जख्मी परिंदों की मानिंद फड़फड़ा रहे रोगी

Pilibhit Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। आवश्यक सेवाओं पर भी बिजली की कि ल्लत का व्यापक असर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में बजट के अभाव में ज्यादा जरूरत होने पर ही जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है। आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीजों के तीमारदार हाथ के पंखों से अपने मरीजों की सेवा कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में बिजली कटौती से खर्च काफी बढ़ गया है। इस खर्च को मरीजों के बिलों में समाहित किया जा रहा है। महिला व प्रसूति ग्रहों पर भी बिजली कटौती का असर है। बिजली कटौती कारोबार को भी प्रभावित कर रही है।
अस्पतालों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। अपने जिले में इस आदेश का उल्लंघन काफी समय से हो रहा है। रामलीला मैदान स्थित विद्युत उपकेंद्र से निकलने वाले अस्पताल फीडर पर सामान्य दिनों में भी सबसे अधिक समस्याएं आती हैं। इन दिनों बिजली लाइनों पर होने वाले फाल्ट और व्यापक कटौती से अस्पताल जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं । आपातकालीन कक्षों में भर्ती मरीजों को गर्मी से राहत पहुंचाने को उनके तीमारदार बिजली गुल होने पर पंखा झलते हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ आरआर गहलोत का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर के लिए ढाई केवीए का एक जनरेटर अतिरिक्त है। जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल होता है। ब्लड बैंक का फ्रीजर चलाने को 10 केवीए के जनरेटर का इस्तेमाल कूलिंग कैपेसिटी घटने पर किया जाता है। पैथॉलॉजी विभाग में सैंपल जमा होने और पांच सात एक्स-रे रोगी एकत्र होने पर एक साथ सब काम निपटाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल परिसर में बिजली आपूर्ति के लिए 62.5 केवीए जनरेटर है। बिजली न रहने पर पूरे समय इस जनरेटर का इस्तेमाल बजट न होने के कारण नहीं हो पा रहा है। रोगी कल्याण समिति से आर्थिक सहयोग लेकर छोटे जनरेटरों से काम चलाया जा रहा है।
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सेवाओं को अतिरिक्त बोझ
चंद्रा हार्ट सेंटर के डॉक्टर महेश चंद्र बताते हैं कि बिजली कटौती के समय जनरेटर का खर्च काफी बढ़ गया है। भीषण गर्मी में बिजली के उत्पादन की कमी के कारण हो रही कटौती का प्रभाव हर वर्ग पर पड़ रहा है। चिकित्सा सेवाओं को बेहाल रखने को डीजल का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। मरीजों से इसका कोई सरचार्ज नहीं लिया जाता।
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सीजन में काम हो रहा चौपट
फ्रिज मैकेनिक भूपेंद्र सिंह का कहना है कि बिजली कटौती के कारण काम ठीक से नहीं हो पा रहा है। जो काम एक दिन में होना चाहिए, उसमें तीन से चार दिन लग रहे हैं। ग्राहकों से वायदा खिलाफी हो रही है। समय से काम न दे पाने के कारण आय भी घट रही है। बढ़ती महंगाई में घटती आय समस्या को बढ़ा रही है।
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प्रभावित हो रहा है कारोबार
जय जयराम प्रेम कुमार तेल मिल चलाने वाले प्रेम कुमार बताते हैं कि दोपहर में दो बजे से बिजली कटौती होने के कारण शाम तक लेवर खाली बैठी रहती है। उत्पादन घट रहा है। खर्च बढ़ रहा है। रात में लेवर को ओवर टाइम देना पड़ता है। इससे अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है। दिनचर्या भी पूरी तरह से प्रभावित हो रही है।
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समय से पूरा नहीं हो पा रहे आर्डर
वेल्डिंग करने वाले मतलूब कहते हैं कि कटौती का उनके कारोबार पर व्यापक असर पड़ा है। कोई आर्डर समय से पूरा नहीं हो रहा है। बिजली के समय जितना काम होता है उससे लेवर का खर्च भी नहीं निकलता। खर्च काफी बढ़ गया है।
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बढ़ता जा रहा है खर्च
आटा चक्की चालक मुकेश कुमार कहते हैं कि बिजली कटौती में कारोबार चौपट कर दिया है। काम आधा नहीं रहा है। महंगाई में आमदनी लगातार घट रही है। कारखाने का खर्च निकलना मुश्किल है। सरकार इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही है।

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