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डिप्थीरिया से बचाव को संसाधन तो हैं पर दवाई नहीं

Pilibhit

Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
बरसात करीब, डिप्थीरिया से बचाव के इंतजाम तक नहीं
वायरल इंफेक्शन से होता है डिप्थीरिया
सरकारी आंकड़ों में डिप्थीरिया का रोगी नहीं

पीलीभीत। बरसात सिर पर है। इन दिनों खासतौर पर डिप्थीरिया रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। जिला अस्पताल में डिप्थीरिया रोग से निपटने के लिए संसाधन तो हैं, लेकिन दवाइयां नहीं हैं। खास बात तो यह है कि सरकारी आंकड़ों में चार साल के भीतर जिले में एक भी डिप्थीरिया रोगी नहीं पाया गया है।
डिप्थीरिया जानलेवा बीमारी है। वायरल के इंफेक्शन से होती है, जो खासतौर पर बरसात में फैलती है। जरा सी असावधानी बरतने पर आगे चलकर यह बीमारी आपके बच्चों को जानलेवा हो जाती है। वैसे जिले में तो कई डिप्थीरिया के रोगी है, लेकिन जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करे तो जिले में तीन साल से एक भी रोगी डिप्थीरिया से ग्र्रसित नहीं मिला है।
हालांकि जिला अस्पताल में डिप्थीरिया इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ की भी हैं। इसके अलावा ऑपरेशन की भी व्यवस्था है, लेकिन अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऑपरेशन की व्यवस्था तो है पर न यहां पर न दवाएं हैं और न रोगी डिप्थीरिया जानलेवा बीमारी है। डिप्थीरिया के शिकार लोगों को एंटी डिप्थीरिया सीरम (एडीएस) लगाया जाता है, लेकिन यह एडीएस काफी लंबे समय से जिला अस्पताल के पास उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में ट्रैकियोस्टोमी सर्जरी की व्यवस्था है और इसके लिए ईएनटी सर्जन डॉ सुनील कुमार मित्रा की तैनाती भी है। हकीकत में तमाम डिप्थीरिया रोगी जिले में हैं, लेकिन आंकड़े इसके उलट हैं। जिले के आंकड़ों के मुताबिक चार सालों में कोई डिप्थीरिया रोगी नहीं पाए गए हैं।

शिशु जन्म के डेढ़ माह पर लगवाएं टीका
डॉक्टरों के मुताबिक अपने बच्चे को डिप्थीरिया रोग से बचाने के लिए जरूरी है कि डीपीटी का टीका शिशु के जन्म लेने के डेढ़ माह पर पहला ढाई माह पर दूसरा और तीसरा टीका लगाया जाता है।

चार सालों में नही मिले मरीज
स्वास्थ्य महकमे के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में चार वर्षों में एक भी डिप्थीरिया का रोगी नहीं मिला जबकि हकीकत तो यह है कि जिले में इस रोग के कई पीड़ित हैं जो निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

लक्षण
0 काली खांसी और बुखार आता है। रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है। गले में रुधन का आभास होता है।
बचाव
0 अपने घर के आसपास गंदगी इकट्ठा न होने दें।
0 शिशु के जन्म लेने के बाद समयानुसार डीपीडी का टीका अवश्य लगवाएं
0 श्वसन तंत्र में दिक्कत, गले में रूधन और बुखार के साथ काली खांसी अगर आती है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं

वर्जन

अस्पताल में डिप्थीरिया की सर्जरी के लिए डॉक्टर भी तैनात हैं और ट्रैकियोस्टोमी सर्जरी की व्यवस्था भी है। चार साल के भीतर इसके रोगी नहीं मिले हैं। इस वजह से दवाओं उपलब्ध नहीं हैं।
आरआर गहलौत, सीएमएस।
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