.तो कहां से आएंगी बेटों के लिए बहुएं

Pilibhit Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
पीलीभीत। कोख में पल रही बेटियों का कत्ल सरकारी प्रयासों से रुक नहीं रहा है। समाज के बुद्धिजीवियों का मानना है कि कन्या भ्रूण हत्या के लिए दंपति , अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, और चिकित्सक बराबर के दोषी हैं। कन्या भ्र्रूण हत्या रोकने को स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से व्यापक स्तर पर जागरूकता लाने की जरूरत है। किसी शायर की यह पंक्तियां मौजूदा में काफी मौजू हैं- खिलने दो खुशबू पहचानो, कलियों को मुस्कानें दो।
रविवार को एक चैनल पर प्रसारित आमिर खान के कार्यक्रम सत्यमेव जयते पर कन्या भ्रूण हत्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हुए प्रसारण को समाज के बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सराहा।
बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने को दंपति पूरी तरह दोषी हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर सरकार ने लिंग परीक्षण संबंधी जांच निषेध है, के बोर्ड लगवाकर अपने दायित्वों को पूरा समझ लिया है। अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट धन के लालच में परीक्षण रिपोर्ट का खुलासा कर देते हैं। इसी दिशा में आगे बढ़कर ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। लोगों की समझ में अब भी नहीं आ रहा है कि बेटियों की कोख में हत्या ही बेटों के लिए ही मुसीबत का कारण बनती जा रही है। बेटियां अब किसी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। ऐसे दंपति भी हैं जो अपनी बेटियों को आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सीए जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचाने को परीक्षाएं दिला रहे हैं। ऐसे लोगों को आदर्श मानने की जरूरत है। अमर उजाला ने कुछ बुद्धिजीवियों से इस विषय पर बात की। प्रस्तुत हैं उनकी राय-

बराबरी का भाव विकसित हो
मेरा मानना है कि पत्नी से अधिक पति और ससुराल पक्ष के लोग कन्या भ्रूण हत्या को दोषी हैं। उनके साथ अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट और वह डाक्टर भी जिम्मेदार हैं जो इस काम को अंजाम देते हैं। लोगों में बेटा-बेटी के बीच बराबरी की भावना विकसित किए बिना इस पर अंकुश लगाना मुश्किल है।
डॉ. दिव्या मिश्रा , स्त्री रोग विशेषज्ञ

भ्रूण हत्या पर हो उम्र कैद
देश के कानून की नजर में कन्या भ्रूण हत्या संज्ञेय अपराध है। इसके लिए महिला अधिक दोषी नहीं है। पुरुष एबॉरशन के लिए महिला को प्रेरित करते हैं। लिंग परीक्षण रिपोर्ट बताने और एबॉरशन करने वाले लोग भी दोषी हैं। आईपीसी की धाराओं में उन्हें उम्र कैद की सजा प्रावधान है।
स्नेहलता तिवारी
वरिष्ठ अधिवक्ता

और जागरूकता की जरूरत
माता पिता चाहें तो बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और आफीसर बन सकती हैं। उन्हें उच्च शिक्षा दिलाने की जरूरत है। बेटियां बोझ नहीं हैं। कई मायनों में बेटों से बेहतर साबित होती हैं। कन्या भ्रूण हत्या रोकने को व्यापक स्तर पर स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से लोगों में जागरूकता की जरूरत है।
शशि गुप्ता, अध्यक्ष
बाल कल्याण समिति

निगेटिव सोच से बिगड़ा हाल
वंश चलाने की नकारात्मक सोच और दहेज प्रथा की वजह से कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला है। इससे समाज की तुलनात्मक संरचना प्रभावित हो रही है। शिक्षित करने से बेटियां को भी बेटों सा मुकाम मिल सकता है। देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने को कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए।
डॉ रामश्री, प्रधानाचार्य

सोचें, तो क्या उनका वजूद होता
बेटी, बहू और मां जैसा दर्जा पाने वाली लड़कियों को दुनिया में आने से पहले ही खत्म कर देना हैवानियत है। ऐसा करने वाले सिर्फ इतना सोचें कि अगर उनकी मां के साथ ऐसा होता तो क्या आज उनका वजूद होता। आमिर खान का सत्यमेव जयते कार्यक्रम समाज को आईना है।
तबस्सुम नाज, समाज सेविका

मां का कोई दोष नहीं है
मेरा मानना है कि बेटियों को समाज में बोझ समझकर लोग कन्या भ्रूण हत्या जैसा अपराध कर रहे हैं। इसके लिए सिर्फ मां को दोषी ठहराना नाइंसाफी है। जिन लोगों के सहयोग से भ्रूण हत्या होती है। वह सभी दोषी हैं। इस पर अंकुश को मौजूदा कानून सख्ती से लागू हो।
स्वीटी अग्रवाल
गृहणी

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