आसान नहीं बाघ को ट्रैंकुलाइज करना

Pilibhit Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत/पूरनपुर। बाघ कोई बकरी नहीं जिसे चट पकड़ लिया जाए। दिल्ली से आए ट्रैंकुलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. देवेंद्र चौहान के मुताबिक बाघ को पकड़ने में एक दिन भी लग सकता है और एक पखवाड़ा भी।
कढ़ेरचौरा का बाघ वनकर्मियों और पकड़ने आए एक्सपर्ट के लिए पहेली बन गया है। कभी वह पिंजरे के पास आता है और बकरी को निवाला बनाकर चला जाता है। एक बार ट्रैंकुलाइज करने के लिए निशाना भी साधा गया तो बाघ साफ बच निकला। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की एहतियात बरती जा रही है कि न तो बाघ को नुकसान हो और न ही यहां के बाशिंदों को। हालांकि रविवार की रात बाघ की रखवाली कर रहे एक ग्रीमीण को बाघ ने और घायल कर दिया है।
डॉ. चौहान ने बताया कि बाघ को कितनी दूरी से ट्रैंकुलाइज करना है और कितना भारी इंजेक्शन देना है, इसका ध्यान रखना पड़ता है। बाघ को इस तरह से बेहोश करना है कि उसके कोई चोट न लगे साथ ही उसके व्यवहार में परिवर्तन न हो। पुन: जंगल में छोड़ने पर वह अपने को उस माहौल में आसानी से ढाल ले। बाघ को अनावश्यक छेड़ने से उसके और खूंखार होने का डर रहता है। आम जन को बाघ कोई नुकसान न पहुंचा सके इसका ख्याल भी रखा जाता है। उधर पर्यावरणविद टीएच खान का कहना है कि पिंजरों की संख्या बढ़ाई जाए तो बाघ को पकड़ने में आसानी होगी। टीम के सदस्यों की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत है। वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खां कहते हैं कि बाघ को बेहोश करना आसान नहीं होता। थोड़ी सी चूक बाघ के लिए जानलेवा हो सकती है।
गौरतलब है कि कढे़रचौरा इलाके में लगभग छह महीने से इस बाघ ने आतंक मचा रखा है। अनुमति मिलने के बाद इसे ट्रैंकुलाइज करने के लिए पहले दुधवा नेशनल पार्क के एक्सपर्ट ने मोर्चा संभाला। सफलता नहीं मिली तो फिर लखनऊ और दिल्ली से भी विशेषज्ञ बुलाए गए। कढ़ेरचौरा में दो पिंजरे भी लगाए गए हैं। बाघ एक बार पिंजरे में बंधी बकरी को चट कर गया लेकिन लीवर खराब होने के कारण कैद होने से बच गया। अब वह पिंजरे के आसपास कम ही फटक रहा है। उधर वन कर्मी और एक्सपर्ट की चौकसी को धता बताकर रविवार की रात बाघ ने बाग की रखवाली कर रहे एक व्यक्ति को घायल कर दिया।

बहादुरी से किया बाघ से मुकाबला
ग्रामीण पर बाघ का हमला, लहूलुहान किया
गुस्साए लोगों ने किया आसाम हाइवे हाइवे जाम

पूनरपुर। कढ़ेरचौरा के रूपलाल के बाग की रखवाली कर रहे 42 वर्षीय विकलांग छोटेलाल और 50 वर्षीय प्रभूदयाल रविवार रात जब गहरी नींद में सो रहे थे, तभी उन पर बाघ ने हमला कर दिया। बकौल छोटेलाल उसने बाघ के दोनों पैर पकड़ लिए। बाघ ने उसके पैर, कंधे समेत कई जगह मुंह और नाखून मारकर लहूलुहान कर दिया। प्रभूदयाल ने भी हिम्मत जुटाकर बाघ पर लाठी से वार किया। शोर और प्रतिरोध पर बाघ पीछे हटा और जंगल में विलुप्त हो गया।
प्रभूदयाल ने बाघ के फिर से हमले की डर से मशाल जलाई और उसी के सहारे घायल छोटेलाल को गांव ले गया। छोटेलाल को सीएचसी में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार छोटेलाल के सिर पर भी नाखून के हल्के निशान हैं। शरीर पर कई जगह जख्म हैं। सामाजिक वानिकी के रेंजर हसीब बेग ने भी छोटेलाल पर बाघ के हमले की तस्दीक की। इधर बाघ के हमले की सूचना से गुस्साए लोग सोमवार को बाग के समीप इकट्ठा हो गए। उन्होंने हाइवे पर जाम लगाकर वन अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते ट्रैंकुलाइज टीम मौके पर नहीं जा सकी। करीब दो घंटे बाद पुलिस इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह यादव ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझा कर जाम खुलवा दिया। देर शाम बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के प्रयास जारी थे।
शाम को प्रमुख वन संरक्षक विकास वर्मा ने मौके पर पहुंचकर बाघ को पकड़ने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बाघ के हमले से घायल छोटेलाल के इलाज को प्रभागीय निदेशक अरविंद सिंह ने ढाई हजार रुपये दिए हैं। यह रकम छोटेलाल के परिजनों को सौंप दी गई है।

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