आईएमए की हड़ताल का व्यापक असर

Pilibhit Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। राष्ट्रीय आह्वान पर आईएमए से संबद्ध जिले के सभी नर्सिंग होम और क्लीनिक सोमवार को पूरी तरह से बंद रहे। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। इस बंदी के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ रही। जिला महिला अस्पताल में पर्चा काउंटर एक बजे बंद हो गया, जिससे तमाम मरीजों को बगैर इलाज के घरों को लौटना पड़ा।
नेशनल काउंसिल ऑफ हृयूमन रिसोसेज इन हेल्थ (एनसीएचआरएच-2011) और क्लीनिकल इंस्टेवलिशमेंट बिल के विरोध और एमसीआई की स्वायत्ता, स्टेट मेडिकल काउंसिल के नियमों की बहाली आदि मांगों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय आह्वान पर सोमवार को एक दिवसीय बंद की घोषणा की थी। सुबह से ही नर्सिंग होम और क्लीनिकों पर मरीजों की आमद होने लगी थी, लेकिन अस्पताल बंदी के कारण उनका इलाज नहीं हुआ। इससे मरीजों को काफी दिक्कत हुई। तेज धूप में दूरदराज से आए कुछ मरीज तीमारदारों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे तो कई मरीज अपने घरों को वापस लौट गए। बंदी से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में 975 रोगियों के पर्चे बने। चिकित्सकों के कक्षों में मरीजों की कतारें लगी रहीं। सबसे ज्यादा दिक्कतें जिला महिला अस्पताल में आए मरीजों को हुईं। यहां दिन में एक बजे पर्चा काउंटर बंद कर दिया गया, तमाम महिलाएं घंटों इंतजार के बाद लौट गई। महिला अस्पताल की ओपीडी में सिर्फ 251 पर्चे बने।
बाक्स
बिना इलाज लौटना पड़ा
ग्राम सिमरिया ताराचंद निवासी दीनू देवी डिग्री कॉलेज रोड स्थित एक अस्पताल के बाहर बैठी थी। पूछे जाने पर बताया कि वह बहू मांसी को लेकर दवा दिलाने आईं थी, उसके पेट में कई दिनों से दर्द है। अस्पताल बंद होने के कारण उसका इलाज नहीं हो पा रहा है। कल सुबह आना पड़ेगा।

भर्ती से किया इंनकार : बलविंदर कौर
जराकोठी निवासी बलविंदर कौर ने अपने पेट में हुई पथरी का ऑपरेशन स्टेशन रोड स्थित एक अस्पताल में कराया था। चार रोज से अचानक दर्द होने लगी। आज वह अपने पति रक्षपाल सिंह के साथ दवा लेने शहर आईं थी। लेकिन स्टाफ ने हड़ताल होने पर उसे भर्ती से इंकार कर दिया।

जिला अस्पताल ले जाऊंगी
पूरनपुर निवासी खैरुल निशां पेट की बीमारी से परेशान थी। अपने पति नबी हसन के साथ स्टेशन रोड के एक अस्पताल आईं थी। उन्होंने बताया कि प्राइवेट इलाज कराना चाहती थी, लेकिन बताते हैं कि आज हड़ताल है। डॉक्टर साहब नहीं बैठेेंगे। मजबूरी में हमें जिला अस्पताल जाना पड़ेगा।

मायूस र्हुईं खुसीर बेगम
भिखारीपुर निवासी खुसीर बेगम सुबह 11 बजे शहर स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम पर दवा लेने आईं थी, लेकिन अस्पताल बंद होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। बताया इसी अस्पताल से इलाज चल रहा है। मालूम नहीं था कि हड़ताल है। बोली अब खाली लौटना पड़ रहा है।

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