गुम होने से बचाएं कोमल लताएं, परिंदों का कलरव

Pilibhit Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। घने वृक्ष, हरी-हरी कोमल लताएं। पक्षियों का कलरव और जानवरों की जंगल में उठती तरह -तरह की आवाजें। प्राकृतिक सौंदर्य का इससे बेहतर नजारा और क्या हो सकता है। अपने जिले में सैकड़ों एकड़ में फैला जंगल अपने में यह तमाम खूबियां समेटे हैं। इस पर कहीं लकड़ी चोर और कहीं वन्य जीवों के हत्यारे नजरें गड़ाए हैं। मौका मिलते ही अपने मंसूबों में सफल होकर पर्यावरण संरक्षण को गहरी चोट पहुंचाते हैं। जंगल के अलावा भी समय पर होने वाले पौधरोपण की पर्याप्त देखभाल नहीं हो पाती। नदियां प्रदूषण से भरी पड़ी हैं। पॉलीथिन का इस्तेमाल पर्यावरण को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के नाम कुछ संगठन समय समय पर चर्चा परिचर्चा करके अपना दायित्व पूरा कर लेते हैं। क्या इतने ही से पर्यावरण संरक्षण की परिकल्पना साकार हो सकेगी। इस पर मंथन कर लेने भर से कोई सार्थक पहल का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
पीलीभीत में पर्यावरण संसाधनों में कोई कमी नहीं है। इसके रख रखाव में कमी का फ ायदा हरियाली के दुश्मन उठाते हैं। यही वजह है कि पेड़ों का कटान होने के मामले अक्सर प्रकाश में आते रहते हैं। इन पर अंकुश के लिए वन विभाग की टीमें निगरानी करती हैं। यह अलग बात है कि कहीं न कहीं चूक हो जाने से हरियाली के दुश्मन अपने नापाक इरादों मे कामयाब हो जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ संगठन समय समय गोष्ठियों में चर्चाएं करते हैं। बात इससे आगे नहीं बढ़ पाती। पौधारोपण अभियान चलते हैं मगर पौधों की देखभाल नहीं हो पाती। जिससे सैकड़ों पौधे जवान होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
पर्यावरण प्रेमियों को महाराष्ट्र के रायगढ़ निवासी भरत मंसाता, असम के जोराहाट निवासी जादव पायेंग और उत्तराखंड के चमोली निवासी नारायण सिंह नेगी सरीखे लोगों का अनुसरण करना चाहिए। यह वह लोग हैं जिन्होंने सैकड़ों एकड़ में वन संपदा को संरक्षित करने में अपना जीवन लगा दिया है।
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विकसित होंगी हरित पट्टियां
सामाजिक वानिकी प्रभाग ने इस बार बीसलपुर की खारजा नहर में दो हेक्टेयर क्षेत्र और पूरनपुर के कली नगर ब्रांच में पांच हेक्टेयर क्षेत्र को हरित पट्टी के रूप में विकसित करने की कार्य योजना बनाई है। सामाजिक वानिकी के प्रभागीय वनाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि इन क्षेत्रों में वृहद पौधारोपण करने की योजना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 में तीनों तहसील क्षेत्रों के सड़क व नदी किनारे 57 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण और नेहरू पार्क में सौंदर्यीकरण कराने की योजना है।
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पर्यावरण संरक्षण में सुधार का संकल्प
समाज सुधार समिति पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया नाम है। समिति के संस्थापक एमआर मलिक एडवोकेट बताते हैं कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को काम करना समिति का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को पाने के लिए शुद्ध रूप से पर्यावरण प्रेमियों को समिति से जोड़कर कार्ययोजना तैयार की गई है। श्री मलिक बताते है कि ईट भट्टों की आड़ में अवैध खान से लेकर नदियों और पोखरों की सफाई व रख रखाव के लिए समिति काम कर रही है।

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