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शारदा डैम को दस जगह खतरा

Pilibhit Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। अंग्रेजों के जमाने का शारदा डैम कम से कम दस स्थानों पर जर्जर हालत में है। शारदा बैराज से बरसात में छोड़ा जाने वाला लाखों क्यूसेक अतिरिक्त पानी बांध को नुकसान पहुंचा सकता है। फ्लड प्रोटेक्शन स्कीम के तहत सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए नक्शे में लाल रंग के निशान से बांध पर दस खतरे वाले स्थानों को चिन्हित किया गया है। सुरक्षा कार्य के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को अभी स्वीकृति नहीं मिली है। मंजूरी मिल भी जाती है तो ये काम इस बरसात से पहले पूरा नहीं हो सकता क्योंकि बकौल अधिशासी अभियंता इसके लिए कम से कम आठ महीने का समय चाहिए।
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शारदा उत्तराखंड में नेपाल सीमा पर स्थित कालापानी से निकलकर चंपावत जिले की तहसील पूर्णागिरि (टनकपुर) से मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। वहां से बनबसा, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी होती हुई सीतापुर में जाकर घाघरा में मिल जाती है। बीते दो दशक से शारदा नदी बरसात में नेपाल सीमा से लगे जिलों में कहर बरपा रही है। इस कारण पीलीभीत के अलावा खीरी, सीतापुर और बाराबंकी के लोग बाढ़ की त्रासदी झेलते रहे हैं। अपने जिले में 22 किलोमीटर लंबा शारदा बांध ब्रिटिश काल में बनाया गया था। लंबा समय बीत जाने, जगह-जगह चूहों के बिल बनाने तथा अन्य कई कारणों से बांध जर्जर हो गया है। पानी के वेग को झेलने की इसकी क्षमता भी कम हो गई है। यही वजह है सिंचाई विभाग ने इसे बचाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया। इसके लिए तैयार कराए गए नक्शे में सिंचाई विभाग ने बांध को दस स्थानों पर लाल निशान से चिन्हित किया है। मतलब यह कि इन स्थानों पर बांध को खतरा है। प्रोजेक्ट को शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी है। बरसात शुरू होने में अब करीब डेढ़ महीना ही शेष है। जाहिर है, इस साल भी बांध की मरम्मत का काम नहीं हो सकेगा और लोगों को फिर से बाढ़ की विभीषिका से दो-चार होना पड़ेगा।

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...और तब हुआ नेपाल से शारदा में पानी आने का खुलासा
चौंकाने वाली बात 1993 में उस समय सामने आई, जब शारदा बैराज से नदी में तीन लाख 60 हजार 340 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि खीरी स्थित शारदा बैराज, शारदानगर में यह पानी सात लाख सात हजार 430 क्यूसेक हो गया था। सिंचाई विभाग ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि खीरी में इतना पानी कैसे बढ़ गया? इस बात का खुलासा तब हुआ जब खीरी के तत्कालीन सांसद रविप्रकाश वर्मा, हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति रहे होप संस्था के अध्यक्ष कमल किशोर और अधिवक्ता राजेश भारती ने याचिका दाखिल करते हुए शारदा नदी में नेपाल का पानी आने का दावा किया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों ने सर्वे किया तो जनवरी 2010 में यह बात सामने आई कि नेपाल की बमदी नदी में आने वाली राधा, श्याली, सुंदर, बनारा का पानी शारदा नदी में मिला दिया गया, जिससे शारदा नदी में बाढ़ आई।
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बसपा सरकार ने नहीं की डैम की चिंता : रवि
हाईकोर्ट द्वारा गठित बाढ़ नियंत्रण समिति के सदस्य और खीरी के पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा का कहना है कि बसपा सरकार चाहती तो शारदा डैम को दो साल पहले ही मजबूत किया जा सकता था। समिति के प्रयास पर विशेष सचिव ने यहां का दौरा कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है, जिस पर अब योजनाएं बनाई जा रही हैं। सपा सरकार का प्रयास होगा, बाढ़ त्रासदी से जनता को हर हाल में बचाया जाए।
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यह है बाढ़ नियंत्रण समिति
हाईकोर्ट ने शारदा बाढ़ नियंत्रण समिति में गंगा फ्लड कंट्रोल कमीशन पटना के अध्यक्ष, प्रमुख सचिव सिंचाई, प्रमुख सचिव वन, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, दुधवा नेशनल पार्क के निदेशक, सिंचाई के मुख्य अभियंता, मुख्य पुल इंजीनियर पूवोत्त्तर रेलवे गोरखपुर, सीनियर डिवीजनल इंजीनियर पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल, जनता के प्रतिनिधि के तौर पर खीरी के पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा को नामित किया है।

वर्जन
शारदा डैम की मरम्मत होना जरूरी है। जिले को बाढ़ से बचाने के लिए फ्लड प्रोटेक्शन स्कीम बनाई गई है। इसमें प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिलने के बाद आठ माह में कार्य पूरे हो सकेंगे। हाल ही में बनी इस स्कीम को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। अब यह कार्य बरसात बाद ही हो सकेंगे। -भानू प्रताप, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग-पीलीभीत।

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