विज्ञापन

एक ही क्षेत्र में दो बाघों के शव मिलने से विशेषज्ञ हैरान

Pilibhit Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
पीलीभीत। जंगल में बाघों के अपने-अपने इलाके (टेरिटरी) होते हैं। एक के इलाके में दूसरा बाघ नहीं जाता। ऐसी घटना हो सकती है लेकिन अपवाद के तौर पर। शिकार करने के बाद बाघ पहले उसका खून पीता है, फिर नम मिट्टी चाटकर पानी पीता है। वह अपने शिकार को कई बार में खाता है। बाघ को मारने वाले इन्हीं तीन चीजों में जहर मिलाते हैं। जहर खाते ही बाघ के शरीर में इतनी तेजी से परिवर्तन होता है कि वह दो-चार सौ मीटर के अधिक दूरी तय नहीं कर सकता और तड़पता हुआ मर जाता है।
विज्ञापन
बाघ अपराधों की 100 से अधिक जांचें कर चुके वन्य जंतु अपराध विशेषज्ञ और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ दिल्ली के सीनियर को-आर्डीनेटर राकेश कुमार सिंह का यह अनुभव है। वह यहां शनिवार की सुबह दो बाघों की मौत की जांच करने पहुंचे थे। पहले दिन वह जंगल में व्यस्त रहे। रविवार को अमर उजाला से एक अनौपचारिक भेंट में बाघ के जीवन के बारे में विस्तार से बताया। हरीपुर रेंज में घटनास्थल का जायजा लेने के बाद वह उलझन में पड़ गए कि आखिर एक ही इलाके में दो बाघ कैसे आ गए। गौरतलब है कि बाघों के दोनों शव लगभग 300 मीटर की दूरी पर मिले थे। उनके अनुसार यह एक अप्राकृतिक घटना है। जिस तरह एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकती, उसी तरह एक क्षेत्र में आम तौर पर दो बाघों का होना नामुमकिन होता है।
उनका दावा है कि पेशेवर लोग बाघ को मारने में इंडोसल्फान और सल्फाज का इस्तेमाल करते हैं। झारखंड समेत अनेक प्रांतों में पेशेवर शिकारी, बाघ द्वारा मारे गए जानवर के मांस में जहरीला पदार्थ डाल देते हैं, जिसे खाने पर बाघ के बचने की गुंजाइश नहीं रहती। जहर के पहुंचते ही बाघ का शरीर पैराइलाइसिस की स्थिति में आ जाता है और वह इससे बचने की कोशिश में लोटपोट हो जाता है।


‘प्वाइजनिंग’ पर टिकी बाघों की मौत की जांच
80 घंटे बाद भी वन अधिकारियों के हाथ खाली
जंगल को खंगालने में छूट रहा पसीना
अमर उजाला नेटवर्क
पीलीभीत। दो बाघों की मौत और पहले टाइगर के शव मिलने के 80 घंटे बाद भी वन अधिकारी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। फिलहाल उनकी जांच ‘प्वाइजनिंग’ के इर्द-गिर्द घूम रही है। वन जंतु अपराध विशेषज्ञ आरके सिंह के निर्देश पर मौके से एक किलोमीटर के दायरे को खंगाला जा रहा है। सूत्रों की माने तो अभी इतना इलाका नहीं खंगाला जा रहा है। क्षेत्र में उगी घनी घास के कारण इसे खंगालने में वन कर्मचारियों को पसीना छूट रहा है।
मालूम हो कि हरीपुर रेंज में 24 और 25 मई को क्रमश: दो बाघों के शव मिले थे। पहला बाघ बह रहे नाले से तो दूसरा महज 300 मीटर दूर जमीन पर मिला था। दो बाघों के शव मिलने से वन अधिकारी उनकी मौत जहर से होना मानकर जांच शुरू की है। मौके पर पहुंचे वन्य जंतु अपराध विशेषज्ञ और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ दिल्ली के सीनियर कोर्डीनेटर राकेश कुमार सिंह के अनुसार दोनों शवों से एक किलोमीटर की परिधि में उनकी मौत के प्रमाण स्वरूप कुछ भी मिल सकता है। उनका मानना है कि जहर से मौत की स्थिति में इस दायरे में मांस के अवशेष, पानी का स्रोत अथवा नम मिट्टी होना तय है। इनमें से एक भी चीज मिलने पर उसे जांच के लिए भेजा जा सकता है, क्योंकि इन्हीं तीनों में से एक में जहर मिलाकर बाघ को मारा जा सकता है। डीएफओ वीके सिंह के निर्देशन में जंगल खंगाला जा रहा है। डीएफओ के अनुसार, वह खुलासे के करीब पहुंच चुके है। जल्द ही पूरे मामले का वर्कआउट किया जाएगा।
बाक्स
मोहलत का समय पूरा पर नहीं हुई कार्रवाई
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डीएफओ वीके सिंह ने हरीपुर रेंज के स्टाफ को 24 घंटे की मोहलत देते हुए बाघों की मौत के मामलों के खुलासे का आदेश दिया था। रविवार की दोपहर यह समय सीमा खत्म हो गई और जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अब महकमे ने चुप्पी साध ली है। डीएफओ अब इस मामले में कुछ भी बताने से कन्नी काट रहे हैं।
बाक्स
विधायक ने उठाई मजिस्ट्रियल जांच की मांग: हेमराज
बरखेड़ा के सपा विधायक हेमराज वर्मा ने पीलीभीत वन प्रभाग में मारे गए दो बाघों पर चिंता जताई है। उन्होंने डीएम को पत्र देकर मजिस्ट्रेटी जांच को कहा है। विधायक हेमराज ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से बाघ असमय मारे जा रहे हैं। डीएफओ बीके सिंह के कार्यकाल में अब तक कई टाइगरों की पीलीभीत वनप्रभाग में मौत हो चुकी है। वनाधिकारी स्वभाविक और आपसी संघर्ष बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने बाघों की पोस्टमार्टम रिपोर्र्टों में गड़बड़ियां होने की आशंका जताई है। विधायक ने बताया कि वह इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।


