क, गैस चौराहा स्थित शहीद दामोदरदास पार्क तथा रेलवे स्टेशन के पास नेहरू पार्क प्रमुख हैं। इनमें एक को छोड़ सभी पार्क नगर पालिका परिषद की देखरेख में हैं, लेकिन इनका कोई पुरसाहाल नहीं है। चारों पार्कों के निर्माण में बड़ी रकम खर्च हुई, लेकिन रखाव पर कोई ध्यान न दिए जाने से इनकी दशा खराब होती जा रही है। पार्कों में हरियाली पर धन खर्च न किए जाने से इनके पौधे सूख चुके हैं। पेड़ भी सूखते जा रहे हैं। पार्क में बैठने लायक भी कुछ नहीं बचा है। इससे यह सभी पार्क महज नाम के हैं। आलम यह है कि यहां बच्चे तक नहीं आते।
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लाखों खर्च, पर माली तक नहीं
शहर का सबसे पुराना पार्क ड्रमंडगंज चौराहा स्थित रामस्वरूप पार्क है। इसे वर्ष 1950 में शहीद रामस्वरूप की याद में बनवाया गया था। तब काफी लागत से यह बना था। अब शहर के बीचोबीच बाजार में यह पार्क आ गया है, लेकिन नगर पालिका परिषद के ध्यान न देने के कारण इसका अस्तित्व समाप्त हो गया है। कमोवेश यही हाल अन्य पार्कों का है। टनकपुर रोड स्थित नेहरू उद्यान केंद्र यहां का सबसे बड़ा पार्क है। करीब एक दशक पूर्व पांच लाख की लागत से इसे बनवाया गया था। वर्तमान में इसकी देखरेख सामाजिक वानिकी वन प्रभाग के जिम्मे है, लेकिन यहां भी कोई माली अथवा कर्मचारी नहीं है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
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वन महोत्सव मनाने का मुख्य मकसद पौधरोपण कर हरियाली लाना है। नेहरू उद्यान पार्क में देखभाल के लिए माली आदि कर्मचारी न होने से यह दुर्दशाग्रस्त है। वैसे इसका सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है। आचार संहिता लगने के कारण उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। जल्द ही इसे दुरुस्त किया जाएगा।
एके सिंह, डीएफओ सामाजिक वानिकी।
2
नगर पालिका परिषद की देखरेख वाले पार्कों की दुर्दशा है। इनका अस्तित्व खत्म होने से शहर में पार्कों का अभाव लगता है। वजह है इस पर खर्च करने के लिए पालिका के पास कोई बजट नहीं है। अब नया बोर्ड गठित होने वाला है। उम्मीद है कि पार्कों की दशा सुधरेगी।
डॉ एमएम खान, सिटी मजिस्ट्रेट।
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