जिला अस्पताल: वर्षों से खराब है अल्ट्रासाउंड मशीन

Pilibhit Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। जिला अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से खराब पड़ी हुई हैं। इस वजह से यहां आने वाले मरीजों को प्राइवेट स्थानों पर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य महकमे ने मशीन ठीक कराए जाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं।
जिला अस्पताल में 82 लाख रुपये की लागत से वर्ष 1992 में अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाई गई थी। अल्ट्रासाउंड मशीन लगने के बाद से जिले वासियों में इस बात की खुशी थी कि अब उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए इधर - उधर नहीं भटकना पड़ेगा। उन्हें कम पैसों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। करीब दो साल पूर्व अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई। काफी लंबे समय से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से मरीज और उनके तीमारदारों को इधर उधर भटकना पड़ता था। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड सुविधा मात्र सौ रुपये में मुहैय्या करवाई जाती थी। प्राइवेट अल्ट्रासाउंड कराने पर मरीजों को न्यूनतम तीन सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने पर मरीजों का समय भी बर्बाद होता है और आने जाने का खर्च भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है।
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दो टेक्नीशियन के सहारे है पैथॉलॉजी
जिला अस्पताल की पैथोलॉजी महज दो टेक्नीशियन के सहारे चल रहा हैं। जबकि यहां टेक्नीशियन के चार पद स्वीकृत हैं। अस्पताल प्रशासन ने एड्स सोसाइटी के कुछ स्वयंसेवकों को संविदा पर लगा रखा है। स्टाफ की कमी के कारण जिला अस्पताल की पैथोलॉजी का लाभ भी मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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12 बजे तक लेते हैं नमूने
वैसे तो पैथोलॉजी में जांच के लिए दो बजे तक नमूने लिए जाने के आदेश हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण कर्मचारी 12 बजे तक ही मरीजों के खून आदि का नमूने लेते हैं। पैथोलॉजी के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन 500 से 600 की संख्या में मरीजों की विभिन्न प्रकार की जांचे की जाती हैं।
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यह होती थीं जांचें
हीमोग्लोबिन, यूरीन, अल्ब्यूमिन शुगर, ब्लीडिंग टाइम, ईएसआर, टीएलसी, डीएलसी, वीडीआरएल, एसजीपीपी, प्रेगनेंसी टेस्ट, वीडाल टेस्ट, सीरम क्रिएटनिन ब्लड यूरिया, एसजीओटी, एसजीपीटी आदि जांचों की सुविधा प्रदान की जाती थी।
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निष्प्रयोज्य हो चुकी हैं मशीन
जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन कई बार खराब होने पर मरम्मत कराई गई। थोड़े - थोड़े अंतराल पर खराबी आने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशालय से इसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। नई मशीन महानिदेशालय के माध्यम से ही खरीदी जानी है। खरीद प्रक्रिया चल रही है। जल्द मशीन आने की संभावना है।
डॉ. आरआर गहलोत
सीएमएस

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