यह मिनरल वाटर नहीं, ठंडा पानी है जनाब

Pilibhit Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। शहर में ठंडे पानी की सप्लाई केन में भरकर की जा रही है। अधिकांश लोग इसे मिनरल वॉटर समझकर खरीदते हैं। हकीकत में यह मिनरल वॉटर नहीं होता। इस पानी को खरीदने के पीछे वजह होती है, डॉक्टरों की सलाह। हकीकत में पेट रोग जनित बीमारियों के मरीजों को डॉक्टर मिनरल वॉटर पीने की सलाह दे रहे हैं। आरओ लगवाना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है। ऐसे में शहर में केन भरकर सप्लाई किया जाने वाला पानी लोगबाग खरीद रहे हैं।
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जानकार बताते हैं कि इस पानी को मिनरल वाटर समझकर खरीद रहे हैं तो आप बड़ी गलती कर रहे हैं। हां, यह से फिलटर कर फ्रीजर से तैयार वॉटर जरूर होता है।
बता दें, शहर में 10 से 15 रुपये रोज पर ठंडे पानी की केन घरों और प्रतिष्ठानों तक पहुंचाई जाती है, जिसमें 10 लीटर पानी होता है। आप खुद सोच सकते हैं कि 10 से 15 रुपये में मिनरल वॉटर की केन घर बैठे मिलने मात्र से ही इस पानी की गुणवत्ता को सवालों में ला देता है। वजह है पानी प्लांट में तैयार करने से लेकर घरों तक पहुंचाने में ही काफी व्यय हो जाता है। ऐसे में इतना सस्ता मिनरल वॉटर उपलब्ध करा पाना संभव नहीं लगता। कुछ पानी सप्लायर इसे फिल्टर वॉटर कहकर तो कुछ प्यूरीफाई बताकर सप्लाई कर रहे हैं। शहर में पानी की स्थिति पर नजर डालें तो कहीं आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है तो कही फ्लोराइड जैसे अन्य तत्वों के कारण नुकसानदायक है। पानी किसी बर्तन में भरकर रखा जाए तो कहीं उस पर तेल की पर्त आ जाती है तो कहीं बर्तन में सफेदी जम जाती है। डॉक्टरों का कहना है, पीलीभीत में पानी इतना दूषित है, जिसे बिना शुद्धीकरण पीना रोगों को दावत देने के समान है। यही वजह है डॉक्टर लोगों को घर में आरओ लगवाने की सलाह देते हैं।
आरओ लगवाना आम आदमी के जेब पर भारी पड़ता है, जिससे लोग पानी सप्लाई करने वाले प्लांटों के सहारे हैं। शहर में पानी सप्लाई के लिए आठ प्लांट लगे हैं। शहर में गंगोत्री, इंडियन वॉटर, मर्थफूल और रियल फ्रेश समेत पांच प्लांट हैं। कुछ का दावा है कि उनके यहां आरओ सिस्टम से शुद्ध पानी तैयार किया जाता है, जबकि कुछ फिल्टर वॉटर का दावा करते हैं।
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मौसम के अनुसार रहती है डिमांड
शहर में औसतन 20 से 25 हजार लीटर पानी की सप्लाई निजी प्लांटों से नियमित रूप से की जाती है। यह सप्लाई के मौसम के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है। गर्मियों और शादी-ब्याह के मौसम में यह सप्लाई दो से तीन गुनी तक हो जाती है। सर्दियों में मांग काफी कम होती है।
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क्या कहते हैं डॉक्टर
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अशुद्ध पानी के कारण बढ़ रहे रोगी 3
शहर समेत पूरे जिले में आर्सेनिक, लेड और फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से रोग बढ़ रहे हैं। आलम यह है कि हर तीसरी मरीज पेट रोगी है, जिससे उसे अनेक बीमारियों फैल रही हैं, इसलिए हर किसी को निरोगी रहने के लिए प्यूरीफाई पानी ही पीना चाहिए। इसके लिए आरओ लगवाना चाहिए। यदि आरओ नहीं लगवा सकते तो हैंडपंप की बोरिंग कम से कम 250 से 300 फिट पर होनी चाहिए।
डॉ राजीव अग्रवाल, डाइरेक्टर-शारदा अस्पताल।
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शुद्ध पानी न पीने के कारण फैल रही बीमारियां
शहर में पानी में भौतिक, रासायनिक और जैविक मुख्यत: तीन प्रकार की कमियां हैं। भौतिक से तात्पर्य है, पानी का साफ न होना। रासायनिक मतलब कम गहराई जैसे 30-40 फिट और 120 एवं 140 फिट की बोरिंग वाले हैंडपंप से आने वाली पानी में लेड, आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से लोगबाग रोगी हो रहे हैं। जैविक से तात्पर्य जगह-जगह पाइप लाइन फूटी होने के कारण लोगबाग जीवाणुयुक्त पानी पी रहे हैं।
डॉ शैलेद्र गंगवार, फिजीशियन।
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यह है पानी की शुद्धता का मानक
पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक मिलीग्राम प्रतिलीटर होनी चाहिए, जबकि पीलीभीत जिले में इसकी मात्रा तीन से छह मिलीग्राम प्रति लीटर है। इस प्रकार आर्सेनिक की मात्रा .05 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह इसकी मात्रा 1 से 2.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
वर्जन
नहीं है नमूने लेने का प्राविधान
सीलबंद बोतलों में बिकने वाले पानी के ही नमूने लेने का प्राविधान है। शहर में सप्लाई होने वाले पानी के नमूने लेने का कोई नियम नहीं है। पानी को शुद्ध करने के लिए निजी तौर पर जो प्लांट लगे हैं। उनके पानी को लेकर यदि कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच की जाएगी और उसे लैब परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। परीक्षण में वह पानी अशुद्ध मिलता है तो प्लांट संचालक पर धोखाधड़ी करने और दूषित पेयजल आपूर्ति करने की कार्रवाई की जाएगी।
वाईके त्रिवेदी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी-पीलीभीत।
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