गंदा पानी, उड़ती राख और चौपट फसलें हैं दो गांवों की तकदीर

Pilibhit Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। आज पर्यावरण दिवस है। पर्यावरण को शुद्ध रखने को बड़ी-बड़ी बातें होंगी, लेकिन ज्योहरा कल्यानपुर और मछवाखेड़ा गांववालों के घावों पर इस बार भी कोई मरहम लगने की उम्मीद नहीं। अब तो बदबूदार रसायनयुक्त पानी, उड़ती राख और चौपट फसल ही इनकी तकदीर बन गई है।
शहर से 19 किलोमीटर दूर बीसलपुर रोड पर स्थित मछवाखेड़ा में एक दशक पहले बरखेड़ा चीनी मिल खुली। लोगों को उम्मीद बंधी कि उन्हें रोजगार मिलेगा और इलाके का विकास होगा। तब हर चेहरे पर खुशी थी। अब हालात यह हैं कि इन दोनों गांवों के चारों तरफ लगे ढेरों से उड़ती राख ने सांस लेना तक दूभर कर दिया है। मिल से निकला बदबूदार पानी खेतों में पहुंच रहा है। अभी मिल नहीं चल रही है, लेकिन पानी खेतों में भरा है। इन खेतों में कोई फसल नहीं उगाई जा सकती। साथ ही जगह-जगह से लीक हो चुकी पाइप लाइन से भी खेतों में पानी भरता है। फसल बर्बाद हो रही है। कई खेत तालाब बन चुके हैं। कुल मिलाकर बदबूदार पानी और उड़ती राख ने इन दोनों गांवों के अलावा बरखेड़ा कसबे में भी प्रदूषण फैला रखा है, लेकिन इस ओर न तो मिल प्रबंधन को फिक्र है और न ही प्रशासन को ध्यान ।
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खुली पाइप लाइन से खतरा
पाइप लाइन में पानी न रुके इसके लिए मिल प्रबंधन ने जगह-जगह गड्ढे छोड़ रखे हैं ताकि इसकी नियमित सफाई हो सके, लेकिन इन गड्ढों से जानवरों और बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है।
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इस तरह जा रहा खेतों में पानी
मिल से पानी दूर ले जाने को 400 मीटर पाइप लाइन बिछाई गई है।मिल वालों ने 2006 में पेराई सत्र में पानी छोड़ने को सुमेर का खेत एक साल को लिया था। एग्रीमेंट खत्म हो चुका है।

क्या कहते हैं किसान
डेढ़ बीघा खेत हुआ बर्बाद
ज्योहरा कल्यानपुर के कैलाश बाबू कहते हैं कि मिल का गंदा पानी खेत में भरा है। अब इसमें कोई फसल नहीं उगती। उसने तहसील दिवस में शिकायत की, सुनवाई नहीं हुई है।
कैसे उगाए फसलें
सुमेर लाल कहते हैं कि पानी छोड़ने को 2006 में खेत मिल ने एक साल को लिया था। बाद में उन्होंने नहीं छोड़ा। रसायनयुक्त पानी भर गया है। फसल कैसे उगाए, यह समस्या है।
बर्बाद हो जाती है फसल
परमेश्वरी दयाल खेत बटाई पर लिया था। जब से मिल चालू हुई तब से खेत में मिल का पानी भरने से फसल चौपट है। वह समस्या डीएम के आगे रख चुके हैं, निदान नहीं हआ।
मर चुकी है भैंस
गांव मछवाखेड़ा के लालता प्रसाद जाटव का कहना है, उसकी भैंस मिल के रसायुक्त पानी में गिरने से मर चुकी है। खेत गंदे पानी से लबालब है। फसलें नहीं होतीं। सुनवाई नहीं हुई है।
वर्जन
मिल बंद है। पानी जाने का कोई मतलब नहीं। पानी दूर ले जाने को पाइप लाइन नाले से जोड़ी गई। खेतों में पानी भरने का पता है। राख उड़ने की समस्या को निपटाने की कोशिश जारी है।
वीरपाल सिंह, यूनिट हेड - बजाज चीनी मिल-बरखेड़ा
राख की समस्या संज्ञान में नहीं है। है, इसकी जांच की जाएगी। फसलें चौपट होने , राख उड़ने का मामला गंभीर है। इस समस्या का तत्काल समाधान किया जाएगा।
राजशेखर, जिलाधिकारी-पीलीभीत।

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