विद्यालय के पास अपना भवन न होने से दिक्कत

Pilibhit Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
शिक्षा के नाम पर छलावा : पीलीभीत का केंद्रीय विद्यालय

एक कक्षा बढ़ाते तो पिछली को कर देते हैं बंद

तीन साल में बंद हो चुकी हैं तीसरी तक की क्लास

पीलीभीत। शिक्षा जैसे गंभीर विषय पर हुक्मरानों की संजीदगी देखनी हो तो चार साल पहले शहर में खुले केंद्रीय विद्यालय चले आएं। यह एक अजूबा है। सिर्फ पांच कमरों वाले इस स्कूल में तीन साल में एक से लेकर तीन तक की कक्षाएं बंद हो चुकी हैं और छह से लेकर आठवीं तक की कक्षाएं जुड़ गई हैं। शिक्षा के नाम पर इस छलावे की एकमात्र वजह यह है कि इसका अपना भवन नहीं है और उसके लिए प्रशासन अब तक जमीन तलाश नहीं कर सका है।
क्षेत्र की सांसद रहीं मेनका गांधी के प्रयासों से सन 2008 में टनकपुर रोड पर स्थित डीआरडीए के प्रशिक्षण भवन में एक से पांचवीं तक की कक्षाओं के साथ केंद्रीय विद्यालय खुला था। पांच कमरे और एक हॉल विद्यालय को मिला था। हॉल के एक हिस्से में प्रधानाचार्य कक्ष और दूसरे हिस्से में दफ्तर है। पहले साल पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलीं। सत्र 2009-10 में पांचवीं पास करने वाले बच्चों को छठी में दाखिला दिया गया और पहली कक्षा बंद कर दी गई। अगले बरस सातवीं में दाखिले हुए और दूसरी कक्षा बंद कर दी गई। अब कक्षा तीन भी बंद हो चुकी है। इस साल चौथी से आठवीं कक्षा तक की ही कक्षाएं चल रही हैं।
इस अंतराल में विद्यालय भवन तैयार कराने की कोशिशें भी चलती रहीं। प्रशासन ने पूरनपुर रोड स्थित बिठौराकलां में भूमि देखी लेकिन यह केंद्रीय विद्यालय संगठन के मानक के अनुरूप नहीं थी। इसके बाद डीआईओएस कार्यालय के पिछले भाग में मौजूद शिक्षा विभाग के भूखंड पर विद्यालय भवन निर्माण के लिए डीआईओएस ने भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार कर डीएम के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिवालय को भेजा। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। सांसद वरुण गांधी का गहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। वह पीलीभीत आने पर इस बारे में जानकारी करेंगे।
प्रशासन की कार्यवाही
केंद्रीय विद्यालय के डीएम पदेन अध्यक्ष होते हैं। तत्कालीन डीएम कौशल राज शर्मा ने ड्रमंड राजकीय इंटर की भूमि केंद्रीय विद्यालय को आवंटित करने की अनुमति सचिवालय से मांगी थी। उन्होंने 28 दिसंबर 10, वर्ष 2011 में 10 फरवरी, 06 अगस्त, 27 सितंबर, 10 अक्टूबर को अनुस्मारक भी भेजे, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी। वर्तमान डीएम राजशेखर ने इसी नौ मई को फिर अनुस्मारक भेजा है।
कोट---------

ड्रमंड राजकीय इंटर कालेज की भूमि केंद्रीय विद्यालय के लिए उपयुक्त है। इसकी अनुमति के लिए शासन को लिखा गया है। अब खुद भी माध्यमिक शिक्षा सचिव से बात करने का प्रयास करूंगा। अनुमति नहीं मिली तो ग्राम समाज की भूमि आवंटित कर विद्यालय भवन बनवाया जाएगा।-राजशेखर, जिलाधिकारी/अध्यक्ष, केंद्रीय विद्यालय-पीलीभीत।

डीएम ने कहा
डीएम के प्रस्ताव पर केंद्रीय विद्यालय संगठन की टीम जिले का दौरा कर रिपोर्ट भेजती है। उसके आधार पर पहले कक्षा एक से पांच तक के लिए विद्यालय खोला जाता है। विद्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराना डीएम का काम है। भवन केंद्रीय विद्यालय संगठन बनवाता है। भूमि चिन्हित है। अनुमति मिलने के बाद भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। -एके बाजपेयी, उप आयुक्त, केंद्रीय विद्यालय संगठन-लखनऊ।

मेनका गांधी ने कहा
बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और वह होनहार बनें इसी उद्देश्य से उन्होंने पीलीभीत में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना 2008 में कराई थी। यह जानकार हैरत हो रही है कि अभी तक इस विद्यालय को जमीन और भवन तक नहीं मिला है। इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन की लापरवाही है। इस संदर्भ में मैं मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल से बात करूंगी, ताकि शीघ्र विद्यालय के लिए जमीन और भवन की व्यवस्था हो।-मेनका गांधी, सांसद आंवला

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