बाघों की सुरक्षा पर खड़ा हुआ सवाल
तीन दिन तक सड़क किनारे पड़ा रहा शव, नहीं लगी किसी वन कर्मी को भनक
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर रेंज में भीरा मैलानी मार्ग से पर एक वयस्क बाघ के शव बरामद होने से पार्क प्रशासन सकते में है। मुख्य मार्ग के बिल्कुल निकट और जंगल के रास्ते पर तीन दिन बाघ का शव पड़ा रहने के बावजूद पार्क प्रशासन और वनकर्मियों को इसका पता न लगना बाघों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
बाघ के शव को देखने से ही साफ जाहिर है कि उसका बेरहमी से शिकार किया गया है। बाघ के अगले पैर में घाव और पुट्ठे पर पूंछ के पास रगड़ के निशान पाए गए हैं। उसके शरीर के घाव चीख चीख कर शिकार की गवाही दे रहे हैं। हालांकि पार्क अधिकारियों ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। पोस्टमार्टम से पहले पार्क अधिकारी कुछ भी कहने से मना कर रहे हैं।
परसपुर में इसी तरह हुआ था बाघ का शिकार
प्रत्यक्षदर्शी इसे करंट लगाकर इसे शिकार करना ही बता रहे हैं। इस बात को वर्ष 2010 में नार्थ खीरी की पलिया रेंज के परसपुर क्षेत्र में मिले बाघ के शव से बल मिल रहा है। इस बाघ के पैर में ऐसे ही निशान पाए गए थे और मौके से तार भी बरामद हुआ था। फिलहाल घटना से पूरा महकमा सकते में आ गया है और जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है।
बाक्स
नाखून और मूंछ के बाल भी गायब
बाघ के शव से नाखून और मूंछ के बाल भी गायब मिले है और उसके मुंह से खून का आना भी बताया जा रहा है। खून के आने से जहर से भी मौत की आशंकाएं जताई जा रही है।
बाक्स
मौके पर पहुंचे उच्चाधिकारी
हादसे की सूचना पाकर दुधवा में कैंप कर रहे प्रमुख सचिव वन आरके सिंह, पीसीसीएफ रुपक डे एफडी शैलेष प्रसाद, पार्क उपनिदेशक गणेश भट्ट मौके पर पहुंच गए हैं।
बाक्स
आईवीआरआई बरेली भेजा गया शव
बाघ की मौत का सटीक कारण जानने के लिए उसका शव आईवीआरआई बरेली भेजा गया है।
महबूब आलम-अशोक निगम

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Pilibhit

ट्रैक्टर गंदे नाले मे गिरा, चालक घायल

ट्रैक्टर गंदे नाले मे गिरा, चालक घायल

25 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

गन्ना किसानों पर मेनका गांधी का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल, अब दी ये सफाई

सोशल मीडिया पर पीलीभीत सांसद मेनका गांधी का गन्ना किसानों को लेकर एक वीडियो वायरल होने के बाद बवाल हो गया। विरोधी उनपर जमकर निशाना साधने लगे। इसके बाद मेनका गांधी ने सफाई दी।

17 मई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree