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पानी का रास्ता तलाशते नोएडा-ग्रेनो के बिल्डर

Noida Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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नोएडा। निर्माण कार्यों में भूजल के इस्तेमाल पर रोक के बाद नोएडा के बिल्डर पानी का रास्ता तलाशने में जुटे हुए हैं। बिल्डर कुछ साइट पर काम बंद कर प्राधिकरण से विकल्प मिलने की आस कर रहे हैं। कुछ बिल्डर प्राधिकरण के एसटीपी से पानी उपलब्ध कराने के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक वहां से पानी नहीं मिल सका है। कुछ बिल्डर ऐसे भी दिखे, जो अवैध रूप से भूजल का इस्तेमाल कर काम जारी रखे हुए है।
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दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े सभी बड़े प्रोजेक्टों में भूजल के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। भूजल के गिरते स्तर पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई गई थी। इस समय नोएडा में करीब 60 से 70 कंपनियों के दर्जनों प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भी करीब इतनी ही कंपनियां काम कर रही हैं। हाल में अवैध जल का दोहन करने पर आठ बिल्डरों का काम प्राधिकरण ने रुकवाया है, जबकि एनजीटी ने तीन को ‘कारण बताओ नोटिस’ दिया है। करीब एक दर्जन की संख्या में बिल्डरों ने स्वयं काम रोक लिया है। इसके अलावा अन्य अपने स्रोत से या अवैध रूप से जल दोहन कर कार्य कर रहे हैं।

करीब डेढ़ माह पहले ट्रिब्यूनल के पहली बार के आदेश पर बिल्डरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। इससे नाराज ट्रिब्युनल ने बीती सुनवाई में अवमानना का मुकदमा चलाने के लिए तीन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। बिल्डर इससे सकते में आ गए हैं और भूजल उपयोग बंद कर दिया। कुछेक बिल्डर अन्य स्रोत से जरूरत पूरी करने की बात कह रहे हैं। इसके लिए बिल्डरों के निजी एसटीपी से शोधित पानी मंगवा रहे हैं।
अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर देखा। सेक्टर 18 व 96 में दो बड़े प्रोजेक्ट में पानी के सहारे होने वाले निर्माण कार्य को बंद कर दिया है। सेक्टर 52 में भी निर्माण कार्य बंद दिखा, जबकि सेक्टर 32 में सोमवार को भी काम चलता दिखा। एक्सप्रेसवे पर चल रहे कुछ प्रोजेक्टों में काम बंद और कुछ में भूजल के अब भी इस्तेमाल की जानकारी मिली है। वहीं निर्माण कार्य बंद करवाने वाले एक दर्जन बिल्डर जल व सीवर विभाग में एसटीपी से शोधित पानी के लिए आवेदन भी कर चुके हैं।
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पजेशन में देरी के लिए बिल्डर बना सकते हैं बहाना
पानी पर चल रहे इस संकट का फायदा बिल्डर प्रोजेक्ट पजेशन देर से देने में उठा सकते हैं। पजेशन के समय वे कह सकते हैं कि भूजल पर रोक से काम बंद करना पड़ गया था। इस कारण पजेशन देने में देरी हो रही है। क्रेडाई ने भी पत्र लिखकर प्राधिकरण को शीघ्र ही कोई विकल्प तलाशने की मांग की है। क्रेडाई ने चेताया है कि ज्यादा दिन काम रुका तो दिक्कत बढ़ सकती है।
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पांच रुपये प्रति किलोलीटर होगी शोधित पानी की दर
भूजल पर ट्रिब्युनल से रोक लगने केबाद प्राधिकरण ने निर्माण कार्यों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए नया विकल्प तलाशा है। प्राधिकरण ने एसबीआर तकनीक पर आधारित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित पानी को बिल्डरों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। पांच रुपये प्रति किलोलीटर के हिसाब से बिल्डरों को पानी उपलब्ध कराएगा। इसकी फाइल बनाकर जल विभाग ने प्राधिकरण को भेजी है। आज-कल में ही सीईओ से इस पर अप्रूवल मिलने के आसार हैं। इसके बाद बिल्डर यहां से पानी ले सकेंगे। जल विभाग से जानकारी के मुताबिक नोएडा में अधिकतम 60-70 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनके निर्माण कार्यों में रोजाना सात से आठ एमएलडी पानी खर्च होने का अनुमान है, जबकि जल विभाग केपास नए तकनीक से बने एसटीपी से ही करीब 89 एमएलडी पानी शोधित हो रहा है। ऐसे में पानी की वजह से निर्माण कार्यों में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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अनुमति के लिए पेंडिंग हैं आवेदन
क्रेडाई के मुताबिक केंद्रीय भूजल बोर्ड ने नोएडा व ग्रेटर नोएडा को गैर अधिसूचित क्षेत्र में शामिल कर रखा है। अधिसूचित क्षेत्र में किसी भी शर्त पर भूजल निकालने की अनुमति नहीं मिलती है, मगर गैर अधिसूचित क्षेत्र में दुरुपयोग न करने की शर्त के साथ भूजल निकालने की अनुमति है। इसके लिए बोर्ड के लखनऊ स्थित दफ्तर में आवेदन करना होता है। वहां से अनुमति मिल जाती है। कई बिल्डरों ने आवेदन कर रखा है। अभी अनुमति पेंडिंग है।
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प्रोजेक्ट रुकने या देरी की संभावना कम
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के रोक के बाद ज्यादातर बिल्डरों ने भूजल का उपयोग बंद कर दिया है। क्रेडाई के सदस्य बिल्डर इसकी जानकारी भी उपलब्ध करा चुके हैं। कुछ बिल्डर भूजल के बजाय अन्य स्रोत से काम चला रहे हैं। कुछ ने अपना काम विकल्प मिलने तक रोक दिया है। वर्तमान समय में निर्माण कार्य के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। उसमें पानी का खर्च बहुत कम होता है। इस कारण काम रुकने और प्रोजेक्ट में देरी जैसी कोई समस्या नहीं होगी। प्रोजेक्ट समय से पूरे होंगे। ट्रिब्युनल में अगली सुनवाई पर इस बार क्रेडाई भी शहर में भूजल की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगी, ताकि ट्रिब्युनल के सामने सही तथ्य आ सके।
मनोज गौड़,
अध्यक्ष क्रेेडाई, पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
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कमेटी कर रही निगरानी
ट्रिब्युनल के आदेश केबाद नोएडा प्राधिकरण ने अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर निगरानी रखने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बना दी है। इस कमेटी ने भूजल का इस्तेमाल करने वाले आठ बिल्डरों का काम रुकवा दिया है। नियमित जांच करकेरिपोर्ट भी सीनियर अफसरों को उपलब्ध करा रही है। अगली सुनवाई पर प्राधिकरण इस रिपोर्ट को ट्रिब्युनल के समक्ष रखेगा।
मनोज राय
ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।

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