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बाघ पकड़ने गई लखनऊ की टीम को घेरा

Pilibhit Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत-पूरनपुर। कढे़रचौरा के समीप जंगल में बाघ को पकड़ने गए ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट और तमाम वनाधिकारी बाघ को बेहोश करने में नाकाम रहे। वह मौके से लौटने लगे तो बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग कर रहे लोगों ने उनको घेर लिया। गुस्साए ग्रीमीणों ने हाईवे जाम कर दिया। जाम में तमाम वाहन फंस गए। स्थिति बिगड़ती देख टीम को फिर मौके पर जाना पड़ा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर जाम खुलवाया।
पूरनपुर के कढ़ेरचौरा के आसपास बाघ देखे जाने से ग्रामीण भयभीत हैं। बाघ को पकड़ने के लिए लखनऊ से ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट डब्ल्यूटीआई के डॉ. सौरभ सिंधवी, डब्ल्यूटीआई के ही प्रेमचंद पांडेय सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक एके सिंह, एसडीओ गजेंद्र सिंह, रेंजर हसीब बेग आदि सुबह करीब पांच बजे कढ़ेरचौरा के समीप झुकना पुल के नीचे पहुंचे। इससे पहले पूरी रात बाघ की कर्मचारी बाघ की लोकेशन की टोह लेते रहे थे। बाघ के बेशर्म की झाड़ियों में होने की पुष्टि पर उसे चारों ओर से ट्रैक्टरों से घेर लिया गया। ट्रैंकुलाइज एक्सपर्ट ट्रैक्टर से झाड़ियों की ओर गए। इस दौरान दो बार बाघ झाड़ियों में इधर-उधर, छलांग लगाते देखा गया।
डॉ. सौरभ सिंधवी ने बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए हाथी की जरूरत बताई और दो घंटे बाद फिर से बाघ को पकड़ने की कोशिश करने की बात कहते हुए टीम के लोग वापस लौटने लगे। इस पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू कर आसाम रोड हाइवे पर करीब डेढ़ घंटे तक जाम लगा दिया। उत्तेजित लोग बाघ को ट्रैंकुलाइज किए बिना टीम को न जाने देने की चेतावनी दे रहे थे। आखिरकार टीम दुबारा बाघ को ट्रैंकुलाइज करने झाड़ियों में जा पहुंची। तब जाम खोला गया। टीम के घिरे होने की सूचना पर एसडीएम प्रेमकुमार, सीओ इकपाल सिंह मय फोर्स मौके पर पहुंचे। पुलिस अफसरों ने जाम खुलवा दिया। इसके साथ ही टीम वापस लौट गई।
सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक एके सिंह ने बताया कि टीम को बाघ ट्रैंकुलाइज करने को भेजा गया है। शीघ्र ही बाघ को ट्रैंकुलाइज कराया जाएगा।
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संसाधनों का रहा अभाव
टीम के पास संसाधनों का अभाव था। बाघ को ट्रेस करने के लिए न तो कोई मचान बनाया गया और न ही हाथी की व्यवस्था की गई। जो पिंजरा मंगवाया गया वह काफी छोटा था। घंटों बाद जिला मुख्यालय से बड़ा पिंजरा मंगवाया गया। बांस के मोटे डंडों पर त्रिपाल बांध कर स्ट्रेचर बनाया गया था।
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डेढ़ दर्जन से अधिक लगाए ट्रैक्टर
झाड़ियां काफी दूर तक होने पर कई ट्रैक्टरोें को एक तरफ से झाड़ियों को गिराने में लगाया गया था। झाड़ियाें को ट्रैक्टर से कुचलने में करीब 22 ट्रैक्टर लगाए गए।
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रात को झाड़ियों में पहुंचा था बाघ
गांव कढे़रचौरा के अलावा बाघ का आतंक गांव नदहा, पड़रिया, भायपुर समेत क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों में भी है। रेंजर हसीब बेग ने बताया कि बाघ दो दिनों से गांव पड़रिया के आसपास देखा जा रहा था। रात करीब साढ़े तीन बजे नवदिया नदी किनारे झुकना के पुल के नीचे झाड़ियों में पहुंचा। इसकी जानकारी बाघ के पगमार्क से भी हुई।
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शिकार लगाकर बाघ किया जाएगा ट्रैंकुलाइज
डब्ल्यूटीआई के डॉ. सौरभ सिंधवी ने बताया कि अब बाघ को शिकार लगाकर ट्रैंकुलाइज किया जाएगा। झाड़ियों के दोनों ओर बाघ के लिए शिकार के रूप में पशु को बांधा जाएगा। बाघ शिकार के बाद पानी पीने नाले में पहुंचेगा तब या फिर शिकार को करीब चार घंटे बाद खाने को पहुंचने पर ट्रैंकुलाइज कर लिया जाएगा।
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मानव और वन्य जीव दोनों रहें सुरक्षित
सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक एके ने बताया कि आपरेशन बंद नहीं किया गया है। मानव और वन्य जीव दोनों सुरक्षित रहें ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।

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