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स्वाइन फ्लू के तीन नए रोगी मिले

Noida Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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नोएडा। नोएडा के निजी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के तीन नए रोगी मिले हैं। इसके साथ पीड़ितों की संख्या नौ पहुंच गई है। पुराने रोगियों को दिल्ली रेफर किया जा चुका है, जबकि नए रोगी नोएडा के अस्पताल में भर्ती हैं। निजी अस्पतालों से मिली पांच मरीजों की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें स्वाइन फ्लू से पीड़ित मानते हुए टैमी फ्लू दवा उपलब्ध करा दी है। हालांकि विभाग ने दिल्ली के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में काउंटर जांच के लिए मरीजों का स्वैब अस्पतालों से मांगा है।
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सीएमओ डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि इन पांच में एक रोगी मैक्स से, एक फोर्टिस से, एक भारद्वाज से और दो कैलाश अस्पताल से हैं। नोएडा से सिर्फ दो रोगी हैं, जिनमें एक सेक्टर-26 और दूसरा सेक्टर-41 से है। दो मरीज गाजियाबाद और एक दिल्ली का निवासी है। वहीं, रविवार रात जिला अस्पताल में भी एक रोगी प्रकाश में आया था। इन सभी मरीजों को अस्पतालों ने दिल्ली के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया है। डॉ. गर्ग ने बताया कि निजी लैब की रिपोर्ट मान्य है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए अस्पतालों को अनुमति दी जा चुकी है। मरीजों को टैमी फ्लू कोर्स के आधार पर दे दी है। इनकी देखभाल करने वाले लोगों में स्वाइन फ्लू की जांच के आदेश दिए गए हैं।

दूसरी ओर, कैलाश अस्पताल में स्वाइन फ्लू के तीन नए संदिग्ध इलाज के लिए पहुंचे हैं। आईसीयू इंचार्ज डॉ. अनिल गुरनानी ने बताया कि तीनों मरीज शनिवार रात भर्ती किए गए हैं। 75 वर्षीय एक रोगी सेक्टर-23 से है, जबकि 53 वर्षीय महिला और 23 वर्षीय युवक गाजियाबाद के निवासी हैं। महिला और पुरुष रोगी की गंभीर हालत के चलते उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है।

प्रबंधन से जानकारी छिपा रहे डॉक्टर
जिला अस्पताल के डॉक्टर प्रबंधन से स्वाइन फ्लू रोगियों की जानकारी छिपा रहे हैं। रविवार रात अस्पताल की इमरजेंसी में स्वाइन फ्लू की पॉजिटिव रिपोर्ट लेकर पहुंचे रोगी को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने दिल्ली रेफर कर दिया, लेकिन सीएमएस डॉ. अशोक मिश्र को इस रोगी की जानकारी नहीं दी। सीएमएस ने कहा कि डॉक्टर से इस मामले में जवाब तलब किया जाएगा।

पहले से बीमार लोगों को ज्यादा खतरा
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि पहले से बीमार लोगों के एच1एन1 वायरस (स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार) से पीड़ित होने पर उनकी जान को और भी ज्यादा खतरा रहता है। इनमें दिल, किडनी, फेफड़े, मधुमेह आदि बीमारियों से पीड़ित रोगी शामिल हैं। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण एच1एन1 वायरस ज्यादा बिगड़ सकता है।

1918 में महामारी थी
1918 में एच1एन1 महामारी के रूप में फैला था। यह वायरस विश्व में पांच करोड़ लोगों की मौत का कारण बना था। उस समय इस बीमारी को स्पैनिश फ्लू एच1एन1 कहते थे। इसके बाद 2009 में इस बीमारी का प्रकोप फैला था। इसके बाद से हर साल इस रोग के मामले प्रकाश में आ रहे हैं।

2009 में 234 हुए थे पीड़ित
वर्ष 2009 में 234 मरीजों में एनसीडीसी ने स्वाइन फ्लू की पुष्टि की थी। स्वाइन फ्लू के 410 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे।

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