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शहर का प्रथम नागरिक नहीं चुन सकेंगे नगरवासी

Pilibhit Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। शहर की नवविकसित कॉलोनियाें के वाशिंदे एक बार फिर चेयरमैन नहीं चुन पाएंगे। यह कॉलोनियां हैं, शहर की पॉश कॉलोनी कही जाने वाले वसुंधरा कॉलोनी, कांशीराम आवास कॉलोनी ईदगाह और ट्रांसपोर्टनगर। यहां के रहवासियों को उम्मीद थी कि इस बार उनकी कॉलोनी हर हाल में न सिर्फ पालिका दायरे में आ जाएगी, बल्कि उन्हें पहली मर्तबा चेयरमैन चुनने का मौका मिलेगा। इसके बावजूद परिसीमन में कृष्णलोक कॉलोनी को छोड़कर न तो इसका दायरा बढ़ा और न ही नई कॉलोनियां पालिका के जद में आ पाईं। खास बात तो यह है कि नवविकसित कॉलोनियों को सम्मिलित करने के प्रस्ताव पर पालिका बोर्ड के सदन में मोहर तक नहीं लगाई गई। इससे नगर पालिका क्षेत्र में शामिल न हो पाने के कारण इन कॉलोनियों के लोगों को मायूसी हाथ लगी है। करीब छह हजार मतदाता निकाय चुनाव में मतदान करने से वंचित रह जाएंगे।
बाक्स
दो साल पहले मंजूर हुआ था प्रस्ताव
शहरी इलाके के दायरे को बढ़ाने के लिए पालिका में कवायदें तो खूब चलीं। दो साल पहले प्रस्ताव भी मंजूर हुआ था। बोर्ड सदन में शहर से सटी नवविकसित कॉलोनियों को नगर पालिका सीमा में सम्मिलित करने के प्रस्ताव भी रखे गए, लेकिन नतीजा सिफर रहा। पिछले एक दशक में चार कॉलोनियों में विकास हुआ, जिसमें से कृष्णलोक कॉलोनी तो नगर पालिका क्षेत्र में आ गई। वसुंधरा कॉलोनी में तो ऑलीशान कोठियां भी खड़ी हो गईं। उधर कांशीराम आवास कॉलोनी भी विकसित हुईं, मगर इन्हें नगर में होने के बाद भी पालिका क्षेत्र में नहीं लिया जा सका।
क्या कहते हैं लोग
1
कांशीराम कॉलोनी शहर से सटी है, लेकिन इसे नगर पालिका क्षेत्र में न लिए जाने के कारण पालिका की सहूलियतें नहीं मिल पा रही हैं। जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया होता तो वह लोग भी अपना नुमाइंदा चुनते।
राजकुमारी, कांशीराम कॉलोनी-ईदगाह।
2
कॉलोनी में करीब साढ़े पांच सौ परिवार रहते हैं। बसपा सरकार में जो सुविधाएं मिलीं थीं, वह अब नहीं मिल रही हैं। ऐसे में इसे नगर पालिका क्षेत्र में न जोड़े जाने से यहां के लोगों के साथ अन्याय होगा।
विमला देवी-ईदगाह
3
बसपा सरकार ने उन्हें घर दिया था। सोंचा था कि नगर पालिका की पेयजल, पथ प्रकाश सहित अन्य सुविधाएं मिल जाएंगी, मगर ऐसा नहीं हो सका। पड़ोस कॉलोनियों में सभी प्रत्याशी वोट मांगने आते हैं। तब हम लोग बेगाने लगते हैं।
जियाउल रहमान- कांशीराम कॉलोनी।
4
कॉलोनी में सभी सुविधाएं यहां के निवासियों ने आपस में मिल जुलकर की है। कॉलोनी की सड़क, स्ट्रीट लाइट सभी व्यवस्थाएं उनकी हैं। वह शहर में रहते हैं, लेकिन अधिकृत तौर पर देहाती हैं।
मंजू कोकिला-वसुंधरा कॉलोनी।
5
यह शहर की सबसे अच्छी कॉलोनी हैं, मगर यहां के निवासियों का दुर्भाग्य है कि वह ग्राम पंचायत नौगवां के निवासी माने जाते हैं। यह उनके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रेखा बाजपेई-वसुंधरा कॉलोनी।
6
वसुंधरा कॉलोनी शहर की आदर्श कॉलोनी है। यह शहर के जनप्रतिनिधि स्वीकार करते हैं, लेकिन इसे नगर पालिका परिषद क्षेत्र में लाने का किसी ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया, जिससे कॉलोनीवासियों के साथ अन्याय हुआ है।
अनामिका त्रिपाठी।
वर्जन
पालिका दायरे में आने वाले लोग ही स्थानीय नगर निकाय चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। शेष को मताधिकार की परमीशन नहीं होगी। पालिका बोर्ड में इसका प्रस्ताव हुआ या नहीं अथवा इन कॉलोनियों को सम्मिलित क्यों नहीं किया जा सका, इसका अध्ययन किया जाएगा।
डॉ एमएम खान-सिटी मजिस्ट्रेट।

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