रेत उठाने से बढ़ रही शारदा की धार की चौड़ाई

Pilibhit Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
माधोटांडा। जहां एक ओर नौजल्हा नकटहा में शारदा के दाएं किनारे पर करोड़ों रुपयों की लागत के बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराए गए । वहीं दूसरी ओर दाहिने किनारे पर ही बोरों में भरी जा रही रेत से नदी की धार गहरी और चौड़ी हो रही है।
शारदा नदी के दाएं किनारे पर नौजल्हा क्षेत्र में बाढ़ खंड ने नौ ठोकरों का कार्य शुरू कराया है। ठोकरों में सीमेंट के खाली बोरों में रेत भरकर लगानी है। एक-एक ठोकर में कम से कम एक-एक लाख सीमेंट के बोरों में रेत भरकर लगाया जाना है और स्पर के ऊपरी हिस्से में चारो ओर व ऊपरी तल पर जीओ बैगों में रेत भरकर लगाना है। इन बैगों को विभाग ठेकेदारों को उपलब्ध कराएगा। इधर, जिस स्थान पर ठोकरें बनाई जानी हैं उसके सामने ही नदी में बोरों में रेत भरना शुरू करवा दी है। इससे यहां बड़े गड्ढे हो जाएंगे और नदी की धार की चौड़ाई भी पुन: बढ़ेगी साथ ही पानी की तेज धार से यहां करोड़ों की लागत से कराया जा रहा बाढ़ नियंत्रण कार्य भी शारदा की भेंट चढ़ सकता है। इस संबंध में सहायक अभियंता बाढ़ खंड एके सिंह ने बताया कि नदी से ही रेत उठाने का प्रावधान है। इसको लेकर जहां ठोकरें बनाई जा रही है। उसी नदी से रेत भरवाई जा रही है। गड्ढे होने से कोई नुकसान नहीं होगा।
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एक करोड़ से स्पर पर होंगे निर्माण
माधोटांडा। नौजल्हा नकटहा में वैसे तो मनरेगा से तीन ठोकरें बनाई गई थी और सीआरएफ के धन से नौ ठोकरें बनाई जा रही है। इसके बावजूद बाढ़ खंड को यहां नदी के कटान रोकने में खतरा दिख रहा है। इसके चलते एक करोड़ की लागत का अलग से टेंडर किया गया है। कटान से सुरक्षा हेतु स्पर संख्या एक, दो और तीन पर परक्यूपाइन निर्माण एवं लगाने का कार्य तथा क्यूनिक निर्माण कराया जाएगा। यह कार्य विशेष सचिव सिंचाई के दौरे के बाद सर्वे कराने का प्रोजेक्ट बजट मंजूरी को भेजा गया है। नदी के बाएं किनारे पर हजारा शास्त्रीनगर समूह की बाढ़ सुरक्षा योजना के स्पर संख्या वी वन की पुन: स्थापना को अस्सी लाख की लागत से और नहरोसा राजीव नगर बाढ़ सुरक्षा हेतु पचास लाख की लागत से जीओ बैग में लोकल सेंट भरकर लगाने, परक्यूपाइन निर्माण व लगाने का कार्य अलग से कराया जायेगा।

..तो बदल सकती है नदी की दिशा
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माधोटांडा। जानकार बताते हैं कि क्षतिग्रस्त पत्थर की ठोकरों की मरम्मत कराकर उसे ऊपर उठाना और स्परों के पीछे क्यूनिक का रूप ले रहे भाग को बंद कराना चाहिए था। क्योंकि वहां पर बोरों में रेत भरकर स्पर बनाए जा रहे हैं। शारदा पहाड़ी नदी है। यहां उसके पानी की गति तेज होती है। ऐसे में यदि क्यूनिक की चौड़ाई कटान से बढ़ गई तो बाढ़ नियंत्रण कार्य तो नदी की भेंट चढ़ेगा ही साथ ही नदी की दिशा बदल सकती है। जिससे सनेडी मार्जनल बांध, बनी ठोकरें और शारदा डाम के अस्तित्व को भी खतरा हो सकता है।

क्षमता बढ़ाने को शुरू हुआ चिन्हीकरण
अमर उजाला नेटवर्क
माधोटांडा। नहरों में पानी की क्षमता बढ़ाने तथा उसके क्षतिग्रस्त किनारों को मजबूत करने को सिंचाई विभाग ने शुरुआत की है। चौड़ाई बढ़ाने को पेड़ कटवाने को चिन्हीकरण शुरू किया गया है।
वर्ष 1926 बिट्रिशकाल की बनी वाइफरकेशन सिंचाई परियोजना हेड वर्क्स डिवीजन शारदा नहर खंड बरेली के अधीन है, जिसके सहायक अभियंता का मुख्यालय वाइफरकेशन में है। यहां शारदा मुख्य नहर से सिंचाई को पानी लाया गया है तथा यहां से हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच, निगोही ब्रांच और शारदा डाम में पानी के भंडार की व्यवस्था की गई है। इससे प्रदेश के एक दर्जन से अधिक जिलों की लाखाें एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। रख रखाव और मरम्मत के अभाव में शारदा मुख्य नहर सहित कई नहरों की हालत जर्जर होने लगी है। जगह-जगह कैटल घाट न बने होने से जंगल क्षेत्रों में पशु गौढ़ियों के जानवर शारदा मुख्य नहर में पानी पीने घुसते हैं। उससे नहर की पटरियाें की किनारी कमजोर हो गई तथा कई स्थानों पर सालों से सिल्ट सफाई न होने से नहर की चौड़ाई कम हो गई। कई स्थानोें पर वृक्ष उग आए। इधर, नहरों की मरम्मत को अधिशासी अभियंता रामदत्त यादव ने सर्वे कराकर प्रोजेक्ट बनवाए है। जहां नहर की चौड़ाई कम हो गई है। वहां चौड़ाई बढ़ाने को वृक्षों की गिनती कराई जा रही है ताकि वन विभाग से मूल्यांकन कराकर उसका नीलाम कराया जा सके। नहर की पटरियों को मजबूत करने को मिट्टी का कार्य कराया जाना है।

